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पद्मनाभ मंदिर: जिला जज गैर हिन्दू रहा तो प्रबंधन में शामिल होगा हिन्दू सदस्य

पद्मनाभ स्वामी मंदिर पर नए प्रावधानों के मुताबिक यदि तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कोई गैर-हिंदू हों तो एक हिंदू, प्रशासनिक समिति का हिस्सा होगा.

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केरल का पद्मनाभ मंदिर
केरल का पद्मनाभ मंदिर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • SC ने शाही परिवार को दो संशोधनों को माना
  • प्रशासनिक समिति का हिस्सा होगा हिन्दू
  • मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ की संपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर के प्रबंधन के संबंध में त्रावणकोर के पूर्ववर्ती शाही परिवार द्वारा सुझाए गए दो संशोधनों को स्वीकार कर लिया है. 

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नए प्रावधानों के मुताबिक यदि तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कोई गैर-हिंदू हों तो एक हिंदू, प्रशासनिक समिति का हिस्सा होगा. 

इसके अलावा केरल के एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज सलाहकार समिति के प्रमुख होंगे. यह सलाहकार समिति मंदिर से जुड़े नीतिगत मामलों पर निर्णय लेगी. दोनों समितियों की स्थापना के लिए 4 सप्ताह दिए गए हैं. 

बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभ स्वामी मंदिर के प्रशासन में त्रावणकोर के शाही परिवार को मंदिर के प्रबंधन में दखल देने की इजाजत दी थी. 

हिन्दू बनेगा प्रशासनिक समिति का हिस्सा

अब अदालत ने यह भी मान लिया है कि अगर तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गैर हिन्दू रहा तो एक अन्य हिन्दू व्यक्ति मंदिर के प्रशासनिक समिति का हिस्सा होगा. 

पढ़ें- पद्मनाभस्वामी मंदिर केस: SC ने सुनाया फैसला- जिला जज की अगुवाई में बनेगी कमेटी

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन का विवाद नौ सालों से कोर्ट में लंबित था. केरल हाई कोर्ट के फैसले को त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. एक अनुमान के मुताबिक मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है.

18वीं सदी का है मंदिर 

भगवान पद्मनाभ (विष्णु) स्वामी के इस भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं सदी में त्रावणकोर राजकुल ने कराया था. इसी राज परिवार ने 1947 तक भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था. स्वतंत्रता के बाद भी मंदिर का संचालन पूर्ववर्ती राजपरिवार के नियंत्रण वाला ट्रस्ट ही करता रहा.
 

 

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