जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने रविवार को कक्षाएं निलंबित कर दीं और लाइब्रेरी व कैंटीन भी बंद करने का नोटिस जारी कर दिया. ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया गया. इसको लेकर वामपंथी समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने विवि प्रशासन पर हमला बोला है.
आइसा का आरोप है कि 2019 के सीएए विरोधी प्रदर्शनों और परिसर में पुलिस बर्बरता को लेकर एक स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. लेकिन कैम्पस में छात्र न पहुंचे इसलिए विवि प्रशासन की तरफ से रविवार की कक्षाएं निलंबित कर दी गईं. साथ ही लाइब्रेरी को भी बंद कर दिया गया था.
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दिल्ली पुलिस वापस जाओ के नारे का वीडियो वायरल
इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. जिसमें छात्रों को परिसर के बाहर पुलिस कर्मियों की भारी तैनाती का विरोध करने के लिए "दिल्ली पुलिस वापस जाओ" जैसे नारे लगाते हुए दिखाया गया. छात्रों ने दावा किया कि परिसर में प्रवेश और निकास प्रतिबंधित था, अंदर रहने वालों को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और अन्य को प्रवेश करने से रोक दिया गया था.
प्रशासन ने शनिवार देर रात तीन सर्कुलर जारी किए थे. जिसमें कहा गया कि मेंटेनेंस एक्टिविटी के कारण दोपहर 1 बजे से कक्षाएं, कैंटीन और लाइब्रेरी बंद रहेंगी. छात्रों के एक वर्ग ने नोटिस के समय पर सवाल उठाए. छात्रों ने कहा कि विवि प्रशासन की तरफ से परीक्षाओं के नजदीक आने पर इस तरह का नोटिस जारी करना कहीं से समझ नहीं आया. विवि प्रशासन की तरफ से शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाने का प्रयास किया गया.
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आइसा के एक बयान में प्रशासन और पुलिस की आलोचना की गई.
बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर को पूरी तरह से बंद कर दिया है और इलाके के आसपास किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए अंदर और बाहर पुलिस तैनात कर दी है. 15 दिसंबर 2019 को दिल्ली पुलिस ने कैंपस में घुसकर हमारे दोस्तों को घायल कर दिया था. इस दौरान हमारे परिसर में तोड़फोड़ की गई थी और हमारे साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया था.
आरोपों पर विवि प्रशासन की नहीं आई प्रतिक्रिया
आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई प्रक्रिया नहीं आई है. आपको बता दें कि 15 दिसंबर, 2019 को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस जामिया परिसर में घुस गई थी. इस दौरान छात्रों से मारपीट की गई थी. इसको लेकर पूरे देश में छात्रों ने विरोध जताया था.