इजरायली कंपनी NSO के पेगासस (Pegasus) सॉफ्टवेयर के जरिए फोन टेपिंग (Phone Tapping) का मामला बढ़ता ही जा रहा है. इस पूरे जासूसी कांड का खुलासा करने वाली वेबसाइट द वायर ने फोन टैपिंग को लेकर नया दावा किया है. वायर ने नई रिपोर्ट में दावा किया है कि महाराष्ट्र में जब देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadavis) की सरकार थी, तब कई बीज कंपनियों के अधिकारियों का फोन Pegasus के जरिए टेप किया गया था.
रिपोर्ट में दावा किया है कि 2018 में जब महाराष्ट्र में बीजेपी (BJP) की सरकार थी, तब सरकार ने अनएप्रूव्ड हर्बिसाइड-टोलरेंट (HT) ट्रांसजैनिक कॉटन या बीटी कॉटन बीज की बिक्री की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया था. उस वक्त सरकार ने कई बीज कंपनियों पर ऐसे बीज महाराष्ट्र, गुजरातस तेलंगाना और कर्नाटक में बेचने का आरोप लगाया था. उस समय SIT के रडार पर महायको मोंसेन्टो बायोटेक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, मोंसेन्टो होल्डिंग्स और मोंसेन्टो इंडिया लिमिटेड थी.
SIT के गठन से कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने ऐसे बीज की जांच के लिए डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के अंडर में फील्ड इंस्पेक्शन एंड साइंटिफिक इवैल्युएशन कमेटी (FISEC) का गठन किया था.
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वायर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 2018 में जब दोनों जांच चल रही थी तब पेगासस की मदद से मोंसेन्टो बायोटेक और मोंसेन्टो इंडिया के 6 अधिकारियों के फोन टेप किए गए. दावा ये भी है कि FISEC के वैज्ञानिक को भी टारगेट किया गया.
बीजेपी सरकार और उससे जुड़े संगठन ऐसे बीजे के उत्पादन और बिक्री के खिलाफ रहे हैं. लेकिन अवैध होने के बावजूद ये बीज आसानी से उपलब्ध हैं. उस वक्त मोंसेन्टो के एक अधिकारी, जो लगातार इस मामले को लेकर सरकार के संपर्क में थे, उनका फोन नंबर NSO के डेटाबेस में मिला है. वहीं, FISEC के वैज्ञानिक का कहना है कि उनकी निगरानी क्यों की गई, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता.
PMO को सौंपी गई रिपोर्ट में मोंसेन्टो को क्लीन चिट दे दी गई है. FISEC ने अपनी जांच में पाया है कि मोंसेन्टो ने जानबूझकर बीज नहीं बेचे हैं. हालांकि, अभी पूरी रिपोर्ट आनी बाकी है. FISEC का अनुमान है कि जिन राज्यों में कपास की खेती होती है, वहां 15% से ज्यादा कपास HTBT किस्म के बीज से ही उगाया जाता है. एक्सपर्ट का मानना है कि HTBT किस्म के 50 लाख से ज्यादा पैकेट चलन में हो सकते हैं.