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अमेरिका में रहने वाले गैंगस्टर्स पर जल्द होगी कार्रवाई! भारत सरकार US को देगी लिस्ट

भारत सरकार का यह कदम भारत-अमेरीका के बीच हुए समझौते के तहत लिया गया है. समझौते में इस बात पर मुहर लगी थी कि दोनों देश में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

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गोल्डी बरार और अनमोल बिश्नोई (फाइल फोटो)
गोल्डी बरार और अनमोल बिश्नोई (फाइल फोटो)

अमेरिका (USA) में रहने वाले गैंगस्टर्स की लिस्ट जल्द ही भारत की तरफ से अमेरिका को भेजी जानी है. सूत्रों के मुताबिक, गोल्डी बराड़ और अनमोल बिश्नोई सहित 10 गैंगस्टर्स की लिस्ट भारतीय एजेंसियां जल्द ही अमेरिकी सिक्योरिटी एजेंसी को सौंप सकती है. भारत सरकार का यह कदम भारत-अमेरीका के बीच हुए समझौते के तहत लिया गया है. समझौते में इस बात पर मुहर लगी थी कि दोनों देश में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

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तो क्या अनमोल बिश्नोई भारत आ सकता है?

किसी भी आरोपी को दूसरे देश से अपने देश में लाने के लिए दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि यानी एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी होना जरूरी है. अगर प्रत्यर्पण संधि न भी हो तो एक्स्ट्राडीशन अरेंजमेंट से भी काम चल जाता है.  भारत में 1962 में प्रत्यर्पण कानून बना था. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की 48 देशों के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी है और 12 देशों के एक्स्ट्राडीशन अरेंजमेंट है. 

एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी में ये समझौता किया जाता है कि अगर उन्हें अपने देश में दूसरे देश का वॉन्टेड व्यक्ति मिलेगा, तो वो उसे वापस भेज देंगे. हालांकि, ये मामला अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंस जाता है.

भारत ने 1997 में अमेरिका के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी की थी. विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2002 से 31 जनवरी 2019 के बीच अमेरिका से 10 अपराधियों को भारत लाया गया है. 

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अनमोल बिश्नोई को भारत लाया जाएगा या नहीं? ये तो वक्त बताएगा. हालांकि, हर देश का प्रत्यर्पण कानून अलग होता है और इसकी प्रक्रिया भी अलग. लेकिन अनमोल को वापस लाने के लिए भारत को कई सारे सबूत और दस्तावेज दिखाने होंगे. 

यह भी पढ़ें: मिलता-जुलता नाम, एक जैसी दाढ़ी और गैंगस्टर गोल्डी की मौत की अफवाह... ये है अमेरिका में शूटआउट की असली कहानी

अंतरराष्ट्रीय कानून का भी है खेल

प्रत्यर्पण को लेकर हर देश का अपना कानून है और वहां की प्रक्रिया भी अलग है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून में प्रत्यर्पण से जुड़ी कुछ कॉमन बातें हैं. अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, राजनीतिक अपराध, सैन्य अपराध या धार्मिक अपराध के आरोपी को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता. 

इतना ही नहीं, इसके लिए डबल क्रिमिनैलिटी भी होना जरूरी है. यानी जिस व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने की मांग की गई है, उसका अपराध दोनों देशों को मानना जरूरी है. मसलन, भारत ने गोल्डी बराड़ को कई सारे मामलों में आरोपी बनाया है, तो अमेरिका को भी ये लगना चाहिए कि उसने जो भारत में किया, वो सच में अपराध है.

तीसरी बात ये कि जिस अपराध के लिए व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने की मांग हो रही है, प्रत्यर्पण के बाद भी उस पर वही मुकदमा चलेगा. ये नहीं कि हत्या के मामले में प्रत्यर्पित कर लिया और प्रत्यर्पण के बाद दूसरे मामले भी उसमें जोड़ दिए गए. 

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चौथी और आखिरी बात मानवाधिकार से जुड़ी है. किसी भी व्यक्ति को प्रत्यर्पित तभी किया जाता है जब उस देश को लगता है कि व्यक्ति को वहां भेजने पर उसके मानवाधिकारों का ध्यान रखा जाएगा.

 

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