Is EVM Hacking Possible: चुनाव के नतीजों से पहले एक बार फिर से EVM का मामला गर्मा गया है और मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगने लगे हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है. अखिलेश ने आरोप लगाया कि वाराणसी में EVM से लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई हैं, दो गाड़ियां निकल गईं, लेकिन तीसरी को सपा के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया.
इसके बाद सपा ने काउंटिंग सेंटर में जैमर लगाने की मांग भी की है. वहीं, चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा कि गाड़ियों से जो EVM मिली हैं, वो ट्रेनिंग के मकसद से ले जाई जा रही थीं और उनका चुनाव में इस्तेमाल नहीं हुआ है.
पिछले कुछ सालों से चुनावों से पहले और नतीजों के बाद EVM पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. हारने वाली पार्टी EVM हैकिंग का दावा करती है. हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित है और इसे हैक नहीं किया जा सकता.
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क्यों हैक नहीं की जा सकती EVM?
- EVM हैकिंग और छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी. ये कमेटी चुनाव आयोग ने बनाई थी. इस कमेटी ने मई 2019 में अपनी रिपोर्ट दी थी. इस रिपोर्ट में EVM की हैकिंग या उससे छेड़छाड़ क्यों नहीं हो सकती, इसके दो तर्क दिए गए थे-
पहला तर्क : चुनाव आयोग जिस EVM का इस्तेमाल करता है, वो स्टैंड अलोन मशीनें होती हैं. उसे न तो किसी कम्प्यूटर से कंट्रोल किया जाता है और न ही इंटरनेट या किसी नेटवर्क से कनेक्ट किया जाता है, ऐसे में उसे हैक करना नामुमकिन है. इसके अलावा EVM में जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है, उसे रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा मंत्रालय से जुड़ी सरकारी कंपनियों के इंजीनियर बनाते हैं. इस सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को किसी से भी साझा नहीं किया जाता है.
दूसरा तर्क : भारत में इस्तेमाल होने EVM मशीन में दो यूनिट होती है. एक कंट्रोलिंग यूनिट (CU) और दूसरी बैलेटिंग यूनिट (BU). ये दोनों अलग-अलग यूनिट होती हैं और इन्हें चुनावों के दौरान अलग-अलग ही बांटा जाता है. अगर किसी भी एक यूनिट के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो मशीन काम नहीं करेगी. इसलिए कमेटी का कहना था कि EVM से छेड़छाड़ करना या हैक करने की गुंजाइश न के बराबर है.
जिसने मशीन बनाई, क्या वो नहीं कर सकता छेड़छाड़?
- भारत में इस्तेमाल होने वाली EVM को दो सरकारी कंपनियां बनाती हैं. पहली कंपनी है बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और दूसरी है हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड.
- चुनाव आयोग ने 2017 में एक FAQ जारी किया था. इसमें बताया था कि EVM पहले राज्य और फिर वहां से जिलों में जाती है. मैनुफैक्चरर्स को नहीं पता होता कि कौन सी मशीन कहां जाएगी, इसलिए नहीं पता होता कि उम्मीदवार कौन होगा. इसलिए छेड़छाड़ नहीं हो सकती.
- इसके अलावा हर EVM का एक अलग सीरियल नंबर होता है. चुनाव आयोग एक ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है, जिससे पता चलता है कि कौन सी मशीन कहां है, तो उससे छेड़छाड़ करना संभव नहीं है.
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क्या चिप के जरिए हो सकती है छेड़छाड़?
- EVM की CU में एक माइक्रो चिप लगी होती है. इसी चिप में उम्मीदवार का डेटा रहता है. कई बार ऐसे सवाल उठाए जाते हैं कि इस माइक्रो चिप में मालवेयर के जरिए छेड़छाड़ की जा सकती है. हालांकि, चुनाव आयोग इस बात को खारिज करता है.
- चुनाव आयोग के मुताबिक, एक वोटर एक बार में एक ही बटन दबा सकता है. एक बार बटन दबाने के बाद मशीन बंद हो जाती है और फिर वोटर चाहकर भी दूसरा बटन नहीं दबा सकता. इसलिए चिप के जरिए कोई छेड़छाड़ करना संभव नहीं है.
जब EVM हैकिंग का किया गया दावा?
- मई 2010 में अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था और दावा किया था कि मोबाइल से मैसेज भेजकर नतीजों को बदला जा सकता है.
- मई 2017 में आम आदमी पार्टी के विधायक ने दिल्ली विधानसभा में EVM को से छेड़छाड़ किए जाने का डेमो दिया था. हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे खारिज कर दिया था और कहा था कि ये वो EVM नहीं है, जिसका इस्तेमाल होता है.