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बंगाल ट्रेन हादसा: जांच रिपोर्ट में सामने आई मालगाड़ी के चालक दल की लापरवाही, ट्रेन ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी उठे सवाल

कंचनजंगा एक्सप्रेस रेल हादसे की शुरुआती जांच में न्यू जलपाईगुड़ी रेल डिवीजन की ट्रेन ऑपरेटिंग टीम की लापरवाही और मालगाड़ी चालक दल की बड़ी चूक सामने आई है. हादसे की जांच कर रही छह सदस्यीय टीम के पांच सदस्यों ने माना है कि सिग्नल की अनदेखी करने साथ-साथ गति प्रतिबंध का उल्लंघन करने के मालगाड़ी के लोको पायलट को दोषी ठहराया है.

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Locals gather after a collision between the Kanchanjunga Express and a goods train, near Rangapani railway station, Siliguri, on Monday, June 17, 2024. (Photo: PTI)
Locals gather after a collision between the Kanchanjunga Express and a goods train, near Rangapani railway station, Siliguri, on Monday, June 17, 2024. (Photo: PTI)

17 जून को कंचनजंगा एक्सप्रेस रेल हादसे की शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में न्यू जलपाईगुड़ी रेल डिवीजन की ट्रेन ऑपरेटिंग टीम की लापरवाही और मालगाड़ी चालक दल की बड़ी चूक सामने आई है.  

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पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में सोमवार को खड़ी सियालदह जाने वाली कंचनजंगा एक्सप्रेस से टकरा जाने के बाद यात्री ट्रेन के गार्ड और मालगाड़ी के पायलट सहित कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना की जांच के लिए रेलवे ने छह वरिष्ठ अधिकारियों की एक जांच टीम गठित की थी, जिन्होंने अपनी शुरुआती रिपोर्ट दाखिल कर दी है. जिसमें न्यू जलपाईगुड़ी रेल डिवीजन की ट्रेन ऑपरेटिंग टीम की लापरवाही और मालगाड़ी चालक दल की बड़ी चूक सामने की बात सामने आई है.

जांच रिपोर्ट में सामने आई चालक दल की लापरवाही

हादसे की जांच कर रही छह सदस्यीय टीम के पांच सदस्यों ने माना है कि सिग्नल की अनदेखी करने साथ-साथ गति प्रतिबंध का उल्लंघन करने के मालगाड़ी के लोको पायलट को दोषी ठहराया है. जबकि एक सदस्य ने असहमति नोट देते हुए सुझाव किया है कि न्यू जलपाईगुड़ी रेल डिवीजन का परिचालन विभाग रानीपत्रा (RNI) और छत्तर हट जंक्शन (CAT) के बीच रूट की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहा है. 

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अधिकारियों का मानना है कि मालगाड़ी द्वारा कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मारने की घटना मालगाड़ी चालक दल (लोको पायलट, को-लोको पायलट और गार्ड) द्वारा ऑटोमेटिक सिग्नल की अनदेखी की और ट्रेन के गति ज्यादा होने की वजह से ये हादसा हुआ है.

यह भी पढ़ें: बंगाल रेल हादसा: सिलीगुड़ी में नहीं मनाई गई ईद, रेल हादसे के बाद ग्रामीणों ने लिया फैसला

वहीं, एक अधिकारी ने अपने असहमति नोट में एनजेपी डिवीजन के मुख्य लोको निरीक्षक (CLI) ने कहा कि 17 जून को सुबह 5:50 बजे से ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक सिग्नल काम नहीं कर रहा था. ऐसी स्थिति में पूरे सेक्शन को एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम में बदलना चाहिए था. रेलवे अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए ये बातें कहीं हैं.

हादसे से पहले क्या हुआ

हादसे से पहले हुए घटनाक्रम की जानकारी देते हुए जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कंचनजंगा एक्सप्रेस 17 जून को सुबह 8.27 बजे रानीपत्रा स्टेशन से दो प्राधिकार पत्रों 'T/A 912 और T369 (3B) के साथ रवाना हुई थी.

न्यू जलपाईगुड़ी के एक रेलवे सूत्र ने पीटीआई को बताया, टी/ए 912 ने ड्राइवर को सभी रेड सिग्नलों को पार करने की अनुमति दी और इसमें किसी भी गति का उल्लेख नहीं किया गया. दूसरी ओर, टी369 (3बी) में उल्लेख किया गया कि ड्राइवर आरएनआई स्टेशन छोड़ने के तुरंत बाद 15 किमी प्रति घंटे की गति से दो सिग्नलों को पार करेगा.

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जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 8:42 बजे रानीपत्रा स्टेशन से रवाना हुई मालगाड़ी के लिए भी यही दो प्राधिकार पत्र जारी किये गये थे. रिपोर्ट यह भी बताती है कि कंचनजंगा एक्सप्रेस खराब सिग्नलों में से एक पर इंतज़ार कर रही थी, जब मालगाड़ी ने उसे पीछे से टक्कर मार दी. जांच अधिकारियों ने बताया कि हादसे में यात्री ट्रेन के पांच डिब्बे और मालगाड़ी के ग्यारह डिब्बे प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें पैसेंजर ट्रेन के जनरल कोच में दो शव फंसे हुए मिले और कोच का हिस्सा काटकर उन्हें बाहर निकाला गया.

जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं है कि हादसे के वक्त मालगाड़ी कितनी स्पीड से चल रही थी. अब रेलवे सुरक्षा आयुक्त विस्तृत जांच कर रहे हैं. इस बीच ड्राइवरों के संघ ने 'बाहरी प्रभाव' का आरोप लगाते हुए प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया.

IRLRO ने रिपोर्ट पर उठाया सवाल

वहीं, इंडियन रेलवे लोको रनिंग मैन ऑर्गनाइजेशन (आईआरएलआरओ) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय पांधी ने कहना है कि यह रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण और गलत है. ऐसा लगता है कि जांच अधिकारियों को प्रभावित किया गया है. बोर्ड ने इस तथ्य को स्वीकार किए बिना ड्राइवर को दोषी ठहराया कि इस सेक्शन में सभी सिग्नल फेलियर थे. मालगाड़ी ड्राइवर का सामान्य गति से आगे बढ़ना सही था.

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पांधी ने कहा कि जांच टीम ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा कि मालगाड़ी के लिए एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया, जिसमें सेक्शन में केवल एक ट्रेन को अनुमति दी जानी चाहिए थी. आईआरएलआरओ का मानना है कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त की जांच से पूरे तथ्य सामने आ जाएंगे.

17 जून को हुआ हादसा

आपको बता दें कि 17 जून को न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से 30 किमी दूर रंगपानी स्टेशन के पास सुबह 8.55 बजे मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मारी दी थी. टक्कर की वजह से कंचनजंगा एक्सप्रेस के चार डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस हादसे में 10 मौतों की मौत हो गई हो 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

दुर्घटना के तुरंत बाद, रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा ने कहा कि टक्कर इसलिए हुई क्योंकि मालगाड़ी ने सिग्नल की अनदेखी की. रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है.

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