इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के पहले दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर कहा कि चुनाव चंदा भारतीय राजनीति में से काले धन का वर्चस्व खत्म करने के लिए लाया गया था. सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देती है, वो सभी को मानना होता है. मैं किसी भी मंच पर किसी भी व्यक्ति से चर्चा करने के लिए तैयार हूं, कोई मुझे ये समझा दे कि इलेक्टोरल बॉन्ड आने से पहले चंदा कैसे आता था. बॉन्ड से चंदा कैसे आता है, अपनी कंपनी के चेक आरबीआई को देकर एक बॉन्ड खरीदते हैं और राजनीति पार्टियों को देते हैं. इसमें गोपनीयता का सवाल आ गया है, उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि जो कैश में चंदा आता था, उसमें किसका नाम सामने आया है. ये एक परसेप्शन चलाया जा रहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से बीजेपी को बड़ा फायदा हुआ है, क्योंकि बीजेपी पावर में है. अभी राहुल गांधी ने बयान दिया है कि दुनिया की सबसे बड़ी उगाही का बड़ा जरिया इलेक्टोरल बॉन्ड है, उन्होंने कहा कि मालूम नहीं राहुल गांधी को ये लिखकर कौन देता है.
अमित शाह ने कहा कि बीजेपी को करीब 6 हजार करोड़ के बॉन्ड मिले हैं. कुल बॉन्ड 20 हजार करोड़ के हैं तो 14 हजार के बॉन्ड कहां गए. उन्होंने कहा कि टीएमसी को 1600 करोड़, कांग्रेस को 1400 करोड़, बीआरएस को 1200 करोड़, बीजेडी के 775 करोड़ और डीएमके को 639 करोड़ के बॉन्ड मिले. उन्होंने कहा कि देश में हमारे 303 सांसद हैं हमारे 6 हजार करोड़ के बॉन्ड मिले हैं, 242 सांसद जिन पार्टियों के हैं, उन्हें 14 हजार करोड़ के बॉन्ड मिले हैं. उन्होंने कहा कि मैं दावा करता हूं कि जब हिसाब किताब होगा तो ये लोग किसी को फेस नहीं कर पाएंगे.
गृहमंत्री अमित शाह ने वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर कहा कि ये कब लागू होगा ये संसद तय करेगी, लेकिन इसके पीछे पीएम मोदी औऱ बीजेपी का विचार ये है कि देश में बार-बार चुनाव होते हैं, जनता चुनावों में व्यस्त रहती है. इससे काफी खर्चा होता है, बार-बार आचार संहिता लगने से पॉलिसी मेकिंग प्रभावित होने के साथ ही विकास के काम भी रुक जाते हैं. इससे देश की बहुत बड़ी हानि होती है. एक साथ चुनाव होने से खर्चा कम होगा. पॉलिसी मेकिंग में सरलता हो जाएगी और जनता भी जिसे चाहेगी उसे 5 साल के लिए काम सौंपकर अपने परिवार को समृद्ध बनाने के काम में लग जाएगी. वन नेशन वन इलेक्शन के रास्ते पर देश 1960 तक चला, फिर इंदिराजी ने सरकारें गिराना शुरू कीं. इसके बाद एक के बाद एक राज्य आम चुनाव से अलग होते गए.