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क्या तबलीगी जमात की वजह से ही दिल्ली में फैला था कोरोना? गृह मंत्रालय ने संसद में दिया जवाब

राज्यसभा में सोमवार को तबलीगी जमात को लेकर सवाल हुआ. संसद में पूछा गया कि अबतक तबलीगी जमात पर क्या एक्शन हुआ है, जिसपर गृह मंत्रालय ने अपना जवाब दिया है.

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तब्लीगी जमात के मसले पर हुआ था सवाल (फाइल फोटो)
तब्लीगी जमात के मसले पर हुआ था सवाल (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तबलीगी जमात को लेकर संसद में सवाल
  • दिल्ली में कोरोना फैलने का कारण पूछा

कोरोना वायरस संकट जब देश में शुरू हुआ था, तब दिल्ली में अचानक केस में बढ़ोतरी हुई थी. इसके पीछे बड़ा कारण तबलीगी जमात को बताया गया. सोमवार को देश की संसद में इसी मसले पर सरकार से सवाल हुआ, जिसपर गृह मंत्रालय ने अपना जवाब दिया. गृह मंत्रालय ने कहा है कि एक ही जगह पर कई लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए रुके हुए थे, इसी वजह से कोरोना कई लोगों में फैल गया. 

तबलीगी जमात के मसले पर राज्यसभा में सांसद अनिल देसाई ने सवाल किया. उन्होंने पूछा कि क्या ये तथ्य है कि दिल्ली और अन्य राज्यों में कोरोना वायरस फैलने के पीछे मुख्य कारण तबलीगी जमात है? दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तब कितने लोग इकट्ठे हुए थे? अभी तक तबलीगी जमात के कितने लोग गिरफ्तार हुए और मौलाना साद का क्या स्टेटस है? अगर मौलाना साद गिरफ्तार हुआ है तो अबतक क्या एक्शन हुआ है?

सांसद के इन सवालों पर गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गाइडलाइन्स जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग एक जगह पर लंबे वक्त के लिए इकट्ठा थे. इस दौरान ना मास्क पहना गया और ना ही अन्य नियमों का पालन हुआ, जिसके कारण कई लोगों में कोरोना वायरस फैल गया. 

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जवाब में कहा गया है कि 29 मार्च तक दिल्ली पुलिस ने निजामुद्दीन इलाके से कुल 2361 लोगों को निकाला था. इनमें से 233 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.  हालांकि, मौलाना साद को लेकर अभी भी जांच चल रही है. 

संसद में बताया गया है कि तबलीगी जमात को लेकर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है, जिसमें फॉरेनर्स एक्ट, महामारी एक्ट के तहत मामले दर्ज हुए हैं. आपको बता दें कि मार्च में सामने आए इस मामले के बाद देश में काफी हंगामा हुआ था. बड़ी संख्या में तबलीगी जमात के लोग अलग-अलग इलाकों में गए थे और कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे. हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने अगस्त 2020 में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि तबलीगी जमात को कोरोना के केस फैलने के मामले में बलि का बकरा बनाया गया था.

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