इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड खोरासान (ISIL-K) ने अफगानिस्तान में भारत-चीन और ईरान के दूतावास पर आतंकी हमले की धमकी दी है. यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक, IS ने तालिबान से संयुक्त राष्ट्र के इन सदस्य देशों से रिश्तों को खत्म करने की भी मांग की है.
संयुक्त राष्ट्र की ISIL द्वारा उत्पन्न खतरों रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड लेवांत-खोरासन की गतिविधियां मध्य और दक्षिण एशिया में आतंकवादी खतरा बनी हुई हैं. इतना ही नहीं आतंकी समूह ने अपनी गतिविधियों को और फैलाने की इच्छा को जारी रखा है.
समाचार एजेंसी के मुताबिक, UN सिक्योरिटी काउंसिल में गुरुवार को 'आतंकवादियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे' पर बैठक आयोजित की जाएगी. इस दौरान यूएन काउंटर टेररिज्म के महासचिव व्लादिमीर वोरोन्कोव पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट पेश करेंगे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ISIL-K ने खुद को तालिबान के प्राथमिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित किया और अब वह यह दिखाना चाहता है कि तालिबान अफगानिस्तान में सुरक्षा प्रदान करने में असफल है. ऐसे में राजनयिक मिशन को टारगेट करके आईएस तालिबान से अन्य देशों के रिश्तों को भी खत्म कराना चाहता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, IS ने अफगानिस्तान में चीन, भारत और ईरान के दूतावास पर आतंकी हमले करने की धमकी दी है. पिछले साल जून में भारत ने अफगानिस्तान से राजनयिक रिश्ते 10 महीने बाद बहाल किए थे. तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को काबुल पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद भारत ने राजनयिक रिश्ते खत्म कर दिए थे.
UN की रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2021 में काबुल में रूसी दूतावास पर हुआ हमला अफगानिस्तान में राजनयिक उपस्थिति के खिलाफ पहला हमला था. इसके बाद दिसंबर में ISIL-K ने दावा किया था कि उसने पाकिस्तान के दूतावास और चीनी नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक होटल पर हमला किया.
यूएन का दावा है कि ISIL-K के पास 1000-3000 लड़ाके हैं. इनमें से करीब 200 सेंट्रल एशिया में हैं. हालांकि, कुछ देशों का मानना है कि यह संख्या 6000 तक है. इतना ही नहीं ISIL-K वॉयस ऑफ खोरासन के द्वारा पश्तो, फारसी, ताजिक, उज़्बेक और रूसी भाषाओं में प्रोपेगेंडा करता है, ताकि स्थानीय युवाओं को इसमें भर्ती किया जा सके.