इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय नागरिकों के मामलों में से एक केस की सुनवाई की. ये केस भारतीय उच्चायोग की ओर से दायर एक याचिका से संबंधित है, जिसमें उन भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाया गया है जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उसकी राष्ट्रीयता की पहचान हो चुकी है, फिर भी वे पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं और उन्हें छोड़ा नहीं गया है.
ये केस कुलभूषण जाधव से संबंधित नहीं था. लेकिन एक और निराशा भरा कदम उठाते हुए पाकिस्तान इस केस को भी जाधव मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहा है. इंडिया टुडे को जानकारी मिली है कि पाकिस्तान इस भारतीय नागरिक के केस को कुलभूषण जाधव केस से जोड़ने और अन्य सभी मामलों को जाधव केस की सुनवाई से जोड़ने की कोशिश कर रहा है.
यह पाकिस्तान की एक और चाल है जिसके जरिये पाकिस्तान भारतीय मिशन को सुनवाई के दौरान उपस्थित होने और कार्यवाही में शामिल करने का प्रयास कर रहा है.
इसके पहले भारत ने ये स्पष्ट कर दिया था कि जब तक पाकिस्तान जाधव केस से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता और क्वींस काउंसिल को जाधव का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं देता है, तब तक भारतीय पक्ष पाकिस्तानी अदालत में किसी भी समीक्षा याचिका की सुनवाई में हिस्सा नहीं लेगा.
गौरतलब है कि भारत ने कुलभूषण जाधव के लिए क्वींस काउंसिल को दलीलें देने की अनुमति देने की मांग की थी. क्वींस काउंसल ब्रिटेन की महारानी का प्रतिनिधित्व करने वाला अधिवक्ता होता है.
कुलभूषण जाधव केस के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने 19 नंवबर को कहा था कि पाकिस्तान एक ऐसा वातावरण प्रदान करने में विफल रहा है जिसमें जाधव के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गंभीरता से और प्रभावी ढंग से चुनौती दी जा सके.
श्रीवास्तव ने कहा, 'हमने पाकिस्तान से जाधव के लिए क्वींस काउंसिल की अनुमति देने के लिए कहा था. इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने जुलाई 2019 में कुलभूषण जाधव पर आदेश दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज अब तक हमें उपलब्ध नहीं कराए हैं. ' उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के आदेश को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए.
देखें: आजतक LIVE TV
मंगलवार को जिस मामले की सुनवाई हुई, वह एक अन्य भारतीय नागरिक से संबंधित था, लेकिन जब भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील बैरिस्टर शाह नवाज नोन अदालत में पेश हुए तो पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान ने जाधव मामले से संबंधित लीगल काउंसिल का डिटेल पूछना शुरू कर दिया.
भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि उनके पास न जाधव के मामले पर चर्चा करने के लिए न तो विस्तृत ब्योरा है न ही इसकी अनुमति है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केस उन कैदियों की रिहाई से संबंधित है जो पाकिस्तान की जेलों में अपनी सजा पूरी कर चुके हैं.
इसके बाद भारतीय पक्ष के वकील को सूचित किया गया कि पाकिस्तानी अधिकारियों की कथित जांच में सामने आया है कि आज जिस भारतीय नागरिक के केस की सुनवाई है, उससे कुलभूषण जाधव के संबंध उजागर हुए हैं.
पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, इस्लामाबाद हाईकोर्ट की एक बड़ी बेंच ने मंगलवार को कुलभूषण जाधव के लिए एक कानूनी प्रतिनिधि की नियुक्ति के लिए सरकार की याचिका पर फिर से सुनवाई शुरू कर दी थी. जाधव की मौत की सजा के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने के लिए एक वकील की नियुक्ति की जानी है. इस मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी गई है.
ये भी पढ़ें-