scorecardresearch
 

वक्फ बिल पर साथ देकर घिरे नीतीश? JDU नेताओं के इस्तीफे जारी, इमाम कासमी बोले- अब मुस्लिम देखेंगे इन्हें

वक्फ संशोधन विधेयक पर जेडीयू के रुख पर सबसे पहले जेडीयू के वरिष्ठ मुस्लिम नेता डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी से इस्तीफा दिया. इसके बाद पार्टी नेता मो. नवाज मलिक ने भी पार्टी छोड़ दी. नवाज मलिक जेडीयू अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश सचिव हैं. दोनों नेताओं का कहना है कि वह पार्टी द्वारा वक्फ बिल को समर्थन दिए जाने से नाराज हैं. 

Advertisement
X
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित हो गया है. जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने वक्फ बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया. इससे पार्टी के भीतर घमासान मचा हुआ है. इस बिल को समर्थन देने से नाराज कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. 

Advertisement

इस मुद्दे पर सबसे पहले जेडीयू के वरिष्ठ मुस्लिम नेता डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी से इस्तीफा दिया. इसके बाद पार्टी नेता मो. नवाज मलिक ने भी पार्टी छोड़ दी. नवाज मलिक जेडीयू अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश सचिव हैं. दोनों नेताओं का कहना है कि वह पार्टी द्वारा वक्फ बिल को समर्थन दिए जाने से नाराज हैं. 

वक्फ पर जेडीयू के स्टैंड को लेकर पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव मोहम्मद तबरेज़ सिद्दीकी अलीग ने भी इस्तीफा नीतीश कुमार को भेज दिया है. ऐसे में इमारत-ए-शरिया के नाजिम मुफ्ती मोहम्मद सैयदुर रहमान कासमी ने वक्फ बिल पर जेडीयू के रुख को लेकर कहा कि हम इस बिल के खिलाफ है. ये बिल शरीयत के खिलाफ है. इससे हमारी जमीनों को लोग हड़प लेंगे. अगर नीतीश कुमार वक्फ बिल के खिलाफ हैं तो हम नीतीश कुमार के खिलाफ हैं. अब मुसलमान तय करेंगे कि इसके खिलाफ आगे क्या किया जाए.

Advertisement

बता दें कि नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू ने डटकर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों के दबाव के बावजूद सरकार का साथ दिया है. कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की दलील तक को नीतीश कुमार की पार्टी ने खारिज किया. अब पार्टी के मुस्लिम नेता ही नहीं, मुस्लिम धर्मगुरु भी जेडीयू को धोखेबाज कहकर सबक सिखाने की बात कर रहे हैं. नीतीश कुमार जो धर्मनिरपेक्षता की दलील देकर 2014 में मोदी के दिल्ली पहुंचने से पहले NDA से अलग हुए. जो हिंदू राष्ट्र की बात पर संविधान की दलील देते रहे. उन नीतीश कुमार की पार्टी ने खुलकर साथ वक्फ संशोधन बिल पर संसद में सरकार का दिया.

बिहार चुनाव में हो सकता है बैकफायर?

अब सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार का वक्फ बिल के समर्थन में पार्टी को खड़ा करना बैकफायर बिहार चुनाव में मुस्लिम वोट पर कर सकता है? मुस्लिमों के हित और विरोध का कठघरा खड़ा करके जब नीतीश कुमार की पार्टी को विरोधी दल और मुस्लिम संगठन घेर रहे हैं, तब संसद में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ने बड़ा बयान दिया है. संजय झा ने कहा है कि मुस्लिमों के लिए जो जेडीयू ने किया वो ना तो कांग्रेस कर पाई, ना आरजेडी. संजय झा ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा कि बिल पास होने से गरीब मुस्लिमों का फायदा होगा और पसमांदा वोटर जेडीयू के साथ रहेगा.

Advertisement

बता दें कि नीतीश कुमार वो नेता हैं जो सियासत में बदलता मौसम सबसे पहले भांपकर खुद पलटते रहे हैं. तो क्या बिहार के मुख्यमंत्री वक्फ बिल पर उस नुकसान को नहीं समझ पाए होंगे, जो विपक्ष जता रहा है. या फिर विपक्ष जिस मुस्लिम वोट के घाटे की बात जेडीयू के लिए कर रहा है, उसके नुकसान का पैमाना आंककर ही नीतीश कुमार ने समर्थन दिया है? या फिर एनडीए के साथ अब हमेशा जुड़कर सियासत की बात करने वाले नीतीश कुमार मान चुके हैं कि मुस्लिम वोट का फर्क नहीं पड़ेगा. इस सियासत को समझना है तो पहले नीतीश के मुस्लिम वोट का गणित जानना होगा. जो कहता है कि 2009 से 2015 के बीच तक मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा नीतीश कुमार के गठबंधन को चुनाव में मिलता आया है.

Live TV

Advertisement
Advertisement