scorecardresearch
 

केरलः कोच्चि में जहरीले धुएं से सांसों पर संकट, 110 एकड़ में फैले ब्रह्मपुरम के प्लांट का कचरा कैसे बना मुसीबत?

केरल के कोच्चि में 2 मार्च को एक कचरा प्लांट में आग लगी थी. आग से जहरीला धुआं उठ रहा है. इससे कोच्चि के लोगों का दम घुटने लगा है. सांस लेने में तकलीफ हो रही है. आग को बुझाने में अग्निशमन दल के 30 टैंकर, नौसेना के हेलिकॉप्टर्स और जवान लगे हुए हैं. ब्रह्मपुरम वेस्ट प्लांट में रोजाना 390 टन कचरा डंप किया जा रहा है. इसमें सिर्फ 64 प्रतिशत कचरा ही बायोडिग्रेडेबल है.

Advertisement
X
कोच्चि के ब्रह्मपुरम कचरा प्लांट की आग बुझाने में कई टीमें लगी हुई हैं (फोटो- Facebook)
कोच्चि के ब्रह्मपुरम कचरा प्लांट की आग बुझाने में कई टीमें लगी हुई हैं (फोटो- Facebook)

केरल के शहर कोच्चि की आबोहवा इन दिनों बेहद खतरनाक हो गई है. यहां ब्रह्मपुरम इलाके के कचरा प्लांट (Waste Plant) में लगी आग से जहरीला धुआं उठ रहा है. इससे कोच्चि के लोगों का दम घुट रहा है. वेस्टेज प्लांट में 2 मार्च को धधकी आग अभी तक शांत नहीं हो सकी है. आलम ये है कि जहरीले धुएं से सांस लेना भी दूभर हो गया है. लोगों की आंखों में जलन हो रही है. धुएं की गंध इतनी घातक है कि गले में जलन हो रही है. लोग अब इससे बचने के लिए मास्क लगा रहे हैं. वहीं, इस भीषण आग पर काबू पाने के लिए केरल का फायर फोर्स, भारतीय नौसेना, वायु सेना और कई सरकारी विभाग कड़ी मशक्कत कर रहे हैं. 

Advertisement

ब्रह्मपुरम प्लांट में इतना कचरा आया कैसे?

कोच्चि में वेस्टेज मैनेजमेंट लंबे समय से बड़ी समस्या रही है. ब्रह्मपुरम का वेस्टेज प्लांट कोच्चि के प्रमुख IT पार्कों के पास करीब 110 एकड़ में फैला हुआ है. 1998 में कोच्चि कॉर्पोरेशन ने शहर से 17 किमी दूर ब्रह्मपुरम में 37 एकड़ जमीन खरीदी थी. इसके बाद आंध्र प्रदेश प्रौद्योगिकी विकास निगम (Andhra Pradesh Technology Development Corporation) के साथ 2005 में वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए एक समझौते यानी एमओयू साइन किया गया था. लेकिन इस योजना का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया. 

फिर साल आया 2007 का. तब 15 एकड़ जमीन में एक प्लांट तैयार किया गया, लेकिन इसके शुरू होने से पहले ही कई समस्याएं सामने आईं. लिहाजा 19 करोड़ रुपये खर्च कर सभी समस्याओं का समाधान किया गया. जैसे-तैसे प्लांट का निर्माण पूरा हुआ. फिर साल 2008 में  प्लांट का उद्घाटन हुआ. जब ये शुरू हुआ तब यहां रोजाना 250 टन कचरे का ट्रीटमेंट किया जाता था. लेकिन डेढ़ साल में ही प्लांट खराब हो गया. इसकी बाकयदा जांच की गई. लेकिन जांच का नतीजा ढाक के तीन पात रहा. इस बीच कोच्चि कॉर्पोरेशन ने आसपास के लोगों की कचरे के निस्तारण की मांग को देखते हुए और ज्यादा जमीन अधिग्रहित की. इसके बाद ब्रह्मपुरम वेस्ट प्लांट 110 एकड़ में फैल गया.

Advertisement
वेस्ट प्लांट में लगी आग से जहरीला धुआं उठ रहा है (फोटो- फेसबुक)

प्लांट में रोजाना कितना कचरा डाला जा रहा?

वर्तमान में कोच्चि कॉर्पोरेशन के अलावा, कलामसेरी, अलुवा, अंगमाली, थ्रिक्काकारा, त्रिपुनिथारा नगरपालिकाएं और चेरनल्लूर, वाडवुकोड पुथनकुरीश पंचायतें भी ब्रह्मपुरम वेस्ट प्लांट में कचरा डंप कर रही हैं. ब्रह्मपुरम वेस्ट प्लांट में रोजाना 390 टन कचरा डाला जा रहा है. इसमें 64 प्रतिशत कचरा बायोडिग्रेडेबल है. जबकि शेष कचरा प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल है.

ये प्लानिंग भी हो गई फेल

वर्तमान में ब्रह्मपुरम में बेहद निम्न स्तर पर जैविक अपशिष्ट उपचार (Organic Waste Treatment) किया जा रहा है. प्लांट को प्लास्टिक कचरे से रिफ्यूज डेरिव्ड फ्यूल (Refuse Derived Fuel) ब्लॉक बनाने के लिए तैयार किया गया था. जिसका उपयोग सीमेंट कारखानों और बिजली प्लांटों में ईंधन के रूप में किया जाता है. लेकिन ये स्कीम भी फेल रही. 

2012 में कोच्चि निगम ने भारत ट्रेडर्स नाम की कंपनी से ब्रह्मपुरम में रखे प्लास्टिक को डेढ़ रुपये प्रति किलो की दर से बेचने का एग्रीमेंट किया था. हालांकि कंपनी केवल रिसाइकिल होने योग्य प्लास्टिक ही लेती है. बाकी को प्लांट में ही डंप कर दिया जाता है.

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू ही नहीं हुआ

2011 में सार्वजनिक और निजी भागीदारी के साथ ब्रह्मपुरम में अपशिष्ट से ऊर्जा यानी वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाने की योजना शुरू की गई थी. इस योजना के लिए 2015 में कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था और 2018 में आधारशिला रखी गई थी. हालांकि ये कॉन्ट्रैक्ट को 2020 में रद्द कर दिया गया था, क्योंकि कंपनी को भुगतान नहीं किया गया था. 

Advertisement
ब्रह्मपुरम कचरा प्लांट 110 एकड़ में फैला हुआ है (फोटो- पीटीआई)

NGT और  PCB के दखल का भी असर नहीं

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board) के कई हस्तक्षेपों के बावजूद कोच्चि कॉर्पोरेशन ब्रह्मपुरम वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट  (Brahmapuram Waste Management Plant) के कामकाज में सुधार नहीं कर सका है. प्लांट बिना मूलभूत सुविधाओं के काम कर रहा है. हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कचरा निस्तारण के नियमों का पालन न करने पर कोच्चि कॉर्पोरेशन पर 14.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था. हालांकि निगम ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे की मांग की थी.

क्या है पूरा मामला ?

2 मार्च 2023 को केरल के बंदरगाह शहर कोच्चि के ब्रह्मपुरम इलाके के कचरा प्लांट में आग लगी. तब से आग बुझ नहीं रही है. जलते हुए कचरे से निकल रहा धुआं जहरीला है. इसने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में कर लिया है. इस मामले में केरल हाईकोर्ट के जस्टिस एसवी भट्टी और बसंत बालाजी ने सरकार और प्रशासन को फटकार लगाई है. कहा कि शहर गैस चेंबर बना हुआ है. कोच्चि के लोग इस चेंबर में फंसे हुए हैं. जल्द से जल्द इस आग को बुझाने का निर्देश भी दिया.

वेस्ट प्लांट की आग बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर का भी सहारा लिया जा रहा है (फोटो- साउदर्न नेवल कमांड/इंडियन नेवी)

PCB का क्या है आरोप?  

Advertisement

केरल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरोप लगाया है कि कोच्चि कॉर्पोरेशन प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए बोर्ड द्वारा दिए गए निर्देशों को नहीं मानता. इस वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. इस पर कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग अथॉरिटी एकदूसरे पर आरोप न लगाएं, तत्काल इस प्रदूषण के स्तर को सुधारें.

कितनी टीमें लगी हैं आग बुझाने में?

ब्रह्मपुरम कचरा प्लांट में लगे आग को बुझाने में अग्निशमन दल के 30 टैंकर, नौसेना के हेलिकॉप्टर्स और जवान लगे हुए हैं. भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से यंत्र लेकर इस कचरे की आग बुझाने का प्रयास जारी है. लेकिन स्थिति सुधर नहीं रही है. शहर पूरा धुएं में लिपटा हुआ है.


ये भी देखें

 

Advertisement
Advertisement