लद्दाख के डेमचोक में कथित रूप से भूलवश आए चीनी सैनिक को भारतीय सेना वापस कर रही है. हालांकि चीन ने तो दावा किया था कि उसका ये सैनिक गलती से भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया था. लेकिन भारत को आशंका है कि दोनों देशों के बीच जारी तनाव के दौरान कहीं ये चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में जासूसी तो नहीं कर रहा था. हालांकि PLA का दावा है कि उसका एक सैनिक चरवाहे की याक ढूंढने में मदद करते हुए रात को खो गया था और इस दौरान वह भारतीय सीमा में आ गया.
चीन के इस सैनिक की पहचान कॉर्पोरल वांग या लॉन्ग के रूप में की गयी है.
भारत को भले ही शक हो कि चीनी सैनिक जासूसी कर रहा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रचलित परंपराओं को सम्मान करते हुए भारत तुरंत इस सैनिक को वापस करने पर राजी हो गया. हालांकि जब कुछ ही दिन पहले अरुणाचल प्रदेश में पांच भारतीय नागरिक गलती से चीन की सीमा में प्रवेश कर गए थे तो चीन कई दिनों तक इनके बारे में जानकारी देने से आनाकानी करता रहा.
लेकिन भारत ने इस सैनिक को पकड़ने के साथ ही तुरंत इसकी जानकारी चीनी पक्ष को दी. इसके बाद भारत ने कहा कि उसे प्रोटोकॉल का पालन करते हुए छोड़ दिया जाएगा.
क्या कहता है नियम?
शांति काल में जब भी किसी देश का सैनिक दूसरे देश में पाया जाता है तो सबसे पहले उसक तलाशी ली जाती है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में सबसे ज्यादा डर जासूसी का होता है. इसके बाद पकड़े गए शख्स की पहचान पता की जाती है. उसके बात उसके पकड़े जाने की सूचना दूसरे पक्ष को दी जाती है.
जबकि युद्ध या टकराव की स्थिति में युद्ध में शामिल या किसी सामान्य सैनिक को अगर विरोधी देश किसी सैनिक कार्रवाई के बाद पकड़ता है तो वो देश उसे युद्धबंदी के तौर पर रख सकता है.
अभी भारत और चीन के बीच युद्ध या संघर्ष जैसी कोई स्थिति नहीं है, इसलिए भारत ने अतंरराष्ट्रीय कायदे कानून का सम्मान करते हुए इस चीनी सैनिको रिहा करने का फैसला किया है.
हालांकि इससे पहले भारत को इस बात से पूर्ण रूप से संतुष्ट होने का अधिकार है कि पकड़ा गया सैनिक किसी भी तरह की जासूसी कार्रवाई में शामिल नहीं था, साथ ही इस सैनिक के पास से बरामद कोई भी मानचित्र, तस्वीर, उपकरण संवेदनशील की कैटेगरी में नहीं आते हैं.
बता दें कि लगभग चार साल पहले भारतीय सेना के जवान चंदू बाबूलाल चौहान गलती से पाकिस्तान की सीमा में चले गए थे. हालांकि उसी वक्त भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था. लेकिन चंदू चौहान इसमें शामिल नहीं थे. बाद में भारत ने दबाव बनाकर अपने इस सैनिक को पाकिस्तान से रिहा करवाया था.