Indian Railways: समस्तीपुर रेलमंडल में आने वाले महज कुछ ही दिनों में स्टीम इंजन की तरह डीजल इंजन भी इतिहास के पन्नों का हिस्सा बनकर रह जाएगा. मंडल के सभी रूटों पर इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ती हुईं ट्रेनें नजर आएंगी. वहीं, डीजल शेड के शोभा की वस्तु बनकर रह गई है. यहां तक बांग्लादेश को समस्तीपुर से कुछ डीजल इंजन को बेचा जा चुका है. बता दें कि मंडल के सभी रूटों पर काफी तेजी से विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है.
मंडल के जयनगर दरभंगा, मुजफ्फरपुर मोतिहारी से गोरखपुर, समस्तीपुर से सहरसा रेल मार्गो में इलेक्ट्रिकफिकेशन का कार्य होने के बाद इन रूटों पर अधिकतर ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से चल रही है. समस्तीपुर लोको शेड में इलेक्ट्रिक इंजन को मरमत करने का कार्य चलने लगा है. रेल क्षेत्र में काफी तेजी से विकास कार्य होने का नतीजा है कि रेल यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अब कम समय लग रहे है.
इलेक्ट्रिक इंजन पर्यावरण के अनुकूल
मंडल में ट्रेनों का परिचालन इलेक्ट्रिक इंजन से होने की वजह से एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए अनुकूल है. वहीं, रेल यात्रियों के लिए भी काफी सुविधाजनक हो गया है. इलेक्ट्रिक इंजन के लग जाने की वजह से ट्रेनों के डब्बों में बिजली का सप्लाई भी इंजन के माध्यम से किया जाने लगा है, जिससे पॉवर कार पर निर्भरता खत्म हो गई है और इसका फायदा यह हुआ है कि एक पॉवर कार के बदले यात्रियों के लिए एक बोगी का समायोजन हो गया है, तो इसके अलावा, ट्रेनों की स्पीड में भी बढ़ोतरी हुई है. इससे यात्रियों के समय मे भी काफी बचत होने की उम्मीद जगी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
समस्तीपुर रेलमंडल के डीआरएम आलोक अग्रवाल कहते हैं कि मंडल में विद्युतीकरण का कार्य एक तरह से जम्प है. समस्तीपुर दरभंगा जयनगर रेलखंड का पूरा विद्युतीकरण हो गया है. इस रेलखंड पर जो भी ट्रेनें चलेगी उनको डीजल लोकोमोटिव की जरूरत नही पड़ेगी.कोई पॉवर बदलने की जरूरत नही पड़ेगी.डीआरएम ने कहा कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल होगा.इसके साथ ही परिचालन में कम लागत आएगी.गाड़ी की गति भी बढ़ेगी इससे सभी को लाभ होगा.