महामारी ने दुनिया भर में बच्चों की शिक्षा पर असर डाला है. भारत में भी लाखों बच्चे स्कूल बंद रहने से प्रभावित हुए. स्कूल बंद रहने से घर पर ही पढ़ाई का ट्रेंड बन गया. बच्चे अब इनडोर्स और स्क्रीन्स के सामने ही अधिक वक्त बिता रहे हैं. अब जब दुनियाभर में देशों ने अपने नागरिकों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए वैक्सीनेशन शुरू कर दिया है, मॉडर्ना जैसी ग्लोबल बायोटेक कंपनियों को बच्चों को लेकर क्लीनिकल ट्रायल डेटा 2022 से पहले उपलब्ध होने की उम्मीद नहीं है.
हालांकि, भारत में कोवैक्सीन के नाम से स्वदेशी कोरोना वायरस वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक के चीफ मैनजिंग डायरेक्टर डॉ. कृष्णा एला ने इंडिया टुडे टीवी के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि कोवैक्सीन 2 साल से 12 साल के बच्चों को दी जा सकती है.
डॉ. एला ने इंडिया टुडे टीवी को बताया, “हमारी इनैक्टिवेटेड वैक्सीन (कोवैक्सीन) 2 से 12 वर्ष की उम्र के बीच के बच्चों को दिए जाना आदर्श होगा. हम ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटियों के सामने एक प्रस्ताव रखना चाहते हैं. संभवत: और अगले दस दिन में हम छोटे क्लिनिकल ट्रायल्स करने में समर्थ रहेंगे क्योंकि इस वैक्सीन को बच्चों को बिना किसी इश्यू दिया जा सकता है.”
भारत बायोटेक का नाम हाल में सुर्खियों में रहा था जब भारत सरकार ने इसकी वैक्सीन को एमरजेंसी इस्तेमाल के लिए हरी झंडी दिखाई थी. DCGI से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद इस बात को लेकर सवाल खड़े हुए थे कि कौवैक्सीन के फेस 3 ट्रायल्स हुए बिना इसे एमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी कैसे मिल गई.
हालांकि डॉ. एल्ला ने स्वदेशी वैक्सीन और इसके इमरजेंसी इस्तेमाल को लेकर सभी आलोचनाओं को खारिज किया. उन्होंने आलोचकों पर पलटवार में कहा कि मंजूरी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की तय की गई शर्तों के आधार पर दी गई है.
डॉ. एला ने इंडिया टुडे टीवी को बताया, “मेरा पोता छह साल का है और मुझे उसे वैक्सीन देने में कोई हिचक नहीं है. हां, हमारे पास अभी डेटा नहीं हैं. लेकिन फेस-3 ट्रायल्स डेटा और चाह महीनों में उपलब्ध होगा.”
कोवैक्सीन को 12 साल की उम्र से ऊपर के बच्चों के लिए मंजूरी दी गई है. भारत बायोटेक की एंटी-कोरोना वायरस वैक्सीन को ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और NIV (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) के सहयोग के साथ विकसित किया जा रहा है. ये पहली वैक्सीन थी जिसे पिछले साल सितंबर में बच्चों पर टेस्ट किया गया.
अब जबकि भारत बायोटेक 26,000 वॉलंटियर्स पर फेस 3 क्लिनिकल ट्रायल्स कर रहा है, सरकार ने कहा है कि कोविड वैक्सीनेशन ड्राइव सिर्फ वयस्कों के लिए लक्षित है. लेकिन इस मंजूरी से उम्मीद जगती है कि अगर पर्याप्त और संतोषजनक डेटा उपलब्ध हुआ तो इस वैक्सीनेशन को बच्चों तक भी बढ़ाया जा सकता है.