कोयले की कमी के चलते देश के कई राज्यों में बिजली संकट की स्थिति पैदा हो गई है. इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिजली मंत्री आरके सिंह और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बैठक की.
बैठक में दोनों मंत्रियों ने प्रधानमंत्री को कोयले की आपूर्ति की ताजा स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने पीएम मोदी को बताया कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है और आने वाले दिनों में हालात सुधरने की उम्मीद है.
हालांकि केंद्र के दावों और राज्य सरकारों की चिंता के बीच हालात बेहतर नजर नहीं आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि यूपी में कोयले की कमी के चलते 8 पावर प्लांट बंद कर दिये गए हैं. बिजली बनाने वाली कंपनियों के पास 17 दिनों का कोयला भंडार हुआ करता था जो घटकर 4 दिनों का रह गया है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम की सबसे बड़ी अनपरा परियोजना में कोयले की सप्लाई 10 हजार टन कम हो रही है जिससे हालात बिगड़ रहे हैं.
यूपी की तरह बिहार में भी बिजली सप्लाई पर कोयले का संकट साफ-साफ दिखाई दे रहा है लेकिन कोई इस बात को मानने को तैयार नहीं है. बेगूसराय में मौजूद बरौनी थर्मल पावर प्लांट जहां बिजली के प्रोडक्शन की कमी के चलते 12 से 14 घंटे की सप्लाई हो रही है, लेकिन ज्यादा दिक्कत का दावा पंजाब और महाराष्ट्र कर रहे हैं क्योंकि इन दोनों राज्यों की करीब 20 पावर यूनिट बंद हो चुकी हैं. पंजाब में जरूरत से आधी कोयला आपूर्ति हो रही है.
इन राज्यों में लोड शेडिंग का साया
इन राज्यों में लोड शेडिंग का साया सिर पर लटका है. इसमें हरियाणा और महाराष्ट्र के 3 प्लांट ऐसे हैं जहां स्टॉक में एक भी दिन का कोयला नहीं है. इसी तरह पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार में एक-एक प्लांट ऐसे हैं जहां एक दिन का स्टॉक बचा हुआ है. वहीं, पश्चिम बंगाल के 2 प्लांट में ऐसी स्थिति है.
देश के 137 में से 110 प्लांटस में कोयला का गंभीर संकट
- 16 प्लांट के पास एक भी दिन का कोयला स्टॉक में नहीं है
- 30 प्लांट के पास केवल 1 दिन का कोयला बचा है
- 18 प्लांट के पास केवल 2 दिन का कोयला बचा है
- 72 पावर प्लांट्स के पास सिर्फ़ 3 दिन का कोयला बचा है
- 50 पावर प्लांट्स के पास 4 से 10 दिन का स्टॉक बचा है
जबकि नियम ये है कि सभी पावर प्लांट्स को कम से कम 20 दिनों का कोयला भंडार रखना होता है ये ध्यान रखना भी जरूरी है कि देश की 70 फीसदी बिजली, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स से ही बनती है.
अनदेखी पड़ सकती है भारी
इतने बड़े संकट के बीच अब सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्र सरकार कोयला संकट की हकीकत पर दावे की चादर डालने में लगी है क्योंकि अब तक के हालात से जाहिर हो रहा है कि संकट की अनदेखी भारी भी पड़ सकती है.
वहीं, केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी का कहना है कि हमने अपनी आपूर्ति जारी रखी है, यहां तक कि बकाया के बावजूद भी हम आपूर्ति जारी रखे हुए हैं. हम उनसे (राज्यों से) स्टॉक बढ़ाने का भी अनुरोध कर रहे हैं. कोयले की कमी नहीं होगी.
आजतक ब्यूरो