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'आपके बाप का पैसा नहीं मांग रहा हूं...', ऐसा क्यों बोले तमिलनाडु के डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन

तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान फंड में अपनी हिस्सेदारी की मांग की है. उन्होंने कहा कि हम आपके बाप का पैसा नहीं मांग रहे हैं. हम अपनी हिस्सेदारी मांग रहे हैं. डिप्टी सीएम ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्य पर हिंदी थोपने का प्रयास कर रही है.

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डिप्टी CM उदयनिधि. (फाइल फोटो)
डिप्टी CM उदयनिधि. (फाइल फोटो)

तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के समग्र शिक्षा अभियान फंड में अपनी हिस्सेदारी की मांग की है. उन्होंने कहा कि हम आपके बाप का पैसा नहीं मांग रहे हैं. हम अपनी हिस्सेदारी मांग रहे हैं. डिप्टी सीएम ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्य पर हिंदी थोपने का प्रयास कर रही है.

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उदयनिधि ने कहा कि राज्य 2,190 करोड़ रुपये की भीख नहीं मांग रहा है, जिसे तमिलनाडु को सही तरीके से जारी किया जाना चाहिए.

'हम अपना अधिकार मांग रहे हैं'

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हम आपके पिता का पैसा नहीं मांग रहे हैं. हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, जिसे तमिलनाडु के छात्रों के अभिभावकों ने कर के रूप में चुकाया था. हम वह फंड मांग रहे हैं जो हमारा है.

उन्होंने कहा कि न तो तमिलनाडु सरकार और न ही यहां के लोग भाजपा की झांसे में फंसेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा और दो-भाषा की नीति खतरे में हैं.

'वह अपनी बात पर अड़े हुए हैं'

उदयनिधि ने दावा किया, 'वे इस बात पर अड़े हुए हैं कि हमें हिंदी स्वीकार करनी चाहिए. वह तमिलनाडु के इतिहास, संस्कृति और विशिष्ट पहचान को नष्ट करना चाहते हैं. फासीवादी भाजपा सरकार तमिल लोगों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है.'

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एक दुर्लभ प्रदर्शन में उन्होंने प्रतिद्वंद्वी पार्टी AIADMK से हाथ मिलाने और राज्य की दो-भाषा नीति के लिए लड़ने को कहा. उन्होंने कहा, 'मैं AIADMK से आग्रह करता हूं कि वे हमारे साथ जुड़ें और राजनीतिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल करने के बजाय अपनी आवाज उठाएं. अपनी पार्टी के नाम में 'अन्ना' और 'द्रविड़म' को शामिल करते हुए अलग न खड़े हों.'

विचाराधीन निधि केंद्र सरकार द्वारा समग्र शिक्षा मिशन अनुदान में तमिलनाडु का हिस्सा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में कहा कि केंद्र राज्य को तब तक धनराशि जारी नहीं करेगा, जब तक कि वह पूरे राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू नहीं कर देता. दूसरी ओर तमिलनाडु सरकार ने इसे ब्लैकमेल करार दिया और कहा कि राज्य में तीन भाषा की नीति में राज्य के लोगों पर हिंदी थोपने जैसा है.

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