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ओवैसी ने करवाया अपना ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू, कार और बाइक वालों को दी हिदायत

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "मैं हैदराबाद संसदीय क्षेत्र के निवासियों से गुजारिश करता हूं कि वे अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाएं और उसे रिन्यू करवाएं."

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AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी

AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों से ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर एक अपील की है. उन्होंने इस दौरान यह भी बताया कि मैंने अपना डीएल रिन्यू करवाया है. ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "मैंने RTA (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) बंदलागुडा साउथ जोन में अपना ड्राइविंग लाइसेंस (LMV & MCWG) रिन्यू करवाया. मैं हैदराबाद संसदीय क्षेत्र के निवासियों से गुजारिश करता हूं कि वे अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाएं और उसे रिन्यू करवाएं."

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उन्होंने आगे कहा कि हादसों और मौतों पर लगाम लगाने के लिए कृपया नाबालिगों को कार और दो पहिया व्हीकल चलाने से रोकें.

भारत में बढ़ते सड़क हादसे

पिछले साल नवंबर में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं-2022' पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में कुल 4,61,312 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिसमें 1,68,491 लोगों की जान चली गई. जबकि 4,43,366 लोग घायल हो गए थे.

रिपोर्ट के मुताबिक, हर एक घंटे में 53 सड़क हादसे हुए और हर एक घंटे में 19 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई. इनमें सीट बेल्ट और हेलमेट का इस्तेमाल न करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही. आंकड़ों के मुताबिक, खड़े वाहन से टक्कर के मामलों में सबसे ज्यादा 22 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई. वहीं, आमने-सामने टक्कर के मामलों में भले ही 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई लेकिन यह एक्सीडेंट का दूसरा सबसे बड़ा प्रकार है.

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क्या कहते हैं पिछले आंकड़े?

सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता, प्रति 100 दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की संख्या से मापी जाती है. पिछले एक दशक में इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है. 2012 में इसकी संख्या 28.2 फीसदी थी, जो 2022 में बढ़कर 36.5 फीसदी हो गई है, जिसमें हर साल लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि, 2020 और 2021 में  COVID-19 लॉकडाउन के कारण सड़क दुर्घटनाओं और उनके कारण होने वाली मौतों में पूर्ण गिरावट दर्ज की गई क्योंकि यात्रा को लेकर बहुत सारे प्रतिबंध लागू थे.लेकिन गंभीर मामलों की दर बढ़ गई थी.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे सहित देश के सड़क नेटवर्क का विस्तार हुआ है और गाड़ियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से सड़क दुर्घटनाओं के कारण मृत्यु दर भी बढ़ रही है. आंकड़ों के मुताबिक, कार में बैठे हुए उन 16,715 लोगों की मौत हुई है, जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी. इनमें 8300 लोग कार ड्राइव कर रहे थे, जबकि 8331 लोग कार में सवार थे.
 

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