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झारखंड: बीजेपी और आजसू दफ्तर की जमीन का आवंटन होगा रद्द, आवास बोर्ड ने की सिफारिश

झारखंड आवास बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड ने इसके पहले भी हरमू, अरगोड़ा और बरियातु आवासीय कॉलोनी में मकान, फ्लैट का व्यवसायिक, अवैध इस्तेमाल करने वालों को नोटिस दे चुकी है. बीजेपी और आजसू को भी नोटिस भेजा गया था.

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झारखंड बीजेपी और आजसू
झारखंड बीजेपी और आजसू

झारखंड (Jharkhand) में भारतीय जनता पार्टी दफ्तर और उसके सहयोगी दल आजसू के मुख्य कार्यालय जिस प्लॉट पर स्थित है, राज्य आवास बोर्ड के निदेशक मंडल ने उनके आवंटन को रद्द करने की सिफारिश की है. कुल 50 भूखंड के आवंटन को रद्द किया जायेगा. ये फैसला झारखंड राज्य आवास बोर्ड के निर्देश मंडल ने बोर्ड मीटिंग में लिया गया. 

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आवास बोर्ड के अध्यक्ष संजय लाल पासवान ने आजतक से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि बोर्ड ने इसके पहले भी हरमू, अरगोड़ा और बरियातु आवासीय कॉलोनी में मकान, फ्लैट का व्यवसायिक, अवैध इस्तेमाल करने वालों को नोटिस दे चुकी है. बीजेपी और आजसू को भी नोटिस भेजा गया था. 

'पार्टी के नाम पर नहीं है प्लॉट'

आवास बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि बीजेपी का प्रदेश दफ्तर जिस प्लॉट पर है, उसका आवंटन रवि शेखर प्रसाद के नाम पर है लेकिन उस घर का इस्तेमाल पार्टी ऑफिस के लिए किया जा रहा है. ठीक उसी तरह जहां आजसू का दफ्तर है, वो जमीन सुदेश महतो पार्टी सुप्रीमो के नाम पर है. ऐसे में कुल 294 आवंटन की सूची है लेकिन पहले चरण में 50 पर कार्रवाई की जा रही है.

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यह भी पढ़ें: 'संथाल परगना में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान की जाए...', झारखंड सरकार को HC का निर्देश

संजय लाल पासवान बताते हैं, "बोर्ड मीटिंग में झारखंड की दो बेटियां, जिन्होंने ओलंपिक तक में उम्दा हॉकी खेलकर राज्य का नाम रोशन किया उन्हें सम्मानित किया जा रहा है. निक्की प्रधान और सलीमा टेटे को 3750 स्क्वायर फीट का भूखंड देने का प्रस्ताव भी बोर्ड ने पास किया है. दोनो खिलाड़ियों को 3750 स्क्वायर फीट का प्लॉट बोर्ड के तरफ से फ्री में दिया जाएगा."

जब बीजेपी के विधायकों के सदन से किया गया निलंबित

झारखंड के अठारह बीजेपी विधायकों को सदन छोड़ने से इनकार करने पर 2 अगस्त दोपहर 2 बजे तक विधानसभा से निलंबित कर दिया गया था और मार्शलों द्वारा हटा दिया गया. विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने बीजेपी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की थी. बीजेपी विधायकों पर आरोप था कि उन्होंने एक दिन पहले विपक्षी विधायकों को मार्शलों द्वारा बाहर निकाले जाने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा उनके सवालों का उत्तर देने से इनकार करने के विरोध में सदन में हंगामा किया था.

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