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जस्टिस गवई ने की संविधान की तारीफ, बोले-'मैं डॉ. बी आर अंबेडकर के कारण सुप्रीम कोर्ट का जज हूं'

जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि भारतीय संविधान का श्रेय डॉ. बीआर अंबेडकर को जाता है. यह केवल डॉ. बीआर अंबेडकर के कारण है कि मेरे जैसा व्यक्ति, जो एक झुग्गी-झोपड़ी इलाके में एक नगरपालिका स्कूल में पढ़ता था, इस पद तक पहुंच सका.

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फाइल फोटो
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जस्टिस बी आर गवई ने सोमवार को भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बी आर अंबेडकर की प्रशंसा की. गवई ने कहा कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोगों को अंबेडकर की वजह से पहचान मिली. जस्टिस गवई मई 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे और दलित समुदाय से इस पद तक पहुंचने वाले दूसरे न्यायाधीश होंगे.

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जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि भारतीय संविधान का श्रेय डॉ. बीआर अंबेडकर को जाता है. यह केवल डॉ. बीआर अंबेडकर के कारण है कि मेरे जैसा व्यक्ति, जो एक झुग्गी-झोपड़ी इलाके में एक नगरपालिका स्कूल में पढ़ता था, इस पद तक पहुंच सका. सुप्रीम कोर्ट में मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जस्टिस ए एस ओका ने कहा कि इस बात पर बहस होनी चाहिए कि क्या अनुच्छेद-32 को लागू करने के लिए एक टेस्ट किया जाना चाहिए.

जस्टिस ओका ने कहा कि कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 32 की सभी याचिकाओं को हाई कोर्ट में भेजे बिना उन पर विचार करना चाहिए. लेकिन हम एक आदर्श दुनिया में नहीं रह रहे हैं. अगर मामले लंबित नहीं होते तो दृश्य अलग होता. सुप्रीम कोर्ट में 80,000 मामले लंबित हैं. हम न केवल एक संवैधानिक अदालत हैं, बल्कि एक अपीलीय अदालत भी हैं. जब हमारे पास केस बढ़ जाता है तो हमें अपनी प्राथमिकताएं तय करने की जरूरत होती है.

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उन्होंने कहा, ऐसे कैदी हैं जो स्थायी छूट से वंचित हैं, ऐसे अभियुक्तों द्वारा अपील की गई है जो लंबे समय से जेल में हैं. लेकिन ऐसे व्यवसायी भी हैं जो वकीलों की एक बड़ी टीम के साथ आते हैं जो अदालत का समय बर्बाद करते हैं और अनुच्छेद 19(1)(जी) के बारे में बहस करते हैं. फिर हम आम दोषी और व्यवसायी के बीच समानता कैसे ला सकते हैं. जस्टिस ओका ने कहा कि हमें अपनी अदालत द्वारा मौलिक अधिकारों को लागू करने पर बहस करनी चाहिए और यह भी जानना चाहिए कि हम इसमें कहां तक सफल हो रहे हैं.

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