भारत, जलवायु-संवेदनशील संक्रामक रोगों के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है, जिसमें हिमालयी इलाके में मलेरिया का फैलाव और पूरे भारत में डेंगू का संक्रमण शामिल है. स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर 122 एक्सपर्ट्स द्वारा विकसित आठवें Lancet Countdown के मुताबिक, इन रोगों के फैलने से क्लाइमेट-इंटीग्रेटेड फॉरकास्टिंग में सुधार, स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने की मांग बढ़ रही है.
एविडेंस-बेस्ड रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि देश के तटीय समुदायों को बढ़ते समुद्री स्तर की वजह से गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से प्रभावी बाढ़ अनुकूलन योजनाओं की जरूरत है.
रिपोर्ट में कहा गया है, "ये नतीजे भारत के लिए अपनी स्वास्थ्य और जलवायु नीतियों को पुनर्जीवित करने, वित्तीय निवेश को प्राथमिकता देने और क्लाइमेट चेंज से उत्पन्न होने वाले लगातार बढ़ते खतरों से अपनी आबादी की हिफाजत करने के लिए एक मजबूत अनुकूली प्रतिक्रिया बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का इशारा करते हैं."
Lancet की नई रिपोर्ट ने एक चिंताजनक नई वास्तविकता को उजागर किया है. दुनिया भर के लोग रिकॉर्ड तोड़ जलवायु-जनित खतरों से जूझ रहे थे. चौंकाने वाले आंकड़ों से पता चला है कि स्वास्थ्य जोखिमों को ट्रैक करने वाले 15 में से 10 संकेतक 2023 में नए रिकॉर्ड बना चुके हैं. 50 दिन ऐसे भी रहे, जब तापमान मानव स्वास्थ्य के लिए संभावित रूप से हानिकारक स्तर तक पहुंच गया.
गर्मी की वजह से जा रही लोगों की जान
साल 2023 में, दुनिया अभूतपूर्व जलवायु चुनौतियों से जूझ रही है, जिसने इस साल को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बना दिया है. वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी की वजह से भयंकर सूखा, जानलेवा गर्मी की लहरें और विनाशकारी जंगल की आग, तूफान और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है.
गर्मी से जुड़ी मौतों में बढ़ोतरी हुई, विशेष रूप से 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में, 1990 के दशक की तुलना में 167 फीसदी की चौंका देने वाली बढ़ोतरी हुई. व्यक्तियों को औसतन 1,512 घंटे हाई टेंपरेचर का सामना करना पड़ा, जिससे कम से कम गर्मी के तनाव का मध्यम जोखिम पैदा हुआ. 1990 के दशक से 27.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. नतीजा यह हुआ कि 512 बिलियन संभावित श्रम घंटों का नुकसान हुआ और वैश्विक आय में अनुमानित $835 बिलियन का नुकसान हुआ, जिसका निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर काफी प्रभाव पड़ा.
2014 और 2023 के बीच, ग्लोबल लैंड एरिया के 61 फीसदी हिस्से में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई, जिससे बाढ़ और बीमारियों का जोखिम बढ़ गया.
बढ़ते तापमान की वजह से बढ़ रही बीमारियां
तापमान में बढ़ोतरी ने मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू के फैलने के लिए जलवायु अनुकूलता को भी बढ़ाया है, जो 2023 में दुनिया भर में 5 मिलियन से ज्यादा मामलों के साथ अब तक का सबसे ज्यादा है. बदलती जलवायु ऐसे वातावरण का निर्माण कर रही है, जो डेंगू, मलेरिया, वेस्ट नाइल वायरस और वाइब्रियोसिस जैसी संक्रामक बीमारियों के प्रसार के लिए अनुकूल है, यहां तक कि उन इलाकों में भी जहां पहले इन बीमारियों का प्रकोप नहीं था.
भीषण सूखा
साल 2023 में, ग्लोबल लैंड एरिया के 48 फीसदी हिस्से में करीब एक महीने तक भीषण सूखा पड़ा, जो 1951 के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्तर है. इससे फसल की पैदावार, जल आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हुई है.
साल 1981 से 2010 तक सूखे और गर्म हवाओं की घटनाओं में बढ़ोतरी की वजह से साल 2022 में 124 देशों में अतिरिक्त 151 मिलियन लोगों को मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझना पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: बायोफोर्टिफाइड, ज्यादा उपज और जलवायु के प्रति लचीली... देश को मिलीं चावल की ये 3 नई किस्में
पॉजिटिव डेवलपमेंट
क्लाइमेट चेंज से प्रेरित गंभीर विकास के बावजूद, लैंसेट रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक विकासों का उल्लेख किया गया है, जो एक बेहतर दुनिया की उम्मीद जगाते हैं. कोयला जलाने में कमी की वजह से वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में कमी आई है और स्वच्छ ऊर्जा में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट 2023 में बढ़कर 1.9 ट्रिलियन डॉलर हो गया है. नवीकरणीय ऊर्जा में रोजगार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है, जो रोजगार सुरक्षा का समर्थन करने में इस क्षेत्र की क्षमता को दर्शाता है.