
रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है और इस युद्ध के दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता हैं. ऐसे में भारत रूस से मिलने वाली अपनी रक्षा संबंधी ज़रूरतों पर कड़ी नजर रख रहा है.
भले ही भारतीय और रूसी अधिकारियों ने कहा है कि डिलीवरी पर इसका कोई प्रभाव या देरी नहीं होगी, लेकिन अमेरिकी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और युद्ध के लंबे समय तक जारी रहने को लेकर चिंता बनी हुई है. रक्षा प्रतिष्ठान में मौजूदा सौदों और पेमेंट की स्थिति की समीक्षा की जा रही है. रूसी से होने वाले आयात में गिरावट आई है, लेकिन एक हिस्सा अभी भी मास्को से सोर्स किया गया है.
पिछले एक दशक में, भारत के हथियारों के निर्यात में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है और इसके लिए जिम्मेदार कारणों में से एक, रूस पर कम निर्भरता थी. हालांकि अभी भी पुर्जे और अन्य सैन्य ज़रूरतें मास्को से आ रही हैं. रूस के अलावा, भारत आने वाले समय में अन्य सप्लायरों से भी हथियारों के आयात पर विचार कर रहा है.
अंतर्राष्ट्रीय हथियारों के ट्रांसफर पर, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-15 और 2016-20 के बीच, रूस के हथियारों के निर्यात में आई कमी, भारत को निर्यात किए गए हथियारों में आई 53 प्रतिशत की कमी की वजह से थी. SIPRI का कहना है कि कुल भारतीय हथियारों के आयात में रूस की हिस्सेदारी 70 से घटकर 49 फीसदी हो गई है. गिरावट के बावजूद भारत 2016-20 के बीच, रूस से हथियार लेने के मामले में पहले स्थान पर था.
चीन-पाक से खतरे के चलते भारत ने दिए हथियारों के ऑर्डर
यहां रूस से अपनी हथियारों की ज़रूरत के संबंध में, भारत को रूस-यूक्रेन के युद्ध के नतीजों पर नजर बनाए रखने की ज़रूरत है. SIPRI की रिपोर्ट यह भी कहती है कि हालांकि भारत के साथ, लड़ाकू विमान जैसे कई बड़े रूसी हथियारों के सौदे, 2020 तक पूरे हो गए थे. भारत ने 2019-20 में अलग-अलग तरह के रूसी हथियारों के लिए नए ऑर्डर दिए थे. इस डिलीवरी से आने वाले पांच सालों में रूसी हथियारों के निर्यात में बढ़ोत्तरी होगी.
पिछले दो सालों में चीन और पाकिस्तान दोनों से खतरे की आशंका को देखते हुए, भारत बड़े पैमाने पर हथियारों के सौदे पर विचार कर रहा है. साथ ही, मेक इन इंडिया पर भी जोर दिया जा रहा है और स्वदेशी विकल्पों का पता लगाया जा रहा है.
विदेशी हथियारों और सैन्य प्लेटफार्मों पर सशस्त्र बलों की निर्भरता को कम करने के लिए, भारत सरकार ने 2025 तक, 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है. साथ ही, भारतीय निर्माताओं से अपनी घरेलू खरीद को दोगुना करने के लिए एक नीति निर्धारित की है.
रूस से 9 अरब डॉलर के समझौतै दांव पर
भारत और रूस ने अगले दशक में रक्षा संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से, दिसंबर 2021 में पहली 2+2 वार्ता के दौरान, एक सैन्य तकनीकी सहयोग समझौते 2021-2031 पर हस्ताक्षर किए थे. भारत के 9 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य प्लेटफॉर्म के ऑर्डर दांव पर लगे हुए हैं.
ट्रायम्फ एस-400 (Triumf S-400)
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम रूस के साथ सबसे बड़े सैन्य सौदों में से एक है. भारत ने अक्टूबर 2018 में, 5 एस-400 मिसाइलें खरीदने के लिए रूस के साथ 5 अरब डॉलर का समझौता किया था.
यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे दुनिया में सबसे घातक मिसाइलों में से एक माना जाता है. यह 400 किमी तक के कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. चाहे वह लड़ाकू जेट हों, बॉम्बर हों, क्रूस और बैलिस्टिक मिसाइल हों या मानव रहित हवाई वाहन. अपने राडार से यह हर तरह के हवाई खतरों का पता लगा सकती है.
फिलीपींस को ब्रह्मोस निर्यात के आदेश
भारत और रूस के ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस ऐरोस्पेस ने देश की नौसेना को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल देने के लिए फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील की है. फिलीपींस की नौसेना इसे जहाज-रोधी तट-आधारित मिसाइल के तौर पर इस्तेमाल करेगी. इसकी मारक क्षमता 290 किमी है. ब्रह्मोस ऐरोस्पेस, मिसाइल प्रणाली को लगातार बेहतर कर रहा है, जिससे यह समुद्र और जमीनी लक्ष्यों के खिलाफ और भी घातक हो गई है.
ब्रह्मोस एक शक्तिशाली मिसाइल है जिसे भारतीय सेना पहले से ही इस्तेमाल कर रही है. इसे पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या भूमि प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है.
एके 203 असॉल्ट राइफल (AK 203)
रूस के साथ एक साझेदारी के हिस्से के रूप में, उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय सेना की असॉल्ट राइफलों की आवश्यकता उत्तर प्रदेश के कोरवा, अमेठी में बनने वाली 6.71 लाख एके 203 राइफलों के उत्पादन से पूरी हो जाएगी. लेकिन मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट में देरी हुई. लेकिन अब यह इंतजार भी खत्म हो गया है, क्योंकि सभी बाधाएं दूर हो गई हैं.
भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से 6,01,427 AK-203 असॉल्ट राइफल्स की खरीद के लिए 5000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट है. यह राइफल भारत में निर्मित की जाएंगी. इसके अलावा, रूस से शेल्फ़ से 70,000 राइफलें खरीदी जाएंगी.
परमाणु संचालित पनडुब्बी (Nuclear powered submarine)
2019 में, भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली सबमरीन को लीज़ पर देने के लिए, रूस के साथ 3 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. चक्र III, अकुला क्लास की सबमरीन 2025 में मिलने की उम्मीद है, जो 10 सालों के लिए दी जाएगी. यह रूस से लीज़ पर ली गई तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन होगी. अन्य दो 1988 में तीन साल के लिए और 2012 में 10 साल के लिए ली गई थी.
4 युद्धपोत
रूस के राज्य द्वारा संचालित हथियार निर्यातक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के बीच 2018 में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. नियम और शर्तों के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए 1 अरब डॉलर के दो फ्रिगेट्स यानी युद्धपोत रूस में निर्मित किए जाने हैं और गोवा में बाकी दो युद्धपोतों पर 2018 में हस्ताक्षर किए गए थे. दो युद्धपोतों की डिलीवरी समझौते के चार साल के अंदक शुरू होनी थी, यानी 2022 के अंत तक.
लड़ाकू जेट विमान
जुलाई 2020 में, जब लद्दाख में चीन के साथ सैन्य संघर्ष चरम पर था, भारत ने 18,148 करोड़ रुपये की कीमत के 12 सुखोई-30 (Su-30) MKI और 21 मिग 29 (MiG 29) लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी थी.
जबकि अमेरिका ने दावा किया है कि भारत ने रूस से मिग 29 के ऑर्डर रद्द कर दिए हैं. हालांकि, दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू द्वारा किए गए दावे पर भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.