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कर्नाटक: प्रवीण नेत्तारू की पत्नी की तरह सभी पीड़ित परिवारों को मिले मुआवजा और नौकरी, मुस्लिम डेलीगेशन की मांग

दक्षिण कन्नड़ जिले में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की ओर से सीरियल किलिंग की गई थी. राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद मुस्लिम डेलीगेशन ने ज्ञापन देकर मांग की है कि सभी पीड़ितों के साथ एकसमान व्यवहार किया जाए.

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प्रवीण नेत्तारू (फाइल फोटो)
प्रवीण नेत्तारू (फाइल फोटो)

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में बीते 1-2 साल में हुई सिलसिलेवार सांप्रदायिक हत्याओं को लेकर मुस्लिम डेलीगेशन ने सभी के साथ समान व्यवहार करने और सभी पीड़ितों को समान न्याय देने के लिए एक सरकार को ज्ञापन सौंपा. दक्षिण कन्नड़ जिले में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की ओर से सीरियल किलिंग की गई थी. डेलीगेशन ने आरोप लगाया कि यह क्षेत्र में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की वजह से हुआ है. वे सभी पीड़ितों को समान न्याय दिलाने की मांग करते हैं. इसको लेकर दक्षिण कन्नड़ जिले की कांग्रेस अल्पसंख्यक इकाई ने सरकार को एक ज्ञापन दिया है.  

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मुस्लिम डेलीगेशन ने मांग की है कि सरकार को सभी पीड़ितों के साथ न्याय करना चाहिए और मसूद, फाजिल, जलील और दिनेश कन्यादी के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए.  

पीड़ित परिवारों को मिलनी चाहिए सरकारी नौकरी

इसके साथ ही सरकार को चारों परिवारों में एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी देनी चाहिए. जैसे बीजेपी ने प्रवीण नेत्तारू की पत्नी को सरकारी नौकरी देकर मदद की थी. सभी हत्या के आरोपियों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए और सांप्रदायिक रूप से प्रेरित हत्याओं के सभी मामलों की जांच के लिए एसआईटी को गठित करना चाहिए. मुस्लिम डेलीगेशन ने यह ज्ञापन स्पीकर यूटी खादर के जरिए सरकार को सौंपा है.  

प्रवीण नेत्तारू मर्डर के बाद शुरू हुई जांच

बता दें कि पिछले साल जुलाई के महीने में बीजेपी कार्यकर्ता प्रवीण नेत्तारू की हत्या हुई थी. जांच में यह पता चला कि प्रवीण की हत्या 19 वर्षीय मसूद नाम की एक मुस्लिम युवक के मर्डर का बदला लेने के लिए की गई थी.  

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नेत्तारू की हत्या के बाद मुस्लिम लड़के फाजिल की हत्या हुई थी. आरोप है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने फाजिल की हत्या की थी. जांच में बताया गया कि प्रवीण की हत्या का बदला लेने के लिए फाजिल की हत्या की गई थी.  

मुस्लिम डेलीगेशन ने की समान व्यवहार की मांग

बीजेपी सरकार ने केवल नेत्तारू के परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा की और तत्कालीन सीएम बोम्मई उनके घर गए, लेकिन बीजेपी सरकार ने मुसलमानों को किसी भी मुआवजे की घोषणा नहीं की और न ही पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर गई. स्थानीय मुस्लिम संगठन ने उस वक्त मुआवजे का ऐलान किया था. चूंकि राज्य में सरकार बदल गई है, इसलिए पीड़ित अब सभी के साथ समान व्यवहार की मांग कर रहे हैं. 

 

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