अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन बेहद करीब (22 जनवरी) आ गया है. जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा मंदिर में की जानी है, उसे कर्नाटक के अरुण योगीराज ने बनाया है. अब प्राण प्रतिष्ठा से पहले अरुण की मां और पत्नी का बयान आया है. अरुण की मां सरस्वती ने कहा है,'मैं बहुत खुश हूं. यह पिछले 6 महीने में उसने जो किया उसका नतीजा है.
अरुण योगीराज की पत्नी विजेता ने कहा,'हम वास्तव में खुश हैं. हमें अरुण पर गर्व है. उन्होंने बहुत मेहनत से भगवान राम की मूर्ति तैयार की है.' इससे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अरुण योगीराज के काम के बारे में बताया था कि मूर्ति के निर्माण किसी भी तरह की गड़बड़ी ना हो इसलिए मूर्तिकार ने महीनों तक अपने परिवार के सदस्यों से तक बात नहीं की. उन्होंने बच्चों का चेहरा भी नहीं देखा.
बता दें कि मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकारों की पांच पीढ़ियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले अरुण योगीराज वर्तमान में देश में सबसे अधिक डिमांड वाले मूर्तिकार हैं. अरुण वह मूर्तिकार हैं, जिनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके हैं. अरुण के पिता योगीराज भी एक कुशल मूर्तिकार हैं. उनके दादा बसवन्ना शिल्पी को मैसूर के राजा का संरक्षण प्राप्त था. इसी पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले अरुण योगीराज भी बचपन से ही नक्काशी के काम से जुड़े रहे. एमबीए पूरा करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक एक निजी कंपनी में काम किया. लेकिन वह मूर्तिकला पेशे के कौशल से बच नहीं सके, जो कि उनमें जन्मजात था. इस तरह 2008 से उन्होंने अपना नक्काशी करियर ठीक से शुरू किया.
सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति तैयार की
बता दें कि इंडिया गेट में अमर जवान ज्योति के पीछे भव्य छत्र में सुभाष चंद्र बोस की 30 फीट की मूर्ति अरुण ने ही तैयार की है. दरअसल, पीएम मोदी की इच्छा थी कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती से पहले स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक प्रतिमा स्थापित की जाए, जिसका अरुण योगीराज ने भी समर्थन किया था. इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री को सुभाष चंद्र बोस की दो फीट ऊंची प्रतिमा भी भेंट की थी.
आदि शंकराचार्य की मूर्ति भी बनाई
इससे पहले अरुण योगीराज ने केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा भी बनाई थी. मैसूर जिले के चुंचनकट्टे में 21 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की 15 फीट ऊंची मूर्ति, मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सफेद अमृतशिला प्रतिमा, नंदी की छह फीट ऊंची अखंड मूर्ति, बनशंकरी देवी की छह फीट ऊंची मूर्ति मैसूर के राजा जयचामाराजेंद्र वोडेयार की 14.5 फीट ऊंची सफेद अमृतशिला प्रतिमा और कई अन्य प्रतिमाएं अरुण योगीराज ने ही बनाई हैं. अरुण को पहले भी कई संस्थाएं सम्मानित कर चुकी हैं. मैसूर के शाही परिवार ने भी उनके योगदान के लिए विशेष सम्मान दिया.
किन पुरस्कारों से नवाजे गए हैं अरुण
1. संयुक्त राष्ट्र संगठन के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान द्वारा ने कार्यशाला का दौरा किया और सराहना की.
2. मैसूर जिला प्रशासन ने नलवाड़ी पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया.
3. कर्नाटक शिल्प परिषद ने 2021 में मानद सदस्यता दी.
4. 2014 में भारत सरकार ने साउथ जोन यंग टैलेंटेड आर्टिस्ट अवॉर्ड दिया.
5. मूर्तिकार संघ ने शिल्पा कौस्तुभा पुरस्कार दिया.
6. मैसूरु जिला प्राधिकरण ने राज्योत्सव पुरस्कार दिया.
7. कर्नाटक राज्य के मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया.
8. मैसूरु जिले की खेल अकादमी ने सम्मानित किया.
9. अमरशिल्पी जकनाचार्य ट्रस्ट ने भी सम्मानित किया.
10. राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के मूर्तिकला शिविरों में भाग लिया.