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लद्दाख में सीमा विवाद पर भारत बोला- चीनी सैनिकों को पीछे हटना होगा

भारत ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में पूरी तरह से पीछे हटने के लिए दोनों पक्षों को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपनी-अपनी चौकियों पर सैनिकों की फिर से तैनाती की जरूरत है.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लद्दाख की स्थिति को गंभीर बताया (फोटो-AP)
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लद्दाख की स्थिति को गंभीर बताया (फोटो-AP)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पूर्व की स्थिति बहाली पर ही होगी शांति-भारत
  • दोनों देशों में कई स्तरों पर चल रही है बातचीत
  • अपनी अपनी चौकियों पर सैनिकों की हो तैनाती

लद्दाख में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद सुलझता नहीं दिख रहा है. भारत ने गुरुवार को कहा कि लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है. भारत ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर पूर्व की स्थिति की बहाली से ही केवल शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाए रखा जा सकता है. 

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भारत ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में पूरी तरह से पीछे हटने के लिए दोनों पक्षों को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपनी अपनी चौकियों पर सैनिकों की फिर से तैनाती की जरूरत है.

साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, "जैसा कि मैंने पहले भी बताया था, पूरी तरह से डिसएंगेजमेंट के लिए जरूरी है कि एलएसी पर दोनों पक्ष अपनी अपनी तरफ, अपनी नियमित चौकियों पर सैनिकों की फिर से पूर्व की तरह तैनाती करें." अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, "यह जाहिर सी बात है कि यह आपसी सहमति पर यानी दोनों तरफ से ही इसे किया जा सकता है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों पक्ष सहमति के साथ काम करें."

सीमा पर क्या हैं हालात

बहरहाल, पूर्वी लद्दाख में सीमा पर डिसएंगजमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. चीन की सेना अभी पीछे नहीं हटी है. सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर हुए वार्ता के कई दौर के बावजूद फिंगर एरिया, डेपसांग के मैदानों और गोगरा में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. पूर्वी लद्दाख में पूर्व की स्थिति को बहाल करने को लेकर प्रयास जारी हैं. 

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दोनों पक्षों में बातचीत जारी

अनुराग श्रीवास्तव ने पिछले सप्ताह सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय संबंधी तंत्र (WMCC) की हुई 18वीं मीटिंग में हुई चर्चा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "इस संदर्भ में डब्ल्यूएमसीसी की पिछली बैठक में दोनों पक्षों ने मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत लंबित मसलों का जल्द समाधान किए जाने को लेकर सहमति जताई थी." 

कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के पांच राउंड और भारत चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय संबंधी तंत्र की चार दौर की बैठकों में भारतीय पक्ष जल्द से जल्द और सामान्य हालात के तत्काल बहाली के लिए चीनी सैनिकों के पूरी तरह से पीछे हटने पर जोर दे रहा है. भारत चाहता है कि पूर्वी लद्दाख में अप्रैल में जो स्थिति थी उसे फिर से बहाल किया जाए. 

WMCC की बैठक का जिक्र करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, भारत और चीन ने यह स्वीकार किया है कि सीमावर्ती एरिया में शांति बहाली द्वपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है. उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने माना कि सैनिकों के पूरी तरह से डिसएंगजमेंट की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक, सैन्य माध्यमों के जरिये बातचीत को जारी रखने की जरूरत है. 

बता दें कि इस मसले पर 5 जुलाई को, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीनी विदेश मंत्री और सीमा वार्ता पर विशेष प्रतिनिधि वांग यी के बीच लगभग दो घंटे की टेलीफ़ोनिक बातचीत हुई थी. इसके बाद विदेश मंत्री जयशंकर और वांग यी के बीच भी बातचीत हुई थी.

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क्या बोले विदेश मंत्री

इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लद्दाख की स्थिति को 1962 के बाद से सबसे गंभीर बताया है. जयशंकर ने अपनी किताब के लोकार्पण से पहले एक इंटरव्यू में कहा कि निश्चित रूप से ये 1962 के बाद की सबसे गंभीर स्थिति है. पिछले 45 वर्षों में सीमा पर पहली बार हमारे सैनिक शहीद हुए हैं. एलएसी पर दोनों पक्षों की तरफ से बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती है. यह बिल्कुल अप्रत्याशित है. विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा विवाद पर समाधान में हर समझौते का सम्मान होना चाहिए.

 

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