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राहुल-प्रियंका, लखीमपुर हिंसा, आशीष मिश्रा पर कार्रवाई... जेपी नड्डा की 12 बड़ी बातें

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने यूपी चुनाव से लेकर राहुल और प्रियंका गांधी तक, विपक्ष से लेकर किसान आंदोलन तक और लखीमपुर हिंसा तक पर अपनी बात रखी.

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जेपी नड्डा (फोटो- इंडिया टुडे)
जेपी नड्डा (फोटो- इंडिया टुडे)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बंगाल हिंसा पर भी बोले जेपी नड्डा
  • प्रियंका गांधी वाड्रा को दी ये नसीहत
  • आशीष मिश्रा पर क्या बोले नड्डा

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने बंगाल हिंसा पर भी बात की और किसान आंदोलन पर अपना और सरकार का रूख साफ किया. उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर भी बात की और विपक्ष की राजनीति पर भी. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जेपी नड्डा ने क्या-क्या कहा? आइए जानते हैं...

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1. बीजेपी के अध्यक्ष बनने पर...

'मैं हिमाचल के बहुत छोटे से शहर से आता था और कभी नहीं सोचा था कि अध्यक्ष बनूंगा. लेकिन बना, ये बीजेपी में ही संभव है. जिस पार्टी में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाउ ठाकरे, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह अध्यक्ष रहे. जो काम उन्होंने छोड़ा, उसे आगे बढ़ाने का हम पर जिम्मा है.'

2. अमित शाह से कितना अलग है कार्यकाल?

'मैं यूपी का प्रभारी था. हमारे काम करने का जो तरीका है, कभी भी दिमाग में नहीं आता कि अमित शाह जी क्या करते. क्योंकि वो तो साथ ही हैं. एक फोन ही तो करना है और यही तो पूछना है कि हम इस स्थिति में क्या करना चाहिए. हमें सबका साथ मिलता है. प्रधानमंत्री भी रूचि लेते हैं. राजनीतिक दृष्टि से उनका पार्टिसिपेशन रहता है. मुझे व्यू पॉइंट को कहने में कोई दिक्कत भी नहीं होती है. हमें उनकी बात को हमेशा लेकर के साथ चलना होता है. ये कोई उधार नहीं लेना है. ये हमारा ही है. नेताओं में कुछ आ जाती है कि मुझे ये करना है तो समस्या आ जाती है. लेकिन मोदीजी के नेतृत्व में तय है कि हम सबको ये करना है...तो कोई दिक्कत नहीं होती.'

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3. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों पर...

'राजनीति में रणनीति पर्दे का विषय होता है. लेकिन मैं कहना चाहता हूं बीजेपी हर पल, हर समय एक योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है. इसलिए बाकी लोग चुनाव तब लड़ेंगे जब कोड ऑफ कंडक्ट लगेगा. हम हमेशा आगे बढ़ते रहते हैं. मैं कहना नहीं चाहता लेकिन जो लोग अभी कर रहे हैं, हम लोग पहले ही कर चुके हैं. इसलिए चुनाव की बारी आती है, तो वो लोग उन बातों पर लगते हैं, तो मुझे हंसी आती है. हम चुनाव की तैयारी अभी से नहीं कर रहे हैं, बहुत पहले से शुरू हो गया है. तौर-तरीके, हमारी कमजोरी क्या है, कहां हमें सुधार करना है. ये सब पर बात कर चुके हैं.'

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4. लखीमपुर हिंसा पर...

'इस घटना को हम चुनाव की दृष्टि से न देखें, मानवता की दृष्टि से देखें. ये दुखदाई घटना है. कानून अपना काम कर रहा है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. हमने एसआईटी घटित की है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. हम इसे करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. लेकिन एक नया तरीका डेवलप हो रहा है विरोध का. उसके बारे में भी सोचना चाहिए. कई घटनाएं हो रही हैं. राह चलते अटैक हो जाता है. नेताओं का घिराव करना. डेमोक्रेटिक प्रोसेस में हमें उस सिस्टम को कहां तक ले जाना है, ये भी सोचना है. लेकिन कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है. उसके साथ भी न्याय होगा.'

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5. किसान आंदोलन और कृषि कानूनों पर...

'11 दौर की बातचीत हुई. अभी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसको सस्पेंड करो, हमने सस्पेंड कर दिया. जब हम बात करने को तैयार हैं. हम आपके प्रोविजन को सस्पेंड करके बात करने को तैयार हैं. आप घोड़े को पानी के पास तक ले जा सकते हैं लेकिन उसे पानी पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. बीजेपी इस तरीके से जमीन पर हिलाई नहीं जा सकती. जमीन पर भारत की जनता मुंह तोड़ जवाब देती है. हम आज भी बातचीत के लिए तैयार हैं. आपकी कुर्सी चली गई, इसलिए आप हल्ला करना शुरू करो, तो ये पीड़ा निकल रही है. हम तो बूथ पर काम करने वाले लोग हैं. कौन जानबूझकर गड़बड़ कर रहा है और कौन गलती से गड़बड़ कर रहा है, ये पता है. एमएसपी थी, है और रहेगी और हम एमएसपी पर खरीदारी जारी रखेंगे.'

6. राहुल गांधी की राजनीति पर...

'मैं कहना चाहता हूं डेमोक्रेटिक प्रोसेस में इस तरह नहीं होता. पेशेंस जरूरी है कि विपक्ष में काम करने की. जिसे पेशेंस नहीं, वो विपक्ष में काम कर ही नहीं सकता. जो इन्होंने रास्ते लिए हैं न ये 70 के दशक के रास्ते हैं. आज दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है. ये पब्लिक है सब जानती है. इसे बताने की जरूरत नहीं है. इससे पूछ लेना अक्लमंदी है. वो जानती है कि कहां एक्टिंग हो रही है. 15 मिनट के लिए चले गए, दो फोटो ले लिए. प्रेस को दे दिया. इससे बदलाव नहीं आता है. इससे लोग मजबूत नहीं होते हैं, ये उन्हें समझना चाहिए.'

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7. राज्यों में मुख्यमंत्री बदलने पर...

'ये फैसले आइसोलेशन में नहीं होते हैं. ये फैसले एक विषय को लेकर नहीं होते हैं. सारी चीजों का एक विचार करने के बाद होता है. एक सिद्धांत होता है पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी को मौका दे. हमने तो तीन स्टेट में चार सीएम बदल दिए. जाने वाला कहता है कि मैं धन्यवाद हूं कि पार्टी ने मुझे मौका दिया और छोटा भाई संभालेगा. ये हमारे संस्कार हैं. कांग्रेस ने एक ही राज्य में कोशिश की थी, वहां जो हाल हुआ वो आप जानते ही हैं.'

'हमारी शब्दावली है इनको मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी है और इसका मतलब है कि ये अभी जिम्मेदारी मेरे पास है और समय आने पर किसी और को देना है. नए लोगों को चांस देना है. एक्सपेरिमेंट करना है. 30 उपचुनाव हो रहे हैं, हमने कहीं भी किसी परिवार के व्यक्ति को टिकट नहीं दिया है, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि उन्होंने काम नहीं किया है. पार्टी के हित में त्याग करना होगा और वो करते हैं. हमारे यहां इस तरह के एक्सपेरिमेंट होते रहते हैं.'

8. कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब चुनाव पर...

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'अमरिंद सिंह अभी कांग्रेस में है. वो आहत हैं. ऐसा सुनने में आया है कि उनकी इज्जत नहीं रखी गई. उनके साथ जैसा व्यवहार होना चाहिए था, वो नहीं हुआ. वो कांग्रेस में हैं. उनको अपना रास्ता चुनना है.' 

क्या कैप्टन बीजेपी में आएंगे और उनके आने से बीजेपी को पंजाब में बढ़त मिलेगी? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'हायपोथेटिकल हो जाएगा जवाब देना. बीजेपी को इन सारी परिस्थिति में भी पंजाब में बढ़ने का स्कोप दिखता है और अपने बल पर दिखता है.'

9. विपक्ष के लामबंद होने पर...

'मैं यूपी का प्रभारी था. सपा और बसपा मिलकर लड़ी, सब कहते थे बुरा हाल हो जाएगा. मैं कहता था दिल थामकर बैठो, चुनाव के नतीजे देखना एकतरफा फैसला आएगा. वो साथ लड़ें, अलग लड़ें. लड़ने वाले की ताकत ये होनी चाहिए कि हमें जीतना है. हम दूसरों के भरोसे राजनीति नहीं करते. हमें अपनी ताकत पर भरोसा है. आपके मुद्दे हैं कुर्सी पर आना. हमारे मुद्दे हैं कुर्सी के माध्यम से देश के लिए काम करना. हम भरोसा रखते हैं. हम परिवर्तन के एजेंट है. हम कुर्सी पर बैठने नहीं आए हैं. हम सत्ता का सुख भोगने नहीं आए हैं. सत्ता का उपयोग करने आए हैं.'

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10. बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा पर...

'21वीं सदी में पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में राज्य प्रायोजित आतंक फैल रहा है. अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए अलोकतांत्रिक रास्ते अपनाए जा रहे हैं. 2500 घर तबाह कर दिए गए. 80 हजार लोगों को घर छोड़ना पड़ा है. 191 होम शेल्टर बीजेपी चला रही है. 10 करोड़ से ज्यादा डैमेज हुआ है. 191 से ज्यादा सेक्शुअल एब्यूज हैं. 53 मर्डर केस हैं. 12000 केस रजिस्टर्ड हैं. मानवाधिकार का जीता जागता चुनौती है. हमें विश्वास है कि ये लड़ाई हम डेमोक्रेटिक तरीके से ही लड़ सकते हैं. कानून के माध्यम से हमें जीत हासिल होगी.'

11. प्रियंका गांधी वाड्रा के एक्टिव होने पर...

'ये प्रजातंत्र का देश है. कोई किसी को नहीं रोक सकता. वो जरूर एक्टिव हों. हम रोकने वाले कौन होते हैं. लेकिन मैं ये जरूर चाहूंगा कि पॉलिटिकल पार्टी के रूप में और उसकी नेता के रूप में आत्मनिरीक्षण जरूर करें कि आप जो कर रहे हैं उससे समाज का कितना भला हो रहा है, आपकी पार्टी का कितना भला हो रहा है.'

'लोग आपको छोड़कर क्यों जा रहे हैं? कभी आपने इसका आत्मनिरीक्षण किया. जिन लोगों ने अपनी जिंदगी के 6-6 दशक, 5-5 दशक, 4-4 दशक पार्टी के लिए लगा दिए, वो आपको गुडबाय कहकर चल जाते हैं, आपने कभी सोचने की कोशिश की. अपने घर में झांके. आत्मनिरीक्षण करें.' 

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'ये ग्लैमर और शो से राजनीति नहीं होती, ये 21वीं सदी का भारत है, ये ऐसे नहीं चलेगा. ये मुद्दों पर चलेगा और जो लोग मेहनत के साथ खड़े होना चाहते हैं, गरीब के साथ खड़े होना चाहते हैं, उसके साथ भारत आगे चलेगा.'

12. आशीष मिश्रा पर कार्रवाई को लेकर...

'ठीक बात नहीं है. हम लोगों भी ध्यान रखने की जरूरत है. पार्टी की तरफ से और सरकार की तरफ से हम कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं करते हैं जो कानून व्यवस्था को हाथ में ले. जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ योगी सरकार कार्रवाई करेगी.'

 

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