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फिलिपींस होगा ब्रह्मोस से लैस, पड़ोसी देश को सुपरसोनिक मिसाइलें सौंपेगा भारत

भारत की तरफ से फिलीपींस को जो मिसाइलें दी जा रही हैं, वह छोटे वर्जन की हैं. मार्च 2022 में, भारत ने फिलीपींस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसने ब्रह्मोस और अन्य रक्षा सहयोग पर सरकार-से-सरकारी सौदों का रास्ता खोला.

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ब्रह्मोस मिसाइल (फाइल फोटो/AFP)
ब्रह्मोस मिसाइल (फाइल फोटो/AFP)

भारत शुक्रवार, 19 अप्रैल को ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज का पहला सेट फिलीपींस को सौंपने जा रहा है. भारत अपना पहला अहम निर्यात ऑर्डर पूरा कर रहा है. डिफेंस अधिकारियों ने कहा है कि भारतीय वायु सेना का सी-17 ग्लोबमास्टर (C-17 Globemaster) फिलीपींस और उसकी क्रूज मिसाइलों के लिए इंडियन एयरपोर्ट से उड़ान भरेगा. जनवरी 2022 में साइन हुए 374.96 मिलियन डॉलर के सौदे के हिस्से के रूप में भारत ने फिलीपींस के द्वीपों में से एक में स्टोरेज-बिल्डिंग स्पेस पूरा कर लिया है.

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यह कॉन्ट्रैक्ट, भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए पहला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निर्यात ऑर्डर था. यह 290 किलोमीटर रेंज के साथ एक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के तट-आधारित वेरिएंट के लिए है.

भारत के पास अब लंबी दूरी की मिसाइलें हैं. फिलीपींस को जो मिसाइलें दी जा रही हैं, वह मूल छोटे वर्जन की हैं. मार्च 2022 में, भारत ने फिलीपींस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसने ब्रह्मोस और अन्य रक्षा सहयोग पर सरकार-से-सरकारी सौदों का रास्ता खोला.

क्या होती है ब्रह्मोस मिसाइल?

ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा नदियों के नाम से इसका नाम रखा गया है. ब्रह्मोस मिसाइलों को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा स्थापित एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) द्वारा बनाया गया है. ब्रह्मोस के कई वेरिएंट हैं, जिनमें जमीन से दागे जा सकने वाले वर्जन, युद्धपोत, पनडुब्बियां और सुखोई-30 लड़ाकू जेट शामिल हैं. लॉन्च किए गए जहाज के शुरुआती वर्जन ब्रह्मोस और लैंड बेस्ड सिस्टम 2005 और 2007 से भारतीय नौसेना और भारतीय सेना के लिए काम कर रहे हैं.

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यह भी पढ़ें: BrahMos Missile: नौसेना कि ब्रह्मोस मिसाइल हुई और ताकतवर... रेंज, फायरपावर और सटीकता से कांपेगा दुश्मन

ब्रह्मोस जैसी क्रूज मिसाइलें एक तरह के सिस्टम हैं, जिन्हें 'स्टैंडऑफ रेंज हथियार' के रूप में जाना जाता है. ये हथियार दुनिया की ज्यादातर प्रमुख सेनाओं के पास हैं. 

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