भाजपा से बाहर आने की बात पर टीएमसी विधायक बाबुल सुप्रियो ने कहा कि जब मुझसे कहा गया कि कोई बंगाली कैबिनेट का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता. ये बात मुझे बुरी लगी. मैंने सबकुछ छोड़ दिया. मैं वापस अपने घर आया. यहां टीएमसी से विधायक हूं. ये तो आपको देखना है कि आप कहां तैर रहे हैं. नदी के इस तरफ या उस तरफ. मुद्दा ये है कि आपको वहां कितना प्यार मिलता है. मैंने सभी बॉसेस के सामने बोल दिया था मैं तुरंत पार्टी छोड़ दूंगा. यह निर्णय तुरंत लिया था. मेरे लिए कुछ भी छोड़ना कठिन नहीं है. मैंने 21 साल की उम्र में म्यूजिक के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी थी. मैं पीएम से मिला, अमित शाह जी से मिला. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी से मिला. फिर वहां से वापस आ गया.
मैं किसी शांति पथ पर नहीं रहना चाहता, बल्कि दिमाग में शांति चाहता हूं
राजनीति में आना एक चैलेंज था. मैंने उसे लिया. एक सेकेंड में फैसला लिया. साल 2014 से लगातार भाजपा के लिए लड़ा. दो बार आसनसोल से जीता. लगातार मैं अपने लोगों के साथ लड़ना चाहता हूं. बालीगंज से लड़ने के लिए मैंने अमित शाह जी से मांगा था. मैंने कहा था कि मुझे कठिन सीट चाहिए. आसान सीट से जीतना नहीं चाहता था. मैं अपने फैसले खुद लेता हूं. मैं किसी शांति पथ पर रहने के बजाय मैं अपने दिमाग में शांति चाहता हूं.
काली पोस्टर विवाद पर बाबुल ने कहा कि सेक्युलर इंडिया में आप किसी के खिलाफ नहीं जा सकते. हिंदू राष्ट्र नहीं है. लेकिन हिंदु धर्म बहुमत में है. लेकिन माइनोरिटी भी हैं. सबका बैलेंस होना चाहिए. मैं तोगड़िया हों या फिर ओवैसी हों. किसी के विचारोत्तेजक बातों को दरकिनार करता हूं. ये बातें उन्होंने इंडिया टुडे कॉनक्लेव ईस्ट के दूसरे दिन हुए सेशन फ्लैशप्वाइंटः द आइडिया ऑफ वन इंडिया वर्सेज द प्राइड ऑफ रीज़नल आइडेंटिटी में कही.
भाजपा छोड़ा तो सबसे पहले ममता बनर्जी ने तारीफ की थी
मैं इस समय बहुत खुश हूं. ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ये तो अच्छा काम करता है. इसे क्यों नहीं अपनी लिस्ट में शामिल किया. कैबिनेट में शामिल नहीं करने की वजह से ये सारा काम हुआ. इसके बाद उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया. कहा कि बंगाल के हो. बंगाल के लोगों के लिए काम करो. मैं कभी संघ के दफ्तर नहीं गया. मोहन भागवत से नहीं मिला. मैं एक पार्टी के लिए सिर्फ 10 घंटे काम करता था. मैंने भाजपा में आने के बाद उसे समझा है. राजनीति में ऐसा होता है कि लोग बिना किसी वजह के भी आपको गाली देते हैं.
दिलीप घोष को जवाब देना ठीक नहीं है, मैं जहां हूं खुश हूं
मैं तो मुसलमानों पर भरोसा करता हूं. मेरी बेटी का ड्राइवर मुसलमान है. मेरी सीट पर मुसलमानों ने मुझे जिताया है. दिलीप घोष ने कहा बाबुल को मिला क्या? मेरे पास मां है. मेरी मां मेरा आत्मसम्मान है. मुझे दिलीप घोष का जवाब देने के लिए काफी नीचे आना होगा. मैं जहां हूं बेहद खुश हूं. मैं अपने दिमाग को बेवजह के मामलों में नहीं फंसाना चाहता. मैं तंदूर बने रहना चाहता हूं. उन्हें चिकन बन जाने दो.
सबका साथ, सबका विकास की बात आज भी करता हूं
एक भारत और क्षेत्रीय पहचान में क्या अंतर है. सबका साथ सबका विकास होना चाहिए. अगर आप किसी जर्नलिस्ट को साल 2018 के ट्वीट के लिए गिरफ्तार करते हो, तो नुपूर शर्मा को भी करो. महिला होने के नाते उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए. लेकिन इस शर्त पर नहीं कि वो पार्टी की हैं. यहां पर मन की बात एक ही आदमी करता है. बाकी मुख्यमंत्री उसी समय सोते रहते हैं.