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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एक लाख 65 हजार फ्लैट्स पर काम ठप, फ्लैट बुक करने वालों के पैसे फंसे

दिल्ली-एनसीआर मार्केट के बाद मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स रुकी हुई हैं या देरी से चल रही हैं. दक्षिण के शहरों में बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में सिर्फ ऐसे प्रोजेक्ट्स की संख्या 9 फीसदी है.

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दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स रुकी हुईं हैं या देरी से चल रहीं हैं. -सांकेतिक तस्वीर
दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स रुकी हुईं हैं या देरी से चल रहीं हैं. -सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सात शहरों में 4 लाख 48 हजार 129 करोड़ रुपये अटके
  • दिल्ली-एनसीआर में 1 लाख 81 हजार 410 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट अटके

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में फ्लैट बुक करने वाले होमबॉयर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इन दोनों शहरों में 1.18 लाख करोड़ रुपये के 1.65 लाख से ज्यादा फ्लैट रूके हुए हैं या फिर उनके काम देरी से हो रहे हैं. इसका खुलासा प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एनारॉक (ANAROCK) की स्टडी में हुआ है. एनारॉक ने अपने स्टडी में सात शहरों दिल्ली-एनसीआर, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर), कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में 2014 या उससे पहले शुरू की गई होम प्रोजेक्ट्स को शामिल किया है. 

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ग्राहकों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए होमबॉयर्स के फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने अपनी राय रखी है. उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि हर परियोजना में देरी के कारणों का पता लगाया जाना चाहिए और समाधान किया जाना चाहिए. उन्होंने डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की.

जानें किन शहरों में अटके हैं प्रोजेक्ट्स

एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, 31 मई 2020 तक सात शहरों में 4 लाख 48 हजार 129 करोड़ रुपये की 4 लाख 79 हजार 940 प्रोजेक्ट ठप हो गईं या काफी देरी से चल रही हैं. इसमें अकेले दिल्ली-एनसीआर की 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, जिसमें 1 लाख 81 हजार 410 करोड़ रुपये की 2 लाख 40 हजार 610 प्रोजेक्ट ठप या देरी से चल रही हैं. 

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- दिल्ली-एनसीआर के आंकड़ों का और ब्योरा देते हुए एनारॉक ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा एरिया में देरी से चल रहीं प्रोजेक्ट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि गुरुग्राम का हिस्सा केवल 13 प्रतिशत है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 1 लाख 18 हजार 578 करोड़ रुपये की 1 लाख 65 हजार 348 प्रोजेक्ट ठप या फिर देरी वाली हैं. 

- गुरुग्राम में जहां 44 हजार 455 करोड़ रुपये की 30 हजार 733 प्रोजेक्ट का काम ठप या फिर रूक गया है. वहीं, गाजियाबाद के बाजार में 22 हजार 128 ऐसी प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी कीमत 9 हजार 254 करोड़ रुपये है.

- दिल्ली, फरीदाबाद, धारूहेड़ा और भिवाड़ी में कुल मिलाकर 9 हजार 124 करोड़ रुपये की 22,401 प्रोजेक्ट्स ठप या फिर देरी से चल रहीं हैं. 

- मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 1 लाख 84 हजार 226 करोड़ रुपये की 1 लाख 28 हजार 870 प्रोजेक्ट हैं जो अटकी या फिर देरी से चल रहीं हैं. बेंगलुरु में 28 हजार 072 करोड़ रुपये की 26 हजार 030 प्रोजेक्ट या तो ठप हैं या फिर देरी से चल रहीं हैं. 

- हैदराबाद में 11,310 करोड़ रुपये की 11 हजार 450 प्रोजेक्ट्स या तो अटक गए हैं या फिर देरी से चल रहे हैं. वहीं, चेन्नई में 3 हजार 731 करोड़ रुपये की 5 हजार 190 प्रोजेक्ट्स वर्तमान में अटकी हुई हैं या काफी देरी से चल रही हैं. पुणे में लगभग 27 हजार 533 करोड़ रुपये की 44 हजार 250, जबकि कोलकाता में 23 हजार 540 ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी कीमत 11 हजार 847 करोड़ रुपये है और ये प्रोजेक्ट या तो देरी से चल रही हैं या किसी कारण से अटकीं हैं.

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पिछले एक दशक से रियल स्टेट की हालत ठीक नहीं: प्रशांत ठाकुर

एनारॉक के सीनियर डायरेक्टर और रिसर्च चीफ प्रशांत ठाकुर ने कहा कि परियोजना में देरी पिछले एक दशक में भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र का अभिशाप रहा है, विशेष रूप से एनसीआर में. यहां तक ​​​​कि आरईआरए (रियल्टी कानून) के कार्यान्वयन का भी इस पर थोड़ा प्रभाव पड़ा है.

उन्होंने कहा कि सरकार का 25,000 करोड़ रुपये का स्ट्रेस फंड, जिसे 2019 में लॉन्च किया गया था, कई अटकी परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने में कारगर साबित हुआ है. ठाकुर ने कहा कि ये कहने की जरूरत नहीं है कि यमुना एक्सप्रेसवे के चलते पहले ग्रेटर नोएडा में रियल एस्टेट कारोबार उछाल आया था. बिल्डर्स ने कनेक्टिविटी की सुविधाओं को भुनाया था और कई परियोजनाओं को लॉन्च किया. बिल्डर्स ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भी कई परियोजनाएं शुरू कीं जो पूरी होने से पहले ही फंस गईं हैं. 

इन कंपनियों की परियोजनाएं रूकी हुई हैं

एनारॉक ने डेवलपर्स के नाम के साथ-साथ उन परियोजनाओं का भी उल्लेख नहीं किया है जो रुकी हुई हैं या काफी देरी से चल रही हैं, लेकिन जेपी इंफ्राटेक, यूनिटेक, आम्रपाली और द 3 सी कंपनी कुछ बड़ी कंपनियां हैं, जिनकी परियोजनाएं दिल्ली-एनसीआर में रुकी हुई हैं.

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ऐसे कई अन्य बिल्डर्स हैं जिन्होंने ग्राहकों से किए गए वादे के मुताबिक अपनी परियोजनाओं को पूरा नहीं किया है जबकि कई कस्टमर्स ने लगभग पूरी खरीद मूल्य का भुगतान कर दिया है. इनमें से कई कस्टमर्स ऐसे हैं जो बिना समाधान के लगातार होम लोन का ब्याज भी चुका रहे हैं. कई खरीदारों ने अपने निवेश को लेकर डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के खिलाफ विभिन्न अदालतों के साथ-साथ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) का दरवाजा खटखटाया है.

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