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क्या लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के हाथ में होगी राहुल गांधी की संसद में वापसी?

लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका को जानने के लिए हमें लक्षद्वीप का एक मामला समझना पड़ेगा. दरअसल, लक्षद्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल को एक मामले में हाल ही में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई थी. इसके बाद उनकी सदस्यता खत्म हो गई. मोहम्मद फैजल की याचिका पर केरल हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी. हाईकोर्ट के फैसले के बाद उपचुनाव भी रद्द कर दिया गया. लेकिन इसके बाद भी अभी मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल नहीं हुई है.

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राहुल गांधी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (फाइल फोटो)
राहुल गांधी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (फाइल फोटो)

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म हो गई. वे केरल के वायनाड से सांसद थे. हालांकि, राहुल को अपनी सदस्यता को बचाए रखने के सारे रास्ते बंद नहीं हुए हैं. वे अपनी राहत के लिए हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं. अगर हाईकोर्ट सूरत सेशन कोर्ट के फैसले पर स्टे लगा देता है, तो राहुल की सदस्यता बच सकती है. हालांकि, इसके बाद भी उनकी संसद में वापसी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के हाथ में होगी. आईए समझते हैं कि आखिर कैसे इस पूरे मामले में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका अहम होने वाली है.

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लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका को जानने के लिए हमें लक्षद्वीप का एक मामला समझना पड़ेगा. दरअसल, लक्षद्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल को एक मामले में जनवरी में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई थी. इसके बाद उनकी सदस्यता खत्म हो गई. इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव का भी ऐलान कर दिया.
 
उधर, मोहम्मद फैजल ने निचली अदालत के फैसले को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी. हाईकोर्ट के फैसले के बाद उपचुनाव भी रद्द कर दिया गया. लेकिन इसके बाद भी अभी मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल नहीं हुई है. उनकी सदस्यता पर अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष को लेना है.यानी अगर राहुल गांधी को ऊपरी अदालत से राहत मिल भी जाती है, तब भी आखिरी फैसला लोकसभा अध्यक्ष को ही लेना होगा.

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राहुल के 4 साल पुराने बयान पर फैसला

राहुल गांधी ने 2019 में 'मोदी सरनेम' को लेकर बयान दिया था. इस मामले में सूरत की सेशन कोर्ट ने चार साल बाद गुरुवार को राहुल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई. कोर्ट की सजा के बाद लोकसभा सचिवालय ने जनप्रतिनिधि कानून के तहत राहुल की लोकसभा सदस्यता को रद्द कर दिया. दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून में प्रावधान है कि अगर किसी सांसद और विधायक को किसी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है. इतना ही नहीं सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी हो जाते हैं.

राहुल के पास क्या क्या विकल्प?

राहुल को अपनी सदस्यता को बचाए रखने के सारे रास्ते बंद नहीं हुए हैं. वे अपनी राहत के लिए हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं, जहां अगर सूरत सेशन कोर्ट के फैसले पर स्टे लग जाता है तो सदस्यता बच सकती है. हाईकोर्ट अगर स्टे नहीं देता है तो फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से अगर स्टे मिल जाता है तो भी उनकी सदस्यता बच सकती है. लेकिन अगर ऊपरी अदालत से उन्हें राहत नहीं मिलती तो राहुल गांधी 8 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.

 

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