बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने गुरुवार को गया लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है. गया से मांझी पहले भी तीन बार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. इस बार भी मांझी के लिए राह आसान नहीं होगी क्योंकि उनका मुकाबला आरजेडी उम्मीदवार और लोकल बॉय कुमार सर्वजीत से है. कुमार सर्वजीत महागठबंधन की पिछली सरकार में मंत्री रहे हैं और बोधगया सीट से विधायक हैं.
बिहार में पहले चरण की जिन चार लोकसभा सीटों पर चुनाव होना है, उनमें गया सीट सबसे खास मानी जा रही है. गया सीट जीतनराम मांझी के लिए अग्निपरीक्षा की तरह होगी. इस सीट से मांझी के चुनावी मैदान में उतरने की सबसे बड़ी वजह ये है की यहां से पिछले दो चुनावों में एनडीए की जीत होती रही है.
हालांकि, जीतनराम मांझी का रिकॉर्ड इस सीट पर बेहद निराशाजनक रहा है. वह अब तक तीन बार गया से लोकसभा का चुनाव लड़े हैं और तीनों बार उनकी हार हुई है. राहत की बात ये है की मांझी पहली बार एनडीए के साथ गया सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी, जेडीयू, एलजेपीआर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का पूरा समर्थन उनके साथ है. लेकिन आरजेडी के साथ वामदलों और कांग्रेस की ताकत लिए कुमार सर्वजीत भी कड़ी चुनौती देने को तैयार हैं.
गया लोकसभा सीट से खास बात ये है की दशकों से जीतने वाले उम्मीदवार मांझी सरनेम के ही रहे हैं, कुमार सर्वजीत के सरनेम में मांझी नहीं है जो जीतन राम मांझी को सुकून दे रहा होगा.
जीतनराम मांझी ने गया से अपना पहला चुनाव 1991 में कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था और वो दूसरे नंबर पर रहे थे. 2014 में उन्होंने जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा लेकिन तीसरे नंबर पर रहे. हालांकि लोकसभा चुनाव लड़ने को बावजूद वे बिहार के मुख्यमंत्री बन गए थे क्योंकि नीतीश कुमार ने चुनाव में जेडीयू की हार के बाद मांझी को अपना उत्तराधिकारी चुना था. साल 2019 में मांझी की पार्टी महागठबंधन में शामिल हो गई और इस तरह एक बार फिर वे गया सीट पर दूसरे स्थान पर रह गए. पिछले चुनाव में जेडीयू के विजय कुमार मांझी ने उन्हें गया सीट पर पटखनी दी.
बता दें कि गया में पहले चरण के तहत 19 अप्रैल को मतदान होना है. पहला चरण मांझी के साथ-साथ उनकी पार्टी के लिहाज से भी बेहद खास है. लिटमस टेस्ट हम के विधायकों का भी होना है. पहले चरण की जिन चार लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें हम के सभी चार विधायकों के विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग होनी है. औरंगाबाद लोकसभा सीट के इमामगंज विधानसभा सीट से मांझी खुद विधायक हैं और औरंगाबाद में भी पहले चरण में वोटिंग है.