चीन ने एक बार दुस्साहस किया है. 30 महीने पहले लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश के यांगत्से इलाके में विश्वासघात किया है. LAC पर तवांग के पास 15 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत-चीन के सैनिकों के बीच भिड़ंत हो गई है. दोनों ओर से कई सैनिकों के घायल होने की खबर है. आम तौर पर 8 से 10 लोगों के घायल होने की खबरें हैं. ये झड़प 9 दिसंबर को हुई थी. हालांकि, झड़प के बाद दोनों देशों के सैनिक पीछे हट गए हैं. दोनों देशों के कमांडर स्तर पर फ्लैग मीटिंग हुई.
चीन के विश्वासघात करने की ये कोई पहली घटना नहीं है. कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब दोनों देशों के सैनिकों में झड़प हुई है. हालांकि, कुछ महीने से दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की बातचीत के बाद शांति देखने को मिल रही थी. सूत्रों के मुताबिक, अब फिर चीनी सैनिकों से झड़प हुई है. यहां भारतीयों सैनिकों को पीछे धकेलने का काम किया गया. बाद में स्थिति को संभाला गया. बताते हैं कि चीनी सैनिक सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे.
17 हजार फीट की ऊंचाई पर झड़प
बताते चलें कि एलएसी पर कुछ इलाकों को लेकर विवाद है. चीन इन हिस्सों पर कब्जा करने की कोशिश करता है. चीन अब एक रणनीति के तहत लद्दाख के अलावा अरुणाचल प्रदेश में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, पहले से मुस्तैद भारतीय जवानों ने मोर्चा संभाला. दोनों तरफ के सैनिक घायल हुए हैं. गोलीबारी की बात सामने नहीं आ रही है. अब तक धक्कामुक्की की खबर है. चीन के करीब 300 सैनिक यहां आए थे. इससे ज्यादा की संख्या में भारतीय सैनिक मौजूद थे. 17 हजार फीट की ऊंचाई पर ये घटना हुई है. घायलों में चीनी सैनिकों की संख्या ज्यादा है. 2006 के बाद चीनी सेना पहले से इस तरह की नाकाम कोशिशें करती आई है. इसी तरह का तनाव सिक्किम में भी बना हुआ है.
गलवान में 38 चीनी सैनिक मारे गए थे
भारत को पहले से इस तरह की झड़प की आशंका थी. दरअसल, भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर 1993 और 1996 का समझौता लागू है. इससे पहले पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 2020 में दो बार झड़प हुई थी. इनमें पहली बार 21 मई 2020 और फिर 15 जून 2020 को दोनों देश आमने-सामने आ गए थे. जून 2020 को भारत और चीन के सौनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प में कर्नल संतोष बाबू समेत भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. हिंसक झड़प के दौरान चीन के 38 सैनिक नदी में बह गए थे. जबकि चीन ने सिर्फ 4 सैनिकों की मौत की बात कबूली थी.
क्या हुआ था गलवान में?
साल 2020 में 15-16 जून की रात में भारतीय और चीनी सेना के बीच गलवान घाटी में एलएसी पर हिंसक झड़प हुई थी. भारत की तरफ से इस झड़प में एक कमांडर समेत 20 सैनिकों की मौत हुई थी. हालांकि, चीन के कितने सैनिक मारे गए, इसे लेकर चीन ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी. भारत की तरफ से दावा किया गया कि इस झड़प में चीनी सैनिक भी हताहत हुए हैं. बाद में चीन ने कहा कि उसके 4 सैनिक गलवान में मारे गए थे. ऑस्ट्रेलिया के न्यूजपेपर 'द क्लैक्सन' (The Klaxon) में एक रिपोर्ट छपी है.
नदी में बहे 38 चीनी सैनिक
रिपोर्ट में चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Weibo के हवाले से कहा गया है कि उस रात कम से कम 38 चीनी सैनिक डूब गए थे. जबकि चीन ने सिर्फ 4 सैनिकों की मौत की बात कबूली. रिपोर्ट में कहा गया है कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था, किस वजह से झड़प हुई. इसके बारे में बहुत सारे फैक्ट बीजिंग द्वारा छिपाए गए.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
गलवान में जून 2020 में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी. 4 दशक में पहली बार दोनों देश इस तरह से आमने सामने आए थे. चीन गलवान हिंसा में मारे गए सैनिकों की संख्या छिपाता रहा. लेकिन पिछले साल फरवरी में, उसने अपने चार सैनिकों को मरणोपरांत सम्मानित करने का ऐलान किया था. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने चार सैनिकों की मौत की बात कबूली थी. उसने कहा था कि इनमें से जूनियर सार्जेंट वांग झुओरान की मौत डूबने से हुई थी. बाकी तीन की संघर्ष के दौरान. रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जून की झड़प गलवान नदी के एक सिरे पर भारतीय सैनिकों द्वारा बनाए एक अस्थायी पुल के निर्माण के बाद शुरू हुई थी. भारत ने पुल निर्माण का फैसला तब लिया था, जब चीन ने इस क्षेत्र में अवैध रुप से बुनियादी ढांचे का निर्माण करना शुरू कर दिया था और इस क्षेत्र में तैनाती बढ़ा रहा था.
रिपोर्ट में और क्या कहा गया?
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2020 के बाद से चीन लगातार भारत के साथ हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए बफर जोन में पेट्रोलिंग और अवैध निर्माण कर रहा था. जब कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय जवानों ने गलवान नदी पर पुल का निर्माण करना शुरू किया, ताकि चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, तो चीनी सैनिकों ने इसका विरोध किया. 6 जून को 80 चीनी सैनिक इस पुल का तोड़ने के प्रयास से आगे आए, जबकि 100 भारतीय जवान इसे बचाने के लिए आगे बढ़े.
6 जून को भारत और चीनी सैनिकों के बीच समझौता हुआ कि दोनों सेनाएं बफर जोन से वापस जाएंगी. हालांकि, चीन ने इस समझौते का भी उल्लंघन कर दिया. 15 जून को जब संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय सैनिक चीन की गतिविधियों को देखने के लिए आए, तो उन पर चीनी सैनिकों ने हमला कर दिया. इसके बाद दोनों सेनाओं के बीच झड़प हुई. लेकिन झड़प में खुद को कमजोर होता देख चीनी सेना पीछे हटने लगी. ऐसे में चीनी सेना ने रात के अंधेरे में ही नदी में उतरकर उसे पार करने का फैसला किया. लेकिन नदी का बहाव तेज हो गया और चीनी सैनिक बह गए.