केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में एक बार फिर साफ कहा कि सीएए नागरिकता छीनने का नहीं, बल्कि नागरिकता देने वाला कानून है. उन्होंने साफ कहा कि इस कानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी, बल्कि जो शरणार्थी आए हैं, उन्हें नागरिकता दी जाएगी.
कॉन्क्लेव के दौरान अमित शाह ने सीएए और एनआरसी को लेकर कई सारे सवालों के जवाब भी दिए. जब उनसे एनआरसी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब वो चुनाव के बाद देंगे.
अमित शाह ने कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि एनआरसी आएगा. मैंने ऐसा कहा है कि इस सवाल का जवाब मैं चुनाव के बाद दूंगा.
गृह मंत्री शाह ने कहा कि मैं साफ कर देना चाहता हूं कि सीएए में एनआरसी का कोई वायरस नहीं है. दोनों अलग-अलग हैं. इसमें नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है. इस देश के अल्पसंख्यक को विपक्ष भड़का रहा है. मैं मुस्लिम भाइयों से निवेदन करता हूं कि इनकी बात मत मानिएगा. सीएए से किसी की भी नागरिकता नहीं जा सकती. जो शरणार्थी आए हैं, उन्हें नागरिकता दी जाएगी.
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चुनाव से पहले CAA क्यों?
इस सवाल पर शाह ने कहा कि 2019 में कानून पारित हो गया है. पांच साल पहले कानून पारित हो गया था. अब सिर्फ नियम बनाए हैं. हमने 2019 के चुनाव में बीजेपी के घोषणापत्र में भी कहा था कि अगर हम बहुमत में आते हैं तो नागरिकता संशोधन कानून लेकर आएंगे. आते ही सरकार ने अगस्त 2019 में ये बिल पारित कर दिया. राज्यसभा में भी पारित हुआ. लोकसभा में पारित हुआ. कहां कन्फ्यूजन था? कन्फ्यूजन का सवाल ही नहीं था.
उन्होंने कहा कि सबको मालूम था कि सीएए आने वाला है. और मैंने कभी नहीं कहा कि हम पीछे हटेंगे. मैंने हमेशा कहा कि ये पत्थर की लकीर है और ये होकर रहेगा.
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पांच धर्म के लोगों को ही नागरिकता क्यों?
विपक्ष इसका विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि इसमें मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया. इसे लेकर जब सवाल किया गया तो शाह ने कहा आजादी के वक्त में पाकिस्तान में 23 प्रतिशत हिंदू थे. आज 2.7 प्रतिशत हैं. कहां गए भाई? धर्म परिवर्तन हो गया. बेशुमार अत्याचार हुए. महिलाओं के साथ अत्याचार हुए. बच्चियों को उठा लिया गया. बच्चियों के साथ निकाह पढ़ लिया गया. वो कहां जाएं? वो भारत की शरण में आए. बांग्लादेश में 23 प्रतिशत हिंदू थे, आज 10 प्रतिशत से कम बचे हैं. वो या तो भारत की शरण में आए, या उनका धर्म परिवर्तन हो गया.
उन्होंने आगे कहा कि 1990 में दो लाख से ज्यादा सिख और हिंदू अफगानिस्तान में थे, आज 378 हैं. और वो लोग अपना धर्म, अपना सामान, अपने परिवार की, महिलाओं की इज्जत बचाने के लिए भारत की शरण में आए हैं, और ये लोग कहते हैं कि हम उन्हें नागरिकता न दें.
दरअसल, सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी, जो 31 दिसंबर को या उससे पहले भारत आ चुके होंगे.