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Corona: भारत में भी बूस्टर डोज की मिले मंजूरी, वैक्सीन पर टॉप साइंटिस्ट्स के पैनल की सिफारिश

अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के तमाम देशों में ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए बूस्टर डोज लगाने की प्रक्रिया तेज हो गई है. अब भारत में भी कोरोना के नए वेरिएंट के खतरे को देखते हुए 40 साल से ऊपर के सभी नागरिकों को कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज की सिफारिश की गई है. यह सिफारिश टॉप इंडियन जीनोम साइंटिस्ट की ओर से हुई है.

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फाइल फोटो
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • SARS-CoV-2 जीनोमिक्स सिक्वेंसिंग कंसोर्टियम ने की सिफारिश
  • भारत सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग लैब का नेटवर्क है INSACOG

अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के तमाम देशों में ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए बूस्टर डोज लगाने की प्रक्रिया तेज हो गई है. अब भारत में भी कोरोना के नए वेरिएंट के खतरे को देखते हुए 40 साल से ऊपर के सभी नागरिकों को कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज की सिफारिश की गई है. यह सिफारिश टॉप इंडियन जीनोम साइंटिस्ट की ओर से हुई है. 

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यह सिफारिश भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स सिक्वेंसिंग कंसोर्टियम (INSACOG) ने अपने साप्ताहिक बुलेटिन में की. INSACOG कोरोना के जीनोमिक वेरिएशन को मॉनिटर करने के लिए भारत सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग लैब का नेटवर्क बनाया गया है. 

क्या है सिफारिश?
INSACOG ने अपने बुलेटिन में कहा, सभी अन वैक्सीनेटेड लोगों को वैक्सीन और 40 साल से ऊपर के लोगों को बूस्टर डोज लगाने पर विचार किया जा सकता है. सबसे पहले मोस्ट हाई रिस्क वालों को पहले प्राथमिकता देनी चाहिए. यह सिफारिश ऐसे वक्त पर आई, जब लोकसभा में हाल ही में कोरोना पर चर्चा के दौरान सांसदों ने बूस्टर डोज की मांग की थी. 

वहीं, ASSOCHAM सीएसआर काउंसिल के चेयरमैन अनिल राजपूत ने कहा, ओमिक्रॉन वेरिएंट में म्युटेशन ज्यादा है और यह ज्यादा संक्रामक भी है. ऐसे में वैक्सीन की गति में तेजी लाने की जरूरत है और बूस्टर डोज की भी जरूरत है. 

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भारत में ओमिक्रॉन की दस्तक
अभी तक सुरक्षित रहा भारत भी गुरुवार को ओमिक्रॉन से संक्रमित देशों की लिस्ट में शामिल हो गया. यहां कर्नाटक में कोरोना के नए वेरिएंट के दो केस मिले हैं. दोनों मरीज 66 और 46 साल के हैं. दोनों ने वैक्सीन की दोनों डोज लगवाई हैं. दोनों में कोरोना के हल्के लक्षण मिले हैं. इनमें से एक व्यक्ति भारत से दुबई भी जा चुका है.

बता दें कि अब तक 29 देशों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है और WHO ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न की कैटेगरी में रखा है. सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में इस वैरिएंट से संक्रमित मरीज की पहचान की गई थी.


 

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