केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा सदन से पारित सात बिलों के राष्ट्रपति के पास लंबे समय से लंबित रख कर रद्द करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. और कहा कि विधेयकों को लंबे वक्त तक लंबित रखने का राज्यपाल का आचरण मनमाना है.
केरल सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहमति के लिए सात विधेयकों को आरक्षित करने के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. विजयन सरकार ने इस मामले में राज्यपाल की भूमिका पर भी कानूनी और संवैधानिक सवाल उठाए हैं. राज्यपाल ने सदन में पारित हुए ये बिल राष्ट्रपति को भेजे थे.
'मनमाना है राज्यपाल का आचरण'
केरल सरकार ने याचिका में कहा कि इन सात विधेयकों को लंबे वक्त तक लंबित रखने और बिना किसी कारण के इन विधेयकों को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेज दिया. राज्यपाल का ये आचरण स्पष्ट रूप से मनमाना है और ये संविधान का उल्लंघन है.
केरल सरकार ने ये भी कहा कि मामला राज्यपाल के कानामों से संबंधित है. केरल के राज्यपाल ने पूरे 7 विधेयकों को, जिन्हें उन्हें खुद निपटाना था, लेकिन उन्होंने इन सभी विधेयकों को राष्ट्रपति के पास आरक्षित कर दिया. हालांकि, 7 विधेयकों में से एक भी केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित नहीं है.