मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) हुई. ये महापंचायत जीआईसी ग्राउंड पर हुई. दावा है कि इस महापंचायत में 300 से ज्यादा किसान संगठन शामिल हुए. संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि ये किसानों की अब तक की सबसे बड़ी महपंचायत है. महापंचायत में पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर अगर हमारी कब्रगाह भी बन गई, तो भी हम वहां से नहीं हटेंगे.
मुजफ्फरनगर से बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का कहना है कि अगर किसान नेता राजनीति में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है. उन्होंने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा, अगर वो (संयुक्त किसान मोर्चा) राजनीति में आना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे.
If they (Samyukta Kisan Morcha) wants to come in politics then we will welcome them: Union Minister & Muzaffarnagar MP Sanjeev Balyan pic.twitter.com/ij9wZjjMip
— ANI UP (@ANINewsUP) September 5, 2021
राकेश टिकैत ने दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों को लेकर भी बात कही. उन्होंने कहा कि भले ही वहां हमारी कब्रगाह बन जाए, लेकिन हम वहां से नहीं जाएंगे. उन्होंने कहा, 'हम आपसे वादा लेकर जाते हैं कि अगर वहां पर हमारी कब्रगाह बनेगी तो भी हम मोर्चा नहीं छोड़ेंगे. बगैर जीते वापस नहीं आएंगे.'
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि ये लोग बांटने का काम कर रहे हैं, हमें इन्हें रोकना है. पहले देश में अल्लाहु-अकबर और हर-हर महादेव के नारे साथ-साथ लगाए जाते थे और आगे भी लगेंगे. उन्होंने भीड़ से अल्लाहु-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए. उन्होंने कहा, यूपी की जमीन को दंगा करवाने वालों को नहीं देंगे. टिकैत ने कहा कि ये लड़ाई तीन काले कानूनों से शुरू हुई. 28 जनवरी को आंदोलन का कत्ल होता. हजारों की फोर्स थी, हम सैकड़ों थे, लेकिन डटे रहे. टिकैत ने कहा कि जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक हम वहां से हटेंगे नहीं. हम किसी भी कीमत पर वहां से नहीं जाएंगे. हमें फसलों पर एमएसपी की गारंटी चाहिए और जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी, तब तक पूरे देश में संयुक्त मोर्चा आंदोलन करेगा.
(इनपुटः कुमार कुणाल)
टिकैत ने कहा कि देश में सेल फॉर इंडिया का बोर्ड लगा है और इसे खरीदने वाले अंबानी-अडाणी हैं. उन्होंने कहा, FCI के गोदाम भी कंपनी को दे दिए. बंदरगाह भी बिक गए, मछली पालन और नमक के किसान पर असर होगा. ये पानी भी बेचेंगे. भारत बिकाऊ है, ये भारत सरकार की पॉलिसी है. अंबेडकर का संविधान भी खतरे में है.
(इनपुटः कुमार कुणाल)
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 9 महीने से आंदोलन हो रहा है लेकिन सरकार ने बात बंद कर दी. सैंकड़ों किसानों के लिए एक मिनट का मौन नहीं किया. उन्होंने कहा, देश में बड़ी मीटिंग करनी होगी. सिर्फ मिशन UP नहीं देश बचाना होगा. बेरोजगारी और जिस तरह से चीज बेची जा रही है, उसकी अनुमति किसने दी.
किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि 8 अप्रैल 1857 को मेरठ में बगावत हुई थी और उसने अंग्रेजी शासन खत्म कर दिया था. अब उसी तरह का जोश मुजफ्फरनगर में दिख रहा है. जिस तरह से ईस्ट इंडिया कंपनी को हटाया, उसी तरह मोदी-शाह को हटाना है. उन्होंने बताया कि अगर मीटिंग 9 और 10 सितंबर को लखनऊ में गन्ने को लेकर होगी.
(इनपुटः कुमार कुणाल)
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा कि देश किसानों के साथ है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि किसानों की हुंकार के सामने सत्ता का अहंकार नहीं चलता. खेती-किसानी बचाने और अपनी मेहनत का हक मांगने की लड़ाई में देश आपके साथ है.
किसान इस देश की आवाज हैं।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) September 5, 2021
किसान देश का गौरव हैं।
किसानों की हुंकार के सामने किसी भी सत्ता का अहंकार नहीं चलता।
खेती-किसानी को बचाने और अपनी मेहनत का हक मांगने की लड़ाई में पूरा देश किसानों के साथ है।#मुजफ्फरनगर_किसान_महापंचायत
मंच पर किसानों के कई बड़े नेता मौजूद हैं. ये वो नेता हैं जिन्होंने पिछले 10 महीने से चले आ रहे किसान आंदोलन का नेतृत्व किया है. इनमें राकेश टिकैत के अलावा योगेंद्र यादव समेत कई किसान संगठनों के नेता मौजूद हैं. जीआईसी मैदान इस वक्त किसानों की भीड़ से पटा हुआ है. सिर्फ जमीन ही नहीं बल्कि दीवारों पर भी लोग खड़े हुए हैं.
किसान महापंचायत का मंच है तैयार। हज़ारों की संख्या में किसान हुए शामिल। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान से देखिए कुमार कुणाल की ग्राउंड रिपोर्ट।#ReporterDiary | @kumarkunalmedia#UttarPradesh #Muzaffarnagar #mahapanchayat pic.twitter.com/pVaJyXYhV7
— AajTak (@aajtak) September 5, 2021
महापंचायत को लेकर एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार का कहना है कि अब तक सबकुछ सही तरीके से चल रहा है और जहां भीड़ है वहां सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है. आयोजकों से भी बात कर ली गई है कि कोई भी असामाजिक या उपद्रवी तत्व उनके बीच ने आ जाए, जिससे कोई गड़बड़ी हो. किसान आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है. विश्वास है कि ये रैली सकुशल संपन्न होगी और जब तक सारे किसान वापस नहीं चले जाते, तब तक सारी व्यवस्थाएं बनी रहेंगी.
(इनपुटः समर्थ श्रीवास्तव)
मुजफ्फरनगर की सड़कों पर सैकड़ों-हजारों की तादाद में किसान जुटे हैं. बताया जा रहा है कि जीआईसी मैदान पर ही लाखों किसान बैठे हैं और इतने ही किसान बाहर भी हैं. मुजफ्फरनगर की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं है. तस्वीर में देख सकते हैं कि सड़क किसान प्रदर्शनकारियों से किस तरह भरी हुई है.
बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने ट्वीट कर किसानों के दर्द को समझने की बात कही है. उन्होंने लिखा, 'मुजफ्फरनगर में आज प्रदर्शन के लिए लाखों किसान जुटे हैं. वो हमारा अपना ही खून हैं. हमें उनके साथ फिर से सम्मानजनक तरीके से जुड़ने की जरूरत है. उनका दर्द समझें, उनका नजरिया देखें और जमीन तक पहुंचने के लिए उनके साथ काम करें.'
Lakhs of farmers have gathered in protest today, in Muzaffarnagar. They are our own flesh and blood. We need to start re-engaging with them in a respectful manner: understand their pain, their point of view and work with them in reaching common ground. pic.twitter.com/ZIgg1CGZLn
— Varun Gandhi (@varungandhi80) September 5, 2021
राकेश टिकैत महापंचायत में पहुंच गए हैं. साढ़े 11 बजे के आसपास उनका काफिला मुजफ्फरनगर पहुंच गया था. अब टिकैत मंच पर पहुंच गए हैं और कुछ देर में किसानों को भी संबोधित करेंगे.
राकेश टिकैत का काफिला मुजफ्फरनगर पहुंच गया है. उनके स्वागत के लिए सड़कों की दोर और सैकड़ों की तादाद में भीड़ इकट्ठी हुई है. राकेश टिकैत भी गाड़ी पर खड़े होकर उनका अभिवादन कर रहे हैं. टिकैत कुछ ही देर में जीआईसी मैदान पहुंच जाएंगे, जहां महापंचायत हो रही है.
(इनपुटः कुमार कुणाल)
महापंचायत में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भी आईं हैं. यहां आईं महिलाओं ने केंद्र सरकार से तीनों कानूनों की वापसी की मांग की है. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने फोटो ट्वीट कर महापंचायत में उमड़ी भीड़ को 'ताकत' बताया है. संयुक्ति किसान मोर्चा का कहना है कि अब सरकार को किसानों की मांग मान लेनी चाहिए.
केंद्र सरकार जिन्हें "चंद किसान" बताकर नकार रही थी, आज उन किसानों ने अपनी ताकत दिखाई है। अब केंद्र सरकार अपनी बेशर्मी छोड़े और किसानों को मांगे माने।#मुजफ्फरनगर_किसान_महापंचायत pic.twitter.com/BACqNzxndt
— Kisan Ekta Morcha (@Kisanektamorcha) September 5, 2021
किसानों की ये महापंचायत 11 बजे से शुरू हो जाएगी. किसान नेता राकेश टिकैत भी यहां पहुंचने वाले हैं. टिकैत के गृह जिले में ही ये महापंचायत हो रही है. टिकैत सुबह गाजीपुर से निकल गए थे और अभी रास्ते में हैं. बताया जा रहा है कि कुछ ही देर में वो जीआईसी मैदान पहुंच जाएंगे, जहां महापंचायत हो रही है.
महापंचायत में शामिल होने आए लोगों के खाने के लिए लंगर की व्यवस्था की गई है. जानकारी के मुताबिक, यहां 500 लंगर लगाई गई हैं. रविवार सुबह से ही लोगों यहां पहुंचने लगे हैं और कुछ ही देर में अब महापंचायत शुरू होने जा रही है.
(इनपुटः नसीर अजीज खान)
महापंचायत में शामिल होने के लिए किसान नेता राकेश टिकैत सुबह ही गाजीपुर से रवाना हो चुके हैं. वो अभी रास्ते में हैं. मुजफ्फरनगर के लिए निकलने से पहले टिकैत ने आज तक से खास बातचीत में कहा था कि वो 10 महीने बाद मुजफ्फरनगर जा रहे हैं, लेकिन वो यहां की मिट्टी में कदम नहीं रखेंगे. उनका कहना है कि जब तक कानून वापसी नहीं होगी, तब तक घर वापसी भी नहीं होगी.
मुजफ्फरनगर में शनिवार से ही किसानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और सुबह से ही यहां जीआईसी मैदान पर किसान जुटने लगे हैं. मुजफ्फरनगर के जिस मैदान में महापंचायत होनी है, वहां लगभग सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. मंच भी तैयार हो चुका है और पंडाल भी सज गया है.
मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान पर सुबह से ही किसानों का जुटना शुरू हो गया है. हजारों की संख्या में किसान पहुंच चुके हैं. आज एक ऐतिहासिक चीज ये भी होने वाली है कि दो भाई एक मंच पर आने वाले हैं. राकेश टिकैत और नरेश टिकैत मंच पर होंगे. वॉलंटियर मौजूद हैं. मेडिकल कैम्प लगाए गए हैं, ताकि किसी की तबीयत बिगड़े तो उसे मदद मिल सके. लंगर लगाए गए हैं. पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी यहां तैनात हैं. पंचायत सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलनी है.
यूपी के मुज़फ्फरनगर में किसान महापंचायत के लिए तैयारी। देखिये, @isamarths की #GroundReport#ATVideo pic.twitter.com/tVjmNwBT06
— AajTak (@aajtak) September 5, 2021
(इनपुटः समर्थ श्रीवास्तव)
किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) 10 महीने बाद मुजफ्फरनगर जाएंगे. टिकैत मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले हैं और जब से किसान आंदोलन (Farmer Protest) शुरू हुआ है, तब से उन्होंने यहां कदम नहीं रखा है. टिकैत ने कहा, 'जब से आंदोलन शुरू हुआ है तब से मैं पहली बार मुजफ्फरनगर जा रहा हूं और वो भी गलियारे से जाऊंगा. वहां की जमीन पर कदम भी नहीं रखूंगा और अपने घर की तरफ देख लूंगा, वहां के लोगों को देख लूंगा.'
उन्होंने कहा, 'इसे आप जो भी समझे लेकिन जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं. जो लोग आजादी की लड़ाई के लिए लड़े, उन्हें काला पानी की सजा हुई तो वो कभी घर गए ही नहीं गए. ये भी एक तरीके का काला कानून है और जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक घर नहीं जाएंगे.'
गाज़ीपुर से मुज़फ्फरनगर के लिए रवाना होने को तैयार राकेश टिकैत। आजतक संवाददाता कुमार कुणाल ने की उनसे बात। देखिए रिपोर्ट।#ReporterDiary | @kumarkunalmedia#UttarPradesh #Muzaffarnagar #mahapanchayat pic.twitter.com/7iHQgqfuXJ
— AajTak (@aajtak) September 5, 2021
पढ़ें-- राकेश टिकैत ने खुद को क्यों दी 'काला पानी' की सजा? मुजफ्फरनगर की मिट्टी पर नहीं रखेंगे कदम
(इनपुटः कुमार कुणाल)
मुजफ्फरनगर के जिस जीआईसी ग्राउंड में महापंचायत हो रही है, वहां 50 हजार से ज्यादा लोग जुट सकते हैं. बताया जा रहा है कि इसमें 40 से ज्यादा किसान संगठन शामिल हो रहे हैं. लेकिन इसका असर अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी दिख सकता है. पश्चिमी यूपी किसानों के दबदबे वाला क्षेत्र है और यहां राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें आती हैं. महापंचायत कैसी होती है और क्या प्रभाव डालती है, इससे इलाके की भविष्य की राजनीति भी तय होगी. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव युद्धवीर सिंह का कहना है कि इसमें यूपी, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत कई राज्यों से किसान आ रहे हैं. उनका कहना है कि इसमें 10 लाख किसानों के जुटने की उम्मीद है.
राकेश टिकैत के 'यूपी कूच' के पीछे क्या है
— AajTak (@aajtak) September 4, 2021
देखिए #Khabardar सईद अंसारी के साथ pic.twitter.com/tzvFkM35JB
(इनपुटः कुमार कुणाल)
हिमाचल के किसानों ने 13 सितंबर को कॉर्पोरेट लूट के विरोध में प्रदर्शन की घोषणा की है. वहीं नासिक में किसानों ने टमाटर के लिए दो-तीन रुपये प्रति किलो की मामूली कीमत मिलने पर सड़कों पर टमाटर फेंक कर विरोध प्रदर्शन किया. मोर्चा ने कहा है कि टमाटर हो या सेब, सभी फलों, सब्जियों, कृषि उत्पादों, वनोपज, दूध, मछली की एमएसपी पर खरीद की गारंटी देने की जरूरत है. इसलिए 600 किसानों की शहादत के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है और मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा.
(इनपुटः रामकिंकर सिंह)
संयुक्त किसान मोर्चा ने मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों के लोगों से किसानों की मदद करने की अपील की है. इस महापंचायत को किसान संगठनों के प्रमुख नेता संबोधित करेंगे. महापंचायत में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कार्यक्रमों के साथ ही भारत बंद को लेकर भी कुछ अहम घोषणा हो सकती है.
संयुक्त किसान मोर्चा का दावा है कि इस महापंचायत में 15 राज्यों के हजारों से ज्यादा किसान जुटेंगे. SKM का कहना है कि ये महापंचायत मोदी-योगी को किसानों, खेती मजदूरों और किसान आंदोलन के समर्थकों की ताकत का एहसास कराएगी.
किसान संगठनों ने बताया कि मुजफ्फरनगर में महापंचायत को देखते हुए वहां 500 लंगर शुरू किए गए हैं. साथ ही 100 चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं. साथ ही महापंचायत को ठीक ढंग से करने के लिए 5000 वॉलंटियर भी तैनात किए गए हैं.
पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े तीन कानून लागू किए थे. इन्हीं तीन कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसान और सरकार के बीच 11 बार बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी. किसान चाहते हैं कि सरकार तीनों कानूनों को रद्द करे और MSP पर गारंटी का कानून लेकर आए. लेकिन सरकार का कहना है कि वो कानूनों को वापस नहीं ले सकती. अगर किसान चाहते हैं, तो उनके हिसाब से इसमें संशोधन किए जा सकते हैं.