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कलकत्ता हाई कोर्ट के जज ने किया इस्तीफे का ऐलान, BJP के टिकट पर लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव

कलकत्ता हाई कोर्ट के एक जज जस्टिस अभिजीत गांगुली अपने पद से इस्तीफे देने वाले हैं. उनके लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही है. कहा जा रहा है कि वह तमलुक सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं.

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न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली
न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली

कलकत्ता हाई कोर्ट के जज जस्टिस अभिजीत गांगुली ने कहा कि वह 5 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. रविवार को उनका यह बयान तब आया जब अटकलें लगाई जा रही है कि वह बीजेपी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. बीजेपी की तरफ से उन्हें तमलुक सीट से टिकट मिलने की संभावना है.

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जस्टिस अभिजीत गांगुली ने कहा कि वह अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को भेजेंगे.

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जस्टिस गांगुली ने आगे कहा, "इन दिनों मैं कोई न्याय कार्य नहीं करूंगा, मैं बस अपने पास लिस्टेड मामलों को निपटा दूंगा." उन्होंने कहा कि इस्तीफे की वजह और आगे के कामों के बारे में मंगलवार को बात करेंगे. जस्टिस गांगुली ने उन अटकलों को खारिज किया है, जिसमें कहा जा रहा था कि वह इस्तीफा देने के बाद राजनीति में एंट्री करेंगे.

बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ने की अटकलें

पिछले कुछ समय से अटकलें लगाई जा रही थी कि जस्टिस अभिजीत गांगुली हाई कोर्ट से इस्तीफे के बाद बीजेपी की टिकट पर तमलुक लोकसभा सीट से मैदान में होंगे. यह सीट 2009 से 2016 तक बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी के पास थी, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ पार्टी जॉइन की थी.

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जस्टिस गांगुली को सीपीआई(एम) से भी ऑफर

बीजेपी की बंगाल इकाई के सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि पार्टी अभिजीत गांगुली को तमलुक से मैदान में उतारना चाहती है. सूत्रों ने कहा कि जस्टिस गांगुली को सीपीआई (एम) द्वारा भी अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए पेशकश किया जा रहा है. इस बीच, सुवेंदु अधिकारी द्वारा 7 मार्च को सरप्राइज देने का वादा करने के बाद गांगुली के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं.

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केस के बारे में जज ने की थी मीडिया से बात

जस्टिस अभिजीत गांगुली ने 2022 के अपने एक फैसले में सीबीआई को पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच करने का निर्देश दिया था. इसी मामले को लेकर उन्होंने एक मीडिया चैनल को इंटरव्यू दिया था, जिससे सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया था. इसके बाद से इस केस को चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने किसी अन्य जज को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था.

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