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तेजस विमानों की डिलीवरी में देरी पर IAF चीफ ने जताई चिंता, बोले- 40 जेट्स का ऑर्डर अभी तक नहीं मिला

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के पड़ोसी देश चीन की सैन्य ताकत में आश्चर्यजनक गति से हो रहे आधुनिकीकरण पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि चीन के संदर्भ में ये केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि उनकी तकनीक भी बहुत तेज़ी से विकसित हो रही है.

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 वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस विमानों की उपलब्धता में देरी पर चिंता जताई
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस विमानों की उपलब्धता में देरी पर चिंता जताई

भारतीय वायुसेना (IAF) के चीफ एपी सिंह ने तेजस लड़ाकू विमानों की स्लो डिलीवरी को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि 2009-2010 में ऑर्डर किए गए 40 तेजस विमानों की पहली खेप अभी तक वायुसेना को नहीं मिली है, वायुसेना प्रमुख ने ये बात 21वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार के दौरान कही. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब चीन जैसे देश अपनी वायुसेना में भारी निवेश कर रहे हैं, तो भारत को भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत है.

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चीन द्वारा सिक्स जेनरेशन के स्टेल्थ लड़ाकू विमान का परीक्षण किए जाने के कुछ दिन बाद एपी सिंह ने ये टिप्पणी की. एपी सिंह ने बताया कि पहला तेजस विमान 2001 में उड़ाया गया था, लेकिन इसे वायुसेना में शामिल करने में 15 साल लग गए और यह प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई.

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हमें 1984 में जाना चाहिए, जब हमने इस विमान की परिकल्पना की गई थी, पहला विमान 2001 में उड़ाया गया, यानी 17 साल बाद. इसे शामिल करने में और 15 साल लग गए. आज 2024 है और मेरे पास अभी तक पहले 40 विमान भी नहीं हैं. ये हमारी उत्पादन क्षमता को दर्शाता है. उन्होंने चेताया कि तकनीक में देरी का मतलब है कि तकनीक से इनकार.

तेजस विमानों की जरूरत

तेजस एक हल्का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा डवलप किया जा रहा है. वायुसेना में पुराने हो चुके मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह तेजस लेंगे. बता दें कि मिग-21 को फ्लाइंग कॉफेन यानी उड़ता ताबूत कहा जाता है, क्योंकि इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की दर बहुत अधिक है.

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निजी क्षेत्र को शामिल करने की वकालत

एपी सिंह ने उत्पादन एजेंसियों से एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग प्रोसेस में इन्वेस्ट करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि हमें निजी कंपनियों को शामिल करना चाहिए, हमें प्रतिस्पर्धा की जरूरत है. हमें कई सोर्स उपलब्ध कराने होंगे, ताकि लोग अपने ऑर्डर खोने के डर से बेहतर प्रदर्शन करें. अन्यथा, चीजें नहीं बदलेंगी.

चीन की सैन्य ताकत में तेजी

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के पड़ोसी देश चीन की सैन्य ताकत में आश्चर्यजनक गति से हो रहे आधुनिकीकरण पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि चीन के संदर्भ में ये केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि उनकी तकनीक भी बहुत तेज़ी से विकसित हो रही है. हमने हाल ही में उनकी नई जेनरेशन के फाइटर जेट की उड़ान देखी है.

भारत की पांचवीं जेनरेशन के लड़ाकू विमान अभी डिजाइन और विकास के क्रम में हैं, इन्हें विकसित करने का प्रस्ताव मार्च 2023 में कैबिनेट ने मंजूर किया था. वहीं, वायुसेना वर्तमान में 30 लड़ाकू स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है, जबकि स्वीकृत ताकत 42 स्क्वाड्रनों की है. एक लड़ाकू स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं.

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