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भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर मई महीने से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है. अब सितंबर में हालात ये हैं कि युद्ध जैसी नौबत आ गई है और दोनों सेनाएं बॉर्डर पर बड़ी संख्या में हथियारों और सैनिकों के साथ मुस्तैद हैं. मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में चीन के साथ जारी स्थिति पर बयान दिया और कहा कि हम बातचीत से हल निकालना चाहते हैं, लेकिन किसी भी तरह की परिस्थिति को लेकर तैयार हैं.
चीन के साथ जब भी बॉर्डर पर विवाद की बात होती है तो 1962 में हुआ युद्ध हमेशा याद आता है. तब भी चीन ने भारत को धोखा दिया था, अब आज भी ऐसा ही कर रहा है. 1962 में भी काफी लंबे वक्त तक सीमा पर तनाव हुआ था और अक्टूबर में युद्ध हो गया था. इसी दौरान नवंबर में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संसद में बयान देकर चीन के धोखे की बात कबूली और पड़ोसी देश को जमकर लताड़ा था.
अगर राजनाथ सिंह के आज के और जवाहर लाल नेहरू के तब के बयान को देखें, तो इनमें एक बात समान दिखती है. पहले भी चीन ने अपने सभी समझौतों को तोड़ते हुए युद्ध के हालात बनाए थे और आज भी ऐसा ही किया, जिसका जिक्र दोनों ही बयानों में किया गया.
तब जवाहर लाल नेहरू ने क्या कहा था?
भारत और चीन के बीच 1962 में आधिकारिक तौर पर युद्ध अक्टूबर में शुरू हुआ था, जो कि नवंबर तक चला. 21 नवंबर 1962 की रात को चीन ने सीज़फायर का ऐलान कर दिया था. युद्ध के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 8 नवंबर, 1962 को लोकसभा में इस मसले पर भाषण दिया था. जिसमें उन्होंने चीन के धोखे का जिक्र किया था. उस वक्त जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और युद्ध के बीच में रक्षा मंत्री के पद पर तैनात थे.
8 नवंबर को लोकसभा में चीन की निंदा का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें चीन पर पंचशील समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया गया. जवाहर लाल नेहरू ने प्रस्ताव रखने के बाद सदन में कहा, ‘..इस वक्त हम चीन के साथ सीमा पर युद्ध लड़ रहे हैं, पिछले 5 साल में चीन ने कई बार घुसपैठ करने की कोशिश की है. जो आज बड़ी संख्या में और हर रोज हो रहा है.’
सदन में जवाहर लाल नेहरू ने प्रस्ताव रखा, ‘सदन को बेहद दुख के साथ सूचित किया जाता है कि भारत की ओर से शांति की तमाम कोशिशों के बावजूद चीन ने धोखा दिया है. चीन ने भारत के साथ हुए पंचशील समझौते को नकार दिया है और सीमा पर घुसपैठ कर दी है. इस वक्त सीमा पर देश के जवान लड़ रहे हैं, जिनकी ये सदन और पूरा देश जमकर तारीफ करता है.’
बता दें कि 1953-54 के बीच दोनों देशों के बीच पंचशील समझौता हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से पांच बिंदुओं पर फोकस किया गया था. इसमें दोनों देश एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को स्थापित करने की बात कही गई थी, लेकिन चीन ने 1962 युद्ध के वक्त इसका उल्लंघन कर दिया था.
इसके बाद जवाहर लाल नेहरू की ओर से चीन के साथ युद्ध के मसले पर 21 नवंबर 1962 और 22 नवंबर 1962 को भी बयान दिया गया. 21 तारीख को तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि चीन ने सीजफायर का ऐलान कर दिया है, अपने रेडियो पर चीन ने कहा है कि वो अपने सैनिक वापस खींच लेगा. इसके बाद 22 तारीख को नेहरू ने सदन में पुष्टि करते हुए कहा कि 24 घंटे में कोई गोलीबारी नहीं हुई है.
मौजूदा स्थिति पर राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
साफ है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1962 के वक्त में चीन के समझौते तोड़ने और सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ाने का जिक्र किया था. अब मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऐसा ही बयान दिया. राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि लद्दाख में हालात चुनौती भरे हैं.
रक्षा मंत्री ने बताया कि चीन ने 1993 में दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ था, जिसमें सीमा पर गोलीबारी ना करने और सैनिकों की संख्या कम रखने की बात कही गई थी उसका उल्लंघन किया है. साथ ही जटिल सीमा विवाद पर चीन ने 2003 के बाद से कोई ठोस तरीके की बात नहीं की है.
राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि चीन ने अप्रैल से ही सीमा पर हलचल बढ़ा दी थी, इसके बाद जून में घुसपैठ की कोशिश की गई. सीमा पर तनाव भी हुआ और भारत के बीस जवान शहीद हो गए. इसके बाद फिर एक बार अगस्त में झड़प की कोशिश हुई और इस दौरान गोली चली.
लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि भारत ने समझौते का पालन किया है, लेकिन चीन ने ऐसा नहीं किया. अगर चीन लगातार उल्लंघन करेगा तो तनाव बढ़ेगा, चीन मौजूदा स्थिति को बदलना चाहता है जो भारत को स्वीकार नहीं है. भारत बातचीत से हल निकालना चाहता है लेकिन किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है.
गौरतलब है कि चीन के साथ मौजूदा स्थिति पर विपक्ष की ओर से लगातार हंगामा किया जा रहा है. इस बीच मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में स्थिति स्पष्ट की, जल्द ही राज्यसभा में भी बयान दिया जाएगा. लेकिन सीमा पर की जा रही तैयारियों को देखकर लग रहा है कि चीन के साथ विवाद लंबा खिंच सकता है, इसलिए सेना सर्दियों के लिए सामान इकट्ठा कर रही है और भारत पूरी तरह सतर्क है.