
बिना पुल के नदियों, नालों और तालाबों को पार करना युद्ध क्षेत्र में बेहद मुश्किल काम माना जाता है. पुल न होने की वजह से युद्ध क्षेत्र में किसी भी देश की सेना का काम बाधित हो सकता है. ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए शॉर्ट स्पैन ब्रिज बेहद कारगर साबित होते हैं. इस सिस्टम के जरिए अस्थाई पुल फटाफट बनकर तैयार होते हैं और सेनाएं अपनी मंजिलों तक पहुंच जाती हैं. भारतीय सेना के पास भी अब शॉर्ट स्पैन ब्रिज का विकल्प है.
भारतीय सेना के पास जल्द ही इनमें से 100 सिस्टम होंगे जो भारी टैंकों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों का भार उठा सकते हैं. ऐसे सिस्टम पानी की वजह से आने वाली बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं. पहले ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए जिस सिस्टम का सहारा लेना पड़ता था, उसमें 30 से 40 लोगों के मदद की जरूरत पड़ती है, जो मिलकर अस्थाई ब्रिज बनाते थे. लेकिन नए शॉर्ट स्पैन ब्रिज सिस्टम के जरिए महज 8 से 10 मिनट में ब्रिज तैयार भी हो जाएगा और इसके लिए ज्यादा लोगों की जरूरत भी नहीं है. इसे महज 4 लोग बेहद कम वक्त में तैयार कर सकते हैं.
बढ़ेंगी क्षमताएं
सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की मौजूदगी में दिल्ली में कोर ऑफ इंजीनियर्स को 12 स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम के पहले बैच को दिया गया है. सेना प्रमुख ने कहा, 'इससे हमारी क्षमताएं बढ़ेंगी. हमारे पास पहले से ही 5 मीटर और 15 मीटर के पुल थे लेकिन 10 मीटर की भी जरूरत थी. इससे पश्चिमी सीमाओं के मशीन्ड फॉर्मेशन में तेजी आएगी.' इस सिस्टम को DRDO ने डिजाइन किया है और लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड ने इसकी मैन्युफैक्चरिंग की है.
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ब्रिजिंग सिस्टम को मिलेगी नई धार
यह सिस्टम बेहद खास है, जिसके जरिए ब्रिजिंग सिस्टम को तेजी मिलेगी. पानी को पार करने में ऐसे संयत्र सेना के लिए बेहद मददगार हैं. ब्रिजिंग की दुनिया में यह एक गेमचेंजर कदम साबित होगा. कोरोना के प्रतिबंधों के बाद भी ब्रिजिंग सिस्टम की सप्लाई सेना को मिलती रहेगी. अगस्त तक सेना को ऐसी ही कई शॉर्ट स्पैन ब्रिज दिए जाएंगे.