कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के मामले में पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल सवालों के घेरे में हैं. इस केस में पुलिस जांच को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि विनीत गोयल का दावा है कि कोलकाता पुलिस ने वही किया जो सही था. मामले की जांच अब सीबीआई के हाथों में हैं. विनीत गोयल पर उठे सवालों के बीच जिक्र आया है पश्चिम बंगाल के कामदुनी गांव में 2013 में हुए एक वीभत्स रेप कांड का. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और 2013 में कामदुनी में क्या हुआ था?
कामदुनी केस से हो रही तुलना
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई घटना की तुलना कामदुनी रेप केस से की जा रही है. कोर्ट में दोनों मामलों की जांच की तुलना करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील ने विनीत गोयल की भूमिका पर सवाल उठाया और अतीत में इसी तरह के एक मामले में उसकी संलिप्तता का हवाला दिया.
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया कि, 'यह पूरी तरह संभव है कि ममता बनर्जी के निर्देश पर कोलकाता पुलिस ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बलात्कार और हत्या मामले में सबूत मिटा दिए हों. कोलकाता पुलिस द्वारा शुरुआती कार्रवाई भी बहुत भरोसा नहीं जगाती.'
शेयर किया सुनवाई का वीडियो
उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई का एक वीडियो भी शेयर किया. वीडियो में याचिकाकर्ताओं के एक वकील, जो मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, मामले में कमिश्नर विनीत गोयल की भूमिका पर सवाल उठाते हैं और अतीत में इसी तरह के एक मामले में उनकी संलिप्तता का हवाला देते हैं.
मालवीय ने आगे लिखा, 'कोलकाता पुलिस के कमिश्नर विनीत कुमार गोयल से मिलिए. सीआईडी के महानिरीक्षक के तौर पर वे बहुचर्चित बलात्कार और हत्या मामले में जांच अधिकारी थे, जिसे उन्होंने पूरी तरह से विफल कर दिया. कामदुनी मामले में पीड़िता के शरीर पर खरोंच के निशान बनाने जैसी ही कार्यप्रणाली आरजी कर मामले में भी अपनाई गई.'
विनीत गोयल पर लगाए आरोप
उन्होंने कहा, 'संभव है कि विनीत गोयल ने ममता बनर्जी के लिए यह काम पहले ही कर दिया हो और सीबीआई को शायद ज्यादा कुछ न मिल पाए. जो भी थोड़ा-बहुत सबूत बचा था, उसे भीड़ ने कल रात नष्ट कर दिया.' दरअसल अमित मालवीय 2013 में बारासात जिले के एक गांव में 20 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या का जिक्र कर रहे थे. इस मामले के दौरान विनीत गोयल राज्य सीआईडी के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) थे.
क्या है कामदुनी रेप कांड?
7 जून 2013 को पश्चिम बंगाल के कामदुनी गांव में एक 20 साल की कॉलेज छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई. यह घटना उत्तर 24 परगना जिले के बारासात से सिर्फ 16 किमी दूर हुई, जो राजधानी कोलकाता से लगभग 20 किमी दूर है.
शिप्रा घोष नाम की पीड़िता डेरोजियो कॉलेज की बीए सेकेंड ईयर की छात्रा थी. दोपहर में वह कामदुनी बीडीओ ऑफिस रोड से होकर घर जा रही थी. इस दौरान उसका अपहरण कर लिया गया और एक फैक्ट्री के अंदर ले जाया गया, जहां आठ लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया.
शव के साथ की बर्बरता
बलात्कार करने के बाद अपराधियों ने उसके पैरों को नाभि तक फाड़ दिया, उसका गला काट दिया और उसके शरीर को पास के एक खेत में फेंक दिया. रात करीब 8:30 बजे, पीड़िता के भाइयों को राजारहाट के खारीबारी में एक मछली पालन क्षेत्र के पास अपनी बहन का शव मिला.
रात लगभग 9:45 बजे शव की बरामदगी को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच विवाद और फिर झड़प हुई. भीड़ ने पुलिस की तीन गाड़ियों को तोड़ दिया. लगभग 2 बजे, पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी ने पीड़िता के शव को ग्रामीणों से बरामद किया और पोस्टमॉर्टम के लिए बारासात भेज दिया.
सीआईडी कर रही थी मामले की जांच
बाद में मुख्य आरोपी अंसार अली समेत सभी आठ आरोपियों को एक-एक कर पकड़ लिया गया. मामले की जांच सीआईडी, पश्चिम बंगाल द्वारा की जा रही थी. 16 जून को, सीआईडी अधिकारी पुलिस और भारतीय रिजर्व बटालियन की कड़ी सुरक्षा के बीच सभी आरोपियों को घटना के रिक्रिएशन के लिए कामदुनी ले गए.
17 जून को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कामदुनी का दौरा किया. उन्होंने वादा किया कि घटना के 15 दिनों के भीतर गिरफ्तार लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश की जाएगी और उनकी सरकार दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग करेगी.
जनवरी 2016 में सुनाई गई सजा
आखिरकार जनवरी 2016 में आरोपियों को सजा सुनाई गई. कुछ को मौत की सजा दी गई जिसमें अंसार अली, सैफुल अली और अमीनुल अली शामिल थे. जबकि अन्य, इमानुल इस्लाम, अमीनुर इस्लाम और भोला नस्कर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
हालांकि, 6 अक्टूबर 2023 को, कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और अजय कुमार गुप्ता शामिल थे, ने इमानुल इस्लाम, अमीनुर इस्लाम और भोला नस्कर को सामूहिक बलात्कार के आरोप से बरी कर दिया और उन्हें आपराधिक साजिश और सबूतों को गायब करने का दोषी ठहराया. .
आजीवन कारावास वाले 7 साल में हो गए रिहा
हाई कोर्ट ने अमीनुल अली को बरी कर दिया और सैफुल अली और अंसार अली की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया. अदालत ने अन्य तीन दोषियों को भी हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 7 साल कर दिया गया था. वे पहले ही 10 साल की सजा काट चुके थे.
9 अक्टूबर को सुबह 4 बजे बंगाल सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर रोक लगाने का आदेश तो नहीं दिया लेकिन सभी पक्षों को एक हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया.
आईपीएस विनीत गोयल कौन हैं?
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी विनीत गोयल कोलकाता पुलिस के वर्तमान आयुक्त हैं. उन्हें 1 जनवरी, 2022 को कोलकाता पुलिस के आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था. उन्होंने सौमेन मित्रा की जगह ली थी जो 31 दिसंबर, 2021 को सेवानिवृत्त हुए थे.
वे आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने कोलकाता पुलिस और राज्य पुलिस दोनों में विभिन्न प्रमुख पदों पर काम किया है. आयुक्त बनने से पहले, गोयल राज्य पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) थे. उन्होंने डीसीपी (यातायात) सहित पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के रूप में भी काम किया है और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद तक पहुंचे हैं.
पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के कार्यालय की कथित रूप से निंदा करने और प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के लिए गोयल और डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी) सेंट्रल इंदिरा मुखर्जी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी.