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हेट स्पीच मामले में कालीचरण को पुणे कोर्ट से मिली जमानत

भड़काऊ भाषण मामले में पुणे की अदालत ने कालीचरण महाराज (Kalicharan Maharaj) उर्फ ​​अभिजीत धनंजय सरग को ज़मानत दे दी है. पिछले महीने पुणे में कालीचरण ने भड़काऊ भाषण दिया, जिसको लेकर उसे गिरफ्तार किया गया था.

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पुणे पुलिस ने कालीचरण को गिरफ्तार कर, बुधवार को अदालत के सामने पेश किया था
पुणे पुलिस ने कालीचरण को गिरफ्तार कर, बुधवार को अदालत के सामने पेश किया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कालीचरण को 25,000 रुपये के जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया
  • अदालत ने कहा- जांच पूरी होने में समय लगेगा
  • तब तक आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता

भड़काऊ भाषण मामले में शुक्रवार देर शाम पुणे की एक अदालत ने कालीचरण महाराज (Kalicharan Maharaj) उर्फ ​​अभिजीत धनंजय सरग को जमानत दे दी है. पिछले महीने पुणे में कालीचरण ने भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके चलते उसे गिरफ्तार किया गया था.

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इस मामले में पुणे पुलिस ने कालीचरण महाराज को गिरफ्तार कर बुधवार को अदालत के सामने पेश किया था, जहां से उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था. महाराष्ट्र पुलिस कालीचरण को छत्तीसगढ़ के रायपुर से लाई थी. एक दिन की पुलिस हिरासत के बाद, गुरुवार को कालीचरण को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

वकीलों ने ये दिए तर्क

उसके वकील अमोल डांगे ने जमानत के लिए आवेदन दिया था. पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि कालीचरण के खिलाफ अपराध गैर-जमानती और गंभीर प्रकृति का था. अगर कालीचरण जमानत पर रिहा होता है, तो वह अपनी आज़ादी का गलत फायदा उठाकर अराजकता पैदा करने की कोशिश करेगा. 

डांगे ने तर्क दिया कि अपराध के लिए अधिकतम सजा 3 साल थी. जिस पुलिस अधिकारी ने उन्हें गिरफ्तार किया था, उन्होंने दंड संहिता की धारा 41 ए के तहत कोई नोटिस जारी नहीं किया था, जिससे ये गिरफ्तारी अवैध हो गई. उन्होंने आगे कहा कि FIR 7 दिन बाद दर्ज की गई थी, जिससे झूठे आरोप लगाने की संभावना पैदा हुई.

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25,000 रुपये के जमानत मुचलके पर रिहा

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि जांच पूरी होने में समय लगेगा. तब तक आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता. इसलिए कुछ शर्तें लगाकर आरोपी को जमानत पर छोड़ा जा सकता है. मजिस्ट्रेट ने जमानत का आवेदन स्वीकार किया और कालीचरण को 25,000 रुपये के जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया. 

आपको बता दें कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा आदिलशाही सेनापति अफजल खान को मारे जाने को लेकर पुणे की शुक्रावर पीठ में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. आरोप है कि उस कार्यक्रम में कालीचरण ने मुस्लिम और ईसाई समुदाय के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं.

 

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