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'मुझपर कनाडा का वीजा था, एजेंट ने...', अमेरिका से डिपोर्ट हरप्रीत की आपबीती

अमेरिका से निर्वासित होकर भारत लौटे नागपुर के हरप्रीत ने बताया कि मैं अमेरिका नहीं, बल्कि कनाडा जाना था. लेकिन एजेंट की लापरवाही के चलते वह अमेरिका पहुंच गए. उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में मेरे करीब 49 लाख 50 हजार रुपये खर्च हो गए. उन्होंने ये पैसे बैंक से लोन और दोस्तों से उधार लिया थे.

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अमेरिका से लौटे हरप्रीत सिंह.
अमेरिका से लौटे हरप्रीत सिंह.

अमेरिकी सेना का विमान 104 भारतीय निर्वासित को लेकर बुधवार दोपहर के अमृतसर पहुंचा था, जिसमें नागपुर के हरप्रीत सिंह ललिया भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि वह अमेरिका नहीं, बल्कि कनाडा जाना था. लेकिन एजेंट ने उनके साथ धोखा दिया, जिसकी वजह से वो अमेरिका पहुंच गए. उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण में उनके 50 लाख रुपये खर्च हो गए.

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उन्होंने आजतक को बताया कि उन्हें अमेरिका नहीं, बल्कि कनाडा जाना था. लेकिन एजेंट ने उनके साथ धोखा कर दिया, जिसकी वजह से वो कनाडा की जगह अमेरिका पहुंच गए.

'मेरा पास था कनाडा का वीजा'

हरप्रीत ने कहा कि वह नागपुर से कनाडा का वीजा लेकर गया था, जिसके बाद अबू धाबी की कनेक्टिंग फ्लाइट थी. लेकिन उन्हें चढ़ने नहीं दिया गया, जिसके बाद अबू-धाबी से दिल्ली लौट आए और 8 दिनों तक दिल्ली में रहा. इसके बाद मैं 18 दिसंबर को एजेंट की मदद से इजिप्ट के रास्ते से स्पेन गए, फिर से स्पेन से क्वातामा भेजा गया. इसके बाद मैक्सिको से हामासिलो और तकैती बॉर्डर पर रखा गया. इसके बाद उन्हें अमेरिका की एयरपोर्ट के वेलकम सेंटर लाया गया और फिर 104 लोगों को भारत डिपोर्ट किया गया. 

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'बैंक से लिया लोन'

हरप्रीत ने कहा कि मैं अमेरिका नहीं जाना चाहता था, मैं वीजा के जरिए कनाडा जाना चाहता था. लेकिन एजेंट की लापरवाही की वजह से मैं अमेरिका पहुंच गया. उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में मेरे करीब 49 लाख 50 हजार रुपये  खर्च हो गए. ये पैसे उन्होंने 25 लाख रुपये एक्सिस बैंक से लोन लिया. बाकी बचे हुए कुछ सामान बेचकर दोस्तों और रिश्तेदारों से लिए थे.

'माफिया के चंगुल में भी फंसे'

उन्होंने ये भी बताया कि वह दो महीने घर से बाहर रहे, लेकिन उन्हें कोई काम नहीं मिला. मैक्सिको जाने के दौरान उन्हें माफिया के गिरोह ने भी पकड़ लिया और वह 10 दिन वहीं रहे. इस दौरान माफिया ने उनसे एक्सटॉरशन भी मांगा. पुलिस ने उन्हें माफिया के पास सरेंडर कराया था. मैक्सिको की पुलिस माफिया के साथ मिली हुई है. 

उन्होंने बताया कि मैक्सिको से पनाक्सको जाने हैं और पनाक्सको से मैक्सिकली ले जाया जाता है. एक खाली जगह है, जहां से एक पहाड़ पास करना पड़ता है. इसके बाद पुलिस की गाड़ी लोगों को फिर से बैठा लेती है. जहां से तकैती जाते हैं, साढ़े चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. यहां से जीरो लाइन से पार करा-कर ले लोग चले जाते हैं. इसके बाद 16 घंटों तक पैदल चलना होता है. बाद में फिर अमेरिका की पुलिस गिरफ्तार कर लेती है. 

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उन्होंने कहा कि मेरा कनाडा का वीजा था, लेकिन मुझे यहां डिपोर्ट किया गया है. मुझे ये भी नहीं बताया गया है कि मेरा पास वीजा होने के बाद भी मुझे कनाडा क्यों नहीं भेजा गया.

निर्वासित लोगों में पंजाब के 30, हरियाणा के 33, गुजरात के 33, महाराष्ट्र के तीन, उत्तर प्रदेश के तीन और चंडीगढ़ के दो लोग शामिल हैं.

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