ईरान की पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. वैश्विक स्तर पर लगातार बदल रहे घटनाक्रमों के बीच एक और मामले ने तूल पकड़ लिया है. ईरान के इस हमले को लेकर पाकिस्तान भड़का हुआ है. लेकिन अब इस पूरे मामले पर ईरान की प्रतिक्रिया आई है.
ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन ने कहा कि हमने पाकिस्तान के भीतर आतंकी संगठन पर हमला किया. इसका गाजा से कोई लेना-देना नहीं है. हम हमास को आतंकी संगठन नहीं चाहते. हमास फिलिस्तीन की आजादी के लिए एक प्रतिरोधी समूह है.
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमि फोरस से इतर इस मामले पर सवाल किया गया था. उन्होंने कहा कि ईरान ने किसी पाकिस्तानी नागरिक को निशाना नहीं बनाया. हमने सिर्फ जैश अल-अदल के ठिकानों पर ही हमला किया था.
पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए किया हमला
ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि हमारे मिसाइल और ड्रोन हमले से पाकिस्तान में किसी भी नागरिक को निशाना नहीं बनाया गया. पाकिस्तान में जैश अल-अद्ल नाम का एक ईरानी आतंकी संगठन है. इन आतंकियों ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में पनाह ली है.
उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान में कई अधिकारियों से बात की है. इन आतंकियों ने ईरान में हमारे खिलाफ कुछ ऑपरेशन किए. हमारे सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया. हमने उसी के अनुरूप इन पर कार्रवाई की है. हमने पाकिस्तान की जमीं पर सिर्फ ईरान के आतंकियों पर हमला किया है.
उन्होंने कहा कि मैंने पाकिस्तान के हमारे विदेश मंत्री से बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि हम पाकिस्तान का सम्मान करते हैं, उनकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हैं. लेकिन हम हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते. हमारी कुछ आपत्तियां थीं. हमने जो भी किया, वह पाकिस्तान और इराक की सुरक्षा के मद्देनजर ही किया.
नरसंहार पर मूकदर्शक नहीं बन सकते
ईरान एक तरह से इराक और पाकिस्तान की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा के तौर पर देखता है. अमेरिका ने गाजा में नरसंहार का समर्थन कर भारी गलती की है. गाजा में एक तरह से नस्लीय नरसंहार हो रहा है. ईरान दुनिया में कहीं भी महिलाओं और बच्चों के कत्लेआम पर चुप्पी नहीं साध सकता.
ईरान के हमले पर पाकिस्तान के बैकफायर कदम
बलूचिस्तान में जैश अल-अद्ल के ठिकानों पर ईरान के हमलों से पाकिस्तान खफा है. यही वजह है कि पाकिस्तान ने ईरान में अपने राजनयिक को वापस बुला लिया है. साथ ही पाकिस्तान में ईरान के राजनयिक पर भी गाज गिराई है. साथ ही कई हाईप्रोफाइल दौरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.
600 आतंकियों का संगठन है जैश अल अदल
जैश-अल-अद्ल यानी कि "न्याय की सेना" 2012 में स्थापित एक सुन्नी आतंकवादी समूह है जो बड़े पैमाने पर पाकिस्तान में ऑपरेट होता है. पाकिस्तान के बलूचिस्तान से ऑपरेट करना वाला ये आतंकी संगठन ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर काफी एक्टिव है. यही वजह है कि ये संगठन दोनों ही सरकारों के लिए सिरदर्द बना हुआ है.
अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संगठन को आतंकी घोषित किया हुआ है. इस सुन्नी संगठन में 500 से 600 आतंकी हैं. ईरान के मंत्री अहमद वाहिदी के अनुसार, पिछले महीने, दक्षिणपूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान के एक पुलिस स्टेशन पर रात को हुए हमले में कम से कम 11 ईरानी पुलिस अधिकारी मारे गए थे. ईरान ने इस घटना के लिए जैश-अल-अद्ल को दोषी ठहराया था.
अमेरिका के डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (डीएनआई) के मुताबिक, जैश अल अद्ल ने 2013 से ईरान की सीमावर्ती पुलिस और सेना पर लगातार कई हमले किए हैं. ये संगठन सरकारी अधिकारियों और नागरिकों की हत्या, अपहरण, हिट एंड रन और रेड जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है.
इस संगठन ने 2013 में पहली बार तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब उसने ईरान के 14 सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी. इसके बाद ईऱान सरकार ने कुछ बलोच कैदियों के लिए फांसी की सजा का ऐलान किया था. इस हमले के अगले ही दिन ईरान ने कई कैदियों को फांसी की सजा दे भी दी थी.