Indian Railways Platform Ticket Price: कोरोना संक्रमण के दौरान स्टेशनों पर बेवजह जुटने वाली भीड़ को रोकने के लिए रेलवे ने प्लेटफॉर्म टिकट की कीमतों (Platform Ticket Price) में इजाफा कर दिया था. इस फैसले की देशभर में बड़े स्तर पर आलोचना की गई थी. लेकिन अब रेलवे ने अब जबलपुर सहित मंडल के 11 स्टेशनों पर प्लेटफार्म टिकट को सस्ता कर दिया है. जिसके लिए अब 50 की बजाए 20 रुपये देने होंगे.
इन स्टेशनों पर सस्ता हुआ Platform Ticket
पश्चिम मध्य रेलवे (West Central Railway) के अनुसार जबलपुर, मदन महल, कटनी, कटनी मुड़वारा, मैहर, सतना, रीवा, सागर, दमोह, नरसिंहपुर और पिपरिया में अब प्लेटफार्म टिकट के लिए 20 रुपये देने पड़ेंगे. इससे पहले जबलपुर और मदनमहल में 50-50 रुपये तो अन्य स्टेशनों पर 30-30 रुपये का प्लेटफार्म टिकट खरीदना पड़ता था. हालांकि, प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई अन्य स्टेशनों पर अभी भी प्लेटफॉर्म टिकट के लिए 30 से 50 रुपये ही वसूले जा रहे हैं.
जबलपुर मंडल के 11 रेलवे स्टेशनों में मात्र 20 रूपए में मिलेगी प्लेटफार्म टिकट । #wcr @BhopalDivision @drmkota @drmjabalpur pic.twitter.com/wAHjO0odF5
— West Central Railway (@wc_railway) September 12, 2021
प्लेटफार्म टिकट नहीं होने पर 500 रुपये तक का जुर्माना
कई बार देखा जाता है कि यात्रियों को छोड़ने आए रिश्तेदार बिना प्लेटफॉर्म टिकट लिए स्टेशन के अंदर चले आते हैं. इससे बेवजह की भीड़ तो जुटती है और राजस्व का भी नुकसान होता है. कोरोना संक्रमण बढ़ने के दौरान ये स्थिति और भी खरतरनाक हो सकती है. इस स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने बिना प्लेटफॉर्म टिकट के पकड़े जाने पर 500 रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया है.
वहीं, दूसरी ओर अगर आपको अचानक से कहीं यात्रा करनी पड़े और आप किसी कारणवश टिकट नहीं ले पाए हैं तो प्लेटफार्म टिकट होने की वजह से आपकी यात्रा की मुश्किलें हल हो जाएंगी. आपके ऊपर जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. आप 250 रुपये फाइन और टिकट के लिए निर्धारित राशि TT को देकर यात्रा कर सकते हैं.
काफी तेजी से प्लेटफॉर्म टिकट के कीमतों में हुआ था इजाफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत 5 रुपये निर्धारित थी. इसे पहले बढ़ाकर 10 रुपये किया गया था. लेकिन देश में अचानक बढ़ते हुए कोरोना के मामलों को देखते हुए इसकी कीमत 30 से 50 रुपये तक कर दिया गया है. रेलवे के मुताबिक जंक्शनों पर कम लोगों के आने से राजस्व में तो नुकसान हुआ है, लेकिन अगर ये फैसला नहीं लिया जाता तो कोरोना के दौरान स्थिति और भयावह हो सकती थी.