महाराष्ट्र की प्रोबेशनरी IAS अफसर पूजा खेडकर से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब सामने आया है कि पूजा खेडकर ने वर्ष 2007 में पुणे के काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज में MBBS की डिग्री के लिए गलत ओबीसी कोटे का इस्तेमाल करके एडमिशन लिया था. आरोप है कि उन्होंने ओबीसी नोमिडिक ट्राइब-3 (घुमंतू जनजाति-3) कोटे से सीट हासिल की. खेडकर ने इस दाखिले के लिए नॉन क्रीम लेयर के कोटे का इस्तेमाल किया था. जबकि उस वक्त उनके पिता अधिकारी पोस्ट पर थे और खेडकर नॉन क्रीमी लेयर के दायरे में नहीं आती थीं. नवले कॉलेज के प्रशासनिक विभाग के शीर्ष सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है.नोमिडिक ट्राइब-3 वंजारी समुदाय से संबंधित है.
खेडकर को 146/200 नंबर पाने के बाद एसोसिएशन ऑफ अनएडेड प्राइवेट कॉलेज ऑफ महाराष्ट्र प्रवेश परीक्षा से एडमिशन मिल गया.पूजा को सामान्य सीईटी का प्रयास करना था लेकिन उनका स्कोर उससे अधिक था. उन्होंने नेवले मेडिकल कॉलेज के पहले बैच में एडमिशन ले लिया.
खेडकर के कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 10वीं कक्षा में 83% और 12वीं बोर्ड परीक्षा में 74% अंक हासिल किए.
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क्यों चर्चा में हैं पूजा खेडकर
पुणे में अपने प्रोबेशन के दौरान पूजा खेडकर ने कई विशेषाधिकारों की मांग की थी, जो प्रोबेशनरी अधिकारियों को नहीं मिलते. इस दौरान पूजा खेडकर ने लाल-नीली बत्ती और VIP नंबर प्लेट वाली अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल किया. उन्होंने अपनी गाड़ी पर 'महाराष्ट्र सरकार' का बोर्ड भी लगाया और एक आधिकारिक कार, आवास, एक ऑफिस रूम और अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग की. यहां तक कि उन्होंने एडिशनल कलेक्टर की अनुपस्थिति में उनके चेंबर पर कब्जा कर लिया.
इसके बाद पुणे कलेक्टर सुहास दिवासे ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूजा खेडकर की शिकायत की थी. जिसके बाद पूजा का ट्रांसफर वाशिम जिले में कर दिया गया. पूजा खेडकर ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 841वीं रैंक हासिल की थी. पूजा की मां अहमदनगर जिले के भालगांव की सरपंच हैं. पूजा के परिवार में उनके पिता और दादा दोनों प्रशासनिक सेवा में रहे हैं. उनके पिता तो पुणे में सहायक कलेक्टर भी रहे.