इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट (India Today Conclave East) के 5वें संस्करण के दूसरे दिन MINORITY MATTERS: How to Break out of the Vote Bank Mould विषय पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) ने अपनी बात रखी.
टीवी टुडे ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने मुख्तार अब्बास नकवी से कई सवाल किए. भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति, आतंकवाद, कट्टरता जैसे मामलों पर कई सवाल किए गए जिसका मुख्तार अब्बास नकवी ने जवाब दिया.
'8 सालों से भारत में दंगों और आतंकवाद पर कंट्रोल है'
उदयपुर और अमरावती के मामलों पर सवाल किया गया कि वे किस इस वक्त अल्पसंख्यकों की स्थिति और टेरर की स्थिति को किस तरह से देखते हैं. इसपर नकवी ने कहा कि सरकार ने विकास में भेदभाव नहीं किया. लेकिन जो समाज का हिस्सा इससे लाभान्वित हुआ उससे वोटों में भेदभाव ज़रूर हुआ. उन्होंने कहा कि देश में आतंकवाद से लेकर साम्प्रदायिक उन्माद का इतिहास रहा है. जैसे भागलपुर दंगा, भवंडी दंगा, मलियाना का दंगा. लेकिन 8 सालों की जमीनी हकीकत देखें, तो इस दौरान दंगों और आतंकवाद पर कंट्रोल दिखता है. कश्मीर की कुछ घटनाओं को छोड़कर देश के किसी और हिस्से में ऐसी घटनाएं नहीं हुईं. शांति और सुकून का माहौल बना हुआ है.
उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा ने जो कुछ कहा उसे किसी ने जस्टिफाई नहीं किया. उदयपुर और अमरावती जैसी घटना की हम निंदा करते हैं.
जुबैर जेल में हैं नुपुर बाहर हैं, क्यों?
अगला सवाल ये था कि अगर जुबैर और नूपुर शर्मा का गुनाह बराबर है तो ऐसा क्यों है कि जुबैर जेल में हैं, नुपुर बाहर हैं? इसपर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति है सर्वे भवन्तु सुखिनः. इसमें किसी धर्म के सुख की बात नहीं, मानवता के सुख की बात की जा रही है. जो लोग इस जगह रहकर यहां के संस्कार नहीं समझ रहे हैं, उनसे ज्यादा नादान कोई नहीं है.
'नूपुर शर्मा के मामले पर मुझे अफसोस हुआ था'
उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा के मामले पर मुझे अफसोस हुआ था, हम चाहते हैं कि हम अगर दूसरे धर्म का सम्मान करते हैं तो सामने वाला भी हमारे धर्म का सम्मान करे. सम्मान न भी करे तो अपमान तो कम से कम न करे. नुपुर शर्मा के बयान को जस्टिफाई नहीं कर रहे हैं, जो उन्होंने कहा बिल्कुल गलत कहा है.
मुख्तार अब्बास नकवी से जब यह पूछा गया कि वे नूपुर शर्मा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कितना सहमत हैं, तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा. अगर कोई और ये कहता तो मैं सहमत नहीं होता.
उन्होंने कहा कि मैं सकारात्मक सोचता हूं. 2000 में अल कायदा सामने आता है. 39 ऐसे देश थे जिसमें अलकायदा के अलग-अलग विंग सक्रिय हो गए थे. संसद में आडवाणी जी गृहमंत्री थे. उन्होंने कहा था कि अलकायदा जैसा संगठन भारत में अपनी जड़ें नहीं जमा पाया. मेरा मानना है कि भारत में अलकायदा की जड़ों के बारे में जो कहा जा रहा है वह गलत है. यहां का मुसलमान भी यही बात कहता है-
हो लाख जुल्म मगर बद्दुआ नहीं देंगे, ज़मीन मां है जमीं को दगा नहीं देंगे.
रवायतों की सफें तोड़कर बढ़ो आगे, जो तुमसे आगे हैं वो तुमको जगह नहीं देंगे.
ये कमिटमेंट है. ये देश संविधान से चलता है. पहले देश में बंटवारे के बाद 7-8 प्रतिशत अल्पसंख्यक थे, अब 2011 की जनगणना के मुताबिक 24 प्रतिशत हो गए हैं. तो आप समझें यहां की स्थिति, पाकिस्तान में ऐसा नहीं है. भारत में 3 लाख एक्टिव मस्जिदें हैं, जितनी न तो पाकिस्तान में हैं और न किसी और देश में.
क्या कट्टरता पहले के मुकाबले बढ़ी है?
भारत में बढ़ रही कट्टरता पर जब उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने कि कट्टरता न ईमान वाला कर सकता है न इस्लाम वाला कर सकता है, ये शैतान वाले लोग करते हैं. ये देश के लिए और समाज के लिए नुकसानदेह हैं. हमारे देश में भेदभाव की वजह से कट्टरता आ रही है, ये कहना बिल्कुल गलत है.
'बलवाइयों के एक्शन पर बुलडोज़र रिएक्शन है'
बुलडोज़र वाले मामले पर सवाल किया गया तो, नकवी ने कहा कि कोर्ट ने कहा है कि जो भी कार्रवाई की गई है, वो सही है. तो हम कोर्ट की बात मानते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बुलडोज़र की बात होगी, तो बलवाइयों की बात भी होनी चाहिए. बलवाइयों के एक्शन पर बुलडोज़र रिएक्शन है.
'मदरसों को आइसोलेट नहीं कर सकते'
उन्होंने कहा कि मदरसों का एक इतिहास है, हम उन्हें आइसोलेट नहीं कर सकते. हमें उनकी धार्मिक शिक्षा के साथ उन्हें फॉर्मल शिक्षा भी देना चाहिए. मदरसों को मॉर्डनाइजेशन होना चाहिए, जो अटल जी के समय भी हुआ और अब भी होगा.
काली के पोस्टर पर हुए बवाल पर भी उन्होंने कहा कि फिल्मों की धार आतंकवाद पर गहरी मार कर सकती है. लेकिन इससे आतंकवाद को बल मिले ये नहीं होना चाहिए. फिल्मों का इस्तेमाल लोगों तो जोड़ने के लिए हो, न कि तोड़ने के लिए. उपराष्ट्रपति पद के लिए मुख्तार अब्बास नकवी के नाम के चर्चे हो रहे हैं. तो उन्होंने कहा कि जो पार्टी जिम्मेदारी देगी वो स्वीकार है. धर्म की वजह से नहीं क्रेडिबिलिटी और कमिटमेंट की वजह से बीजेपी लोगों को चुनती है.