केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में 5 महत्वपूर्ण बिल पेश करेंगे. पहला बिल पुडुचेरी विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण से जुड़ा होगा. जबकि दूसरा बिल जम्मू-कश्मीर विधानसभा परिचालन के वक्त वहां भी 33 फीसदी महिला आरक्षण की व्यवस्था का है. इसके अलावा अमित शाह तीन बिल सीआरपीसी संशोधन बिल पेंश करेंगे. इन बिलों को पिछले सत्र में भी पेश किया गया था. हालांकि, इन्हें बाद में संसदीय कमेटी में संशोधन के लिए भेजा गया था, संशोधन के बाद फिर ये बिल लोकसभा में आज पेश किए जाएंगे.
दरअसल, संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है. सोमवार को जम्मू कश्मीर से जुड़े दो बिल जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल और जम्मू-कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) बिल राज्यसभा से पास हो गए. ये दोनों बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुके हैं. ये बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुके हैं. अब राष्ट्रपति के दस्तखत होते ही ये कानून बन जाएंगे.
क्या है इन दो बिलों में?
जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल वंचित और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है. जबकि जम्मू-कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) बिल, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कश्मीरी प्रवासियों और पीओके से विस्थापित लोगों के लिए सीट रिजर्व रखने का प्रावधान करता है. सोमवार को इन बिलों को राज्यसभा में पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इससे 'नए और विकसित कश्मीर' की शुरुआत हुई है, जो आतंकवाद से मुक्त होगा. अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े ये दो बिल बीते 75 साल से अपने अधिकारों से वंचित लोगों को न्याय देंगे.
केंद्र ने तीन विधेयकों को वापस लिया
सरकार ने संसदीय पैनल द्वारा की गई विभिन्न सिफारिशों के बाद मौजूदा आपराधिक कानूनों को बदलने और उन्हें नए सिरे से पेश करने के उद्देश्य से तीन विधेयकों को वापस लेने का फैसला किया है. इन तीनों विधेयक को मंगलवार को संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है.
केंद्र ने 11 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम विधेयक के साथ लोकसभा में पेश किया था. तीनों विधेयक आपराधिक प्रक्रिया संहिता अधिनियम, 1898, भारतीय दंड संहिता, 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेंगे.
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद को सौंपे गए बयानों में कहा कि गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति द्वारा विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा के बाद तीन बिलों में बदलाव का सुझाव देने वाली सिफारिशें करने के बाद यह फैसला लिया गया.