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नेपाल के साथ सुधर रहे संबंध, अगले महीने काठमांडू जाएंगे भारतीय सेना प्रमुख नरवणे

नेपाल सरकार की ओर से इस साल फरवरी में ही भारतीय सेना प्रमुख की यात्रा को मंजूरी दी गई थी लेकिन कोविड-19 महामारी के फैलने के बाद दोनों देशों में लॉकडाउन की वजह से इसे स्थगित करना पड़ा था. बाद में दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी बढ़ती चली गई थी.

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भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे (फाइल-पीटीआई)
भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सेना प्रमुख को नेपाल में जनरल का मानद रैंक दिया जाएगा
  • पिछले 7 महीने में दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी बनी रही
  • लिपुलेख में भारतीय निर्माण से खफा नेपाल से बिगड़े थे रिश्ते

नेपाल की ओर से जारी विवादित नक्शे के विवाद के बीच भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे अगले महीने पारंपरिक समारोह में भाग लेने के लिए पड़ोसी मुल्क की यात्रा करने वाले हैं जहां उन्हें नेपाली सेना में जनरल का मानद रैंक दिया जाएगा.

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इस यात्रा के दौरान उनके द्विपक्षीय चर्चा में शामिल होने की भी संभावना है. सेना प्रमुख की यह यात्रा इस बात का एक संकेत है कि भारत और नेपाल के बीच संबंध वापस पटरी पर लौटते दिख रहे हैं.

नेपाल सरकार की ओर से इस साल फरवरी में ही सेना प्रमुख की यात्रा को मंजूरी दी गई थी लेकिन कोविड-19 महामारी के फैलने के बाद दोनों देशों में लॉकडाउन की वजह से इसे स्थगित करना पड़ा था.

नेपाल के मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी, एमएम नरवणे को नेपाली सेना के जनरल के मानद रैंक से सम्मानित करेंगी. 

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इस साल की शुरुआत में भारत और नेपाल के बीच संबंधों में उस समय कड़वाहट आ गई थी जब भारत ने भारत-नेपाल-चीन सीमा पर 17,000 फीट की ऊंचाई पर लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाले उत्तराखंड में सामरिक रूप में अहम 80 किलोमीटर सड़क का निर्माण शुरू किया था.

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यह सड़क न सिर्फ कैलाश मनोरवर तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाएगी बल्कि भारत-चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) में सैनिकों की आवाजाही में मदद भी करेगी. 

भारत की ओर से सड़क निर्माण का दावा करने से नेपाल नाराज हो गया और काठमांडू ने अपनी भूमि पर इस निर्माण का नाखुशी जाहिर करते हुए नया नक्शा जारी कर दिया. इस साल 8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख से धाराचूला तक बनाई गई सड़क का उद्घाटन किया था. इस उद्घाटन से नाराज नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया. फिर 18 मई को नेपाल ने नया नक्शा जारी किया और इसमें भारत के तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया.

बता दें कि उस वक्त भारतीय सेना प्रमुख नरवणे ने भारत के लिपुलेख में निर्माण पर नेपाल की ओर से लगातार विरोध के पीछे चीन का हाथ करार दिया था. 

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