संसद के विशेष सत्र के बीच गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया. इस बीच समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की कुर्सी पर चुटकी ली.
उन्होंने सभापति जगदीप धनखड़ से सदन की भव्यता की ओर इशारा करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि इस 7 स्टार होटल में सबसे अच्छी चीज आपकी कुर्सी है, जो झूले की तरह आगे-पीछे होती रहती है. दरअसल महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान सभापति धनखड़ ने कई महिला सांसदों को अपने आसन पर बैठने का मौका दिया था. इसी क्रम में जया बच्चन भी कुछ देर के लिए सभापति की कुर्सी पर बैठी थीं.
जया बच्चन ने कहा कि मैं सबसे पहले आपका (सभापति) धन्यवाद करना चाहती हूं कि आपने मुझे अपनी उस कुर्सी पर बैठने का मौका दिया. आपकी कुर्सी बड़ी मजेदार है. वहां बैठो तो वह झूले की तरह आगे-पीछे होती रहती है. तभी मुझे समझ आया कि क्यों आप बार-बार आकर उस कुर्सी पर लंबे समय तक बैठते हैं.
उन्होंने कहा कि आखिर में बोलने के नुकसान बहुत हैं. कुछ बोलने को बचा ही नहीं. इस पर जगदीप धनखड़ ने शायराना अंदाज में कहा कि इतने हिस्से में बंट गया हूं मैं कि मेरे हिस्से कुछ बचा ही नहीं. इस पर जया के साथ पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा.
बता दें कि महिला आरक्षण बिल दो दिन की चर्चा के बुधवार शाम को लोकसभा में पास हो गया था. नई संसद में पर्ची के जरिए हुए मतदान में बिल के पक्ष में 454 वोट पड़े तो वहीं दो वोट विरोध में भी डाले गए. इससे पहले सदन में राहुल गांधी और अमित शाह एक-दूसरे पर निशाना साधते नजर आए थे.
लोकसभा और राज्यसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले नारी-शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा में ज्यादातर दलों का समर्थन मिला है. सदन में पहले दिन हुई चर्चा में विपक्षी दलों ने विधेयक में OBC महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करने और बिना परिसीमन के ही कानून लागू करने की मांग की. कांग्रेस पार्टी ने विधेयक को राजीव गांधी का सपना बताया तो TMC ने ममता बनर्जी को इस विधेयक की जननी करार दिया. सभी विपक्षी दलों ने विधेयक का स्वागत भी किया था.
अभी लोकसभा में कितने फीसदी महिला सांसद?
लोकसभा में जहां 14 फीसदी सांसद हैं, वो संख्या बढ़कर अब 33 फीसदी होगी. देश के किसी भी राज्य में अभी 15 फीसदी से ज्यादा विधायक नहीं हैं, लेकिन बिल के कानून बनने के बाद अब ये संख्या 33 फीसदी होगी. देश की 18 विधानसभा में जहां 10 फीसदी से कम महिला विधायक हैं, वहां अब महिलाओं की संख्या कुल सीट में एक तिहाई तक पहुंचेगी.